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बरसात नजदीक, तटबंध अधूरे
Updated Fri, 16 Jun 2017 11:39 PM IST
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केदारनाथ में आपदा का नाम आते ही खादर क्षेत्र के लोगों की आज भी रूह कांप जाती है। चार साल पहले आज के ही दिन (16/17 जून 2013) केदारनाथ में बादल फटने से खादर क्षेत्रवासियों को बाढ़ की मार झेलनी पड़ी थी। इसमें अपार धन के साथ जन की हानि हुई थी। बावजूद इसके शासन-प्रशासन की ओर से बचाव के ठोस उपाए नहीं किए गए। क्षेत्र में तटबंधों का कार्य पूरा नहीं होने से एक बार फिर लोगों को बाढ़ का डर सताने लग गया है।
आपदा के दौरान खादर क्षेत्र में महीनों तक बाढ़ की स्थिति बनी रही। आलम यह था कि क्षेत्रवासियों को अपने-अपने घरों की छतों पर कई दिन तक रात काटनी पड़ी। जबकि मवेशियों और फसलों को होने वाली क्षति का आज तक सटीक अंदाजा नहीं लगाया जा सका। रायसी चौकी में काम करने वाला नंदपुर निवासी सुरेंद्र की बाढ़ की चपेट में आने से मौत हो गई थी। महाराजपुर, सौपरी, नंदपुर, शिवपुरी के ग्रामीण बताते हैं कि उस जैसी बाढ़ को आज तक खादरवासियों नहीं देखी। बावजूद चार साल बाद भी क्षेत्र के तटबंध अधूरे पड़े हैं।
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केदारनाथ में आपदा का नाम आते ही खादर क्षेत्र के लोगों की आज भी रूह कांप जाती है। चार साल पहले आज के ही दिन (16/17 जून 2013) केदारनाथ में बादल फटने से खादर क्षेत्रवासियों को बाढ़ की मार झेलनी पड़ी थी। इसमें अपार धन के साथ जन की हानि हुई थी। बावजूद इसके शासन-प्रशासन की ओर से बचाव के ठोस उपाए नहीं किए गए। क्षेत्र में तटबंधों का कार्य पूरा नहीं होने से एक बार फिर लोगों को बाढ़ का डर सताने लग गया है।
आपदा के दौरान खादर क्षेत्र में महीनों तक बाढ़ की स्थिति बनी रही। आलम यह था कि क्षेत्रवासियों को अपने-अपने घरों की छतों पर कई दिन तक रात काटनी पड़ी। जबकि मवेशियों और फसलों को होने वाली क्षति का आज तक सटीक अंदाजा नहीं लगाया जा सका। रायसी चौकी में काम करने वाला नंदपुर निवासी सुरेंद्र की बाढ़ की चपेट में आने से मौत हो गई थी। महाराजपुर, सौपरी, नंदपुर, शिवपुरी के ग्रामीण बताते हैं कि उस जैसी बाढ़ को आज तक खादरवासियों नहीं देखी। बावजूद चार साल बाद भी क्षेत्र के तटबंध अधूरे पड़े हैं।
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