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598 में सिर्फ 302 स्कूलों का ही हुआ विलीनीकरण
Updated Mon, 21 May 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
छात्र संख्या कम होने के कारण राज्य के 254 प्राथमिक और 45 उच्च प्राथमिक विद्यालयों का दूसरे विद्यालयों में विलीनीकरण कर दिया गया है। हालांकि यह संख्या चिह्नित 452 प्राथमिक और 148 उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिहाज से काफी कम है। इस बाबत अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा ने जिला मुख्य शिक्षा अधिकारियों से जवाब मांगा है। साथ ही विलीन किए गए विद्यालयों के शिक्षकों को भी दूसरे विद्यालयों में समायोजित करने का आदेश जारी किया है।
बता दें राज्य में कई ऐसे विद्यालय हैं जहां छात्रों की संख्या बेहद कम है। कई विद्यालय में छात्रों की संख्या 10 से कम हो गई थी, जबकि स्कूलों में शिक्षकों की संख्या पर्याप्त थी। इसे गंभीरता से लेते हुए अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा ने ऐसे विद्यालयों को चिह्नित कर उन्हें पास के विद्यालयों में विलीनीकरण करने के निर्देश जिला मुख्य शिक्षा अधिकारियों को दिए थे। इसके तहत राज्य में कुल 452 प्राथमिक और 148 उच्च प्राथमिक विद्यालयों को चिह्नित किया गया था। इस कार्रवाई में अब तक उत्तरकाशी में 18 प्राथमिक और 22 उच्च प्राथमिक, बागेश्वर में 22 प्राथमिक, नैनीताल में 19 प्राथमिक, अल्मोड़ा में 43 प्राथमिक और नौ उच्च प्राथमिक, उधमसिंहनगर में दो प्राथमिक और दो उच्च प्राथमिक विद्यालय, हरिद्वार में 18 प्राथमिक और चार उच्च प्राथमिक, पौड़ी गढ़वाल में 43 प्राथमिक और 8 उच्च प्राथमिक, देहरादून में 10 प्राथमिक और एक उच्च प्राथमिक, रुद्रप्रयाग में 10 प्राथमिक और दो उच्च प्राथमिक, चंपावत में आठ प्राथमिक और एक उच्च प्राथमिक, व पिथौरागढ़ में 30 प्राथमिक व छह उच्च प्राथमिक विद्यालयों का ही विलीनीकरण किया गया है। इसको लेकर अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा ने शेष विद्यालयों के बाबत जिला मुख्य शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। साथ ही विलीन किए गए विद्यालयों के शिक्षकों को कम शिक्षक वाले विद्यालयों में समायोजित करने के निर्देश दिए हैं।
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छात्र संख्या कम होने के कारण राज्य के 254 प्राथमिक और 45 उच्च प्राथमिक विद्यालयों का दूसरे विद्यालयों में विलीनीकरण कर दिया गया है। हालांकि यह संख्या चिह्नित 452 प्राथमिक और 148 उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिहाज से काफी कम है। इस बाबत अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा ने जिला मुख्य शिक्षा अधिकारियों से जवाब मांगा है। साथ ही विलीन किए गए विद्यालयों के शिक्षकों को भी दूसरे विद्यालयों में समायोजित करने का आदेश जारी किया है।
बता दें राज्य में कई ऐसे विद्यालय हैं जहां छात्रों की संख्या बेहद कम है। कई विद्यालय में छात्रों की संख्या 10 से कम हो गई थी, जबकि स्कूलों में शिक्षकों की संख्या पर्याप्त थी। इसे गंभीरता से लेते हुए अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा ने ऐसे विद्यालयों को चिह्नित कर उन्हें पास के विद्यालयों में विलीनीकरण करने के निर्देश जिला मुख्य शिक्षा अधिकारियों को दिए थे। इसके तहत राज्य में कुल 452 प्राथमिक और 148 उच्च प्राथमिक विद्यालयों को चिह्नित किया गया था। इस कार्रवाई में अब तक उत्तरकाशी में 18 प्राथमिक और 22 उच्च प्राथमिक, बागेश्वर में 22 प्राथमिक, नैनीताल में 19 प्राथमिक, अल्मोड़ा में 43 प्राथमिक और नौ उच्च प्राथमिक, उधमसिंहनगर में दो प्राथमिक और दो उच्च प्राथमिक विद्यालय, हरिद्वार में 18 प्राथमिक और चार उच्च प्राथमिक, पौड़ी गढ़वाल में 43 प्राथमिक और 8 उच्च प्राथमिक, देहरादून में 10 प्राथमिक और एक उच्च प्राथमिक, रुद्रप्रयाग में 10 प्राथमिक और दो उच्च प्राथमिक, चंपावत में आठ प्राथमिक और एक उच्च प्राथमिक, व पिथौरागढ़ में 30 प्राथमिक व छह उच्च प्राथमिक विद्यालयों का ही विलीनीकरण किया गया है। इसको लेकर अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा ने शेष विद्यालयों के बाबत जिला मुख्य शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। साथ ही विलीन किए गए विद्यालयों के शिक्षकों को कम शिक्षक वाले विद्यालयों में समायोजित करने के निर्देश दिए हैं।
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