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प्रदेश को वनवासी राज्य घोषित किया जाए : किशोर
Updated Thu, 31 May 2018 01:59 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से बुधवार को नगर निगम सभागार में आयोजित परिचर्चा में तिलाड़ी आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद वन व प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय आबादी के अधिकारों के मुद्दे पर चर्चा की गई। परिचर्चा का आयोजन उत्तराखंड विमर्श, भुवनेश्वरी महिला आश्रम, पहाड़, बीज बचाओ आंदोलन, चिपको आंदोलन, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच, मानव अधिकार संरक्षण समिति, पिंडर घाटी शिक्षण समिति, थौलदार विकास समिति, चेतना आंदोलन, पर्वतीय लोक शिक्षण समिति, ग्रास संस्था आदि के सहयोग से किया गया।
परिचर्चा के दौरान पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने तिलाड़ी आंदोलन के शहीदों की याद में 30 मई को वनाधिकार दिवस के रूप में मनाने की बात कही। उन्होंने सरकार से प्रदेश को वनवासी राज्य घोषित करने और महिला उत्थान के लिए ग्रामीण इलाकों में रसोई गैस मुफ्त देने की मांग की। इसके अलावा आम आदमी को राहत पहुंचाने के लिए विशेष नीतियां बनाने पर जोर दिया। डॉ. एसपी सती ने कहा कि जंगलों में आग लगने की अधिकतर घटनाएं चीड़ की वजह से होती हैं। ऐसे में चीड़ के जंगलों को चरणबद्ध तरीके से खत्म कर स्थानीय वातावरण के अनुकूल दूसरे पेड़ पौधे लगाने चाहिए। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता राजीव लोचन शाह ने भी विचार रखे। परिचर्चा में कार्यक्रम की अध्यक्ष गीता गैरौला समेत बड़ी संख्या में पर्यावरणविद्, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी शामिल हुए। इस अवसर पर समन्वय फ्रेंड्स ऑफ हिमालय के प्रेम बहुखंडी, हिम्मत सिंह बिष्ट और मुकेश देवराड़ी मौजूद रहे। इस दौरान गोपाल शंकरन, सकल चंद रावत, एसएन सचान, समर भंडारी, सरोजनी कैंथुरा, समीर भंडारी, सरिता नेगी, प्रभावती गौड़, वीरेंद्र पैन्यूली, समीर रतूड़ी आदि मौजूद रहे।
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स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से बुधवार को नगर निगम सभागार में आयोजित परिचर्चा में तिलाड़ी आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद वन व प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय आबादी के अधिकारों के मुद्दे पर चर्चा की गई। परिचर्चा का आयोजन उत्तराखंड विमर्श, भुवनेश्वरी महिला आश्रम, पहाड़, बीज बचाओ आंदोलन, चिपको आंदोलन, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच, मानव अधिकार संरक्षण समिति, पिंडर घाटी शिक्षण समिति, थौलदार विकास समिति, चेतना आंदोलन, पर्वतीय लोक शिक्षण समिति, ग्रास संस्था आदि के सहयोग से किया गया।
परिचर्चा के दौरान पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने तिलाड़ी आंदोलन के शहीदों की याद में 30 मई को वनाधिकार दिवस के रूप में मनाने की बात कही। उन्होंने सरकार से प्रदेश को वनवासी राज्य घोषित करने और महिला उत्थान के लिए ग्रामीण इलाकों में रसोई गैस मुफ्त देने की मांग की। इसके अलावा आम आदमी को राहत पहुंचाने के लिए विशेष नीतियां बनाने पर जोर दिया। डॉ. एसपी सती ने कहा कि जंगलों में आग लगने की अधिकतर घटनाएं चीड़ की वजह से होती हैं। ऐसे में चीड़ के जंगलों को चरणबद्ध तरीके से खत्म कर स्थानीय वातावरण के अनुकूल दूसरे पेड़ पौधे लगाने चाहिए। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता राजीव लोचन शाह ने भी विचार रखे। परिचर्चा में कार्यक्रम की अध्यक्ष गीता गैरौला समेत बड़ी संख्या में पर्यावरणविद्, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी शामिल हुए। इस अवसर पर समन्वय फ्रेंड्स ऑफ हिमालय के प्रेम बहुखंडी, हिम्मत सिंह बिष्ट और मुकेश देवराड़ी मौजूद रहे। इस दौरान गोपाल शंकरन, सकल चंद रावत, एसएन सचान, समर भंडारी, सरोजनी कैंथुरा, समीर भंडारी, सरिता नेगी, प्रभावती गौड़, वीरेंद्र पैन्यूली, समीर रतूड़ी आदि मौजूद रहे।
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