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अनाथ बच्चों को सरकार दिखाएगी फिल्म ‘72 आवर्स’ यह है इसके पीछे की खास वजह
Tue, 29 Jan 2019 08:48 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Tue, 29 Jan 2019 08:48 AM IST
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'72 Hours: Martyr Who Never Died' के निर्माताओं को नोटिस
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उत्तराखंड सरकार अनाथ बच्चों को फिल्म ‘72 आवर्स’ दिखाएगी।
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उत्तराखंड के शौर्य और गौरव की झलक दिखलाती फिल्म ‘72 आवर्स’ के प्रमोशन में राज्य सरकार अपने स्तर पर जुट गई है। राजधानी में अनाथ बच्चों को यह फिल्म दिखाने का निर्णय लिया है।
संस्कृति विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। संभव है कि संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज अनाथ बच्चों के साथ मौजूद रहकर यह फिल्म देखें। इससे पहले, गढ़वाली फिल्म भुली ओ भुली के प्रमोशन के लिए भी इस तरह का प्रयोग किया जा चुका है।
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इसमें मंत्री और अफसरों ने स्कूली बच्चों के साथ यह फिल्म देखी थी। विभागीय अफसरों के साथ संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज इस मामले में बैठक भी कर चुके हैं। महाराज का कहना है कि ‘72 आवर्स’ उत्तराखंड की वीरता और देशभक्ति को सामने लाने वाली फिल्म है। संस्कृति निदेशक बीना भट्ट के अनुसार, विभागीय स्तर से अनाथ बच्चों को फिल्म दिखाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
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यह है फिल्म की खासियत
यह फिल्म चार गढ़वाल राइफल्स उत्तराखंड के राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की बहादुरी से भरी दास्तान है। 1962 में भारत चीन युद्घ के दौरान अरुणाचल प्रदेश में नूरानंग की लड़ाई में वे शहीद हो गए थे।
उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र प्रदान किया गया। बताया जाता है कि चार गढ़वाल राइफल्स को पीछे हटने के आदेश दिए थे, लेकिन राइफलमैन जसवंत सिंह अपनी जगह पर बने रहे। उन्होंने तीन दिन तक चीनी सैनिकों का बहादुरी से मुकाबला किया और जान दे दी। 72 आवर्स के निर्देशक और नायक उत्तराखंड मूल के अविनाश ध्यानी हैं।
उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र प्रदान किया गया। बताया जाता है कि चार गढ़वाल राइफल्स को पीछे हटने के आदेश दिए थे, लेकिन राइफलमैन जसवंत सिंह अपनी जगह पर बने रहे। उन्होंने तीन दिन तक चीनी सैनिकों का बहादुरी से मुकाबला किया और जान दे दी। 72 आवर्स के निर्देशक और नायक उत्तराखंड मूल के अविनाश ध्यानी हैं।