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केदारनाथ आपदाः लापता हुए 575 बाल मजदूर

Tue, 19 Nov 2013 09:19 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 19 Nov 2013 09:19 AM IST
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575 child laborers were missing in the disaster

बाल मजदूरी अभिशाप है, उत्तराखंड में जून की आपदा ने इस हकीकत को बेपरदा कर दिया हैं। तमाम सरकारी दावों की कलई भी खोलकर रख दी।

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मासूमियत की पहचान मिटी
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की तफ्तीश में ऐसी ही कुछ तस्वीर उभर कर सामने आई है। आयोग की रिपोर्ट मानें तो तबाही के वक्त केदारनाथ में करीब 200 बाल मजदूर दो जून की रोटी के लिए अपनी मशक्कत से मासूमियत की पहचान मिटा रहे थे।

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राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष अजय सेतिया ने बताया कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक आपदा में 575 बच्चे लापता हुए थे। इनमें से 289 बच्चे ऐसे हैं जो कि दूसरे राज्यों के हैं। यानी वे बच्चे यहां यात्रा पर आए हुए थे। बाकी बचे 286 बच्चों में से जब आयोग ने इनके घरों की पड़ताल कराई तो पता चला कि 200 बच्चे बेहद निर्धन परिवार से हैं।
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आयोग के मुताबिक इन बच्चों की आर्थिक स्थिति से यह पता चला है कि वे केदारनाथ और अन्य जगहों पर बाल मजदूरी कर रहे थे। आयोग के मुताबिक बाल मजदूरों की यह तादाद श्रम विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते हैं है।

मां या बाप को खो चुके बच्चे

आपदा में यह बात भी सामने आई है कि 585 बच्चे ऐसे हैं जो कि प्राकृतिक आपदा में अपने मां या बाप में से किसी एक को खो चुके हैं। आयोग का कहना है कि इतना वक्त बीतने के बाद भी यह साफ नहीं है कि सरकार ने इन बच्चों के लिए क्या स्कीम बनाई है। आपदा में 13 बच्चे ऐसे भी हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है जबकि पुलिस विभाग के मुताबिक ऐसे केवल तीन बच्चे हैं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने की मुलाकात
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष कुशल सिंह ने सोमवार को राज्य बाल आयोग अध्यक्ष अजय सेतिया से मुलाकात की। अजय सेतिया ने उन्हें बच्चों के लिए चलने वाली योजनाओं में सरकारी लेटलतीफी की जानकारी दी। उन्होंने बाल सुधार गृहों की स्थिति में भी कोई सुधार न होने की जानकारी भी राष्ट्रीय अध्यक्ष को दी।

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