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आईएफएमएस से बिगड़ा वितीय प्रबंधन
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
उत्तरांचल फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन का कहना है कि बिना प्रशिक्षण के एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) लागू होने से वित्तीय प्रबंधन पटरी से उतर गया है। इससे कई विसंगतियां पैदा हो गई हैं। अधिकारियों को प्रशिक्षण न होने से अप्रैल का वेतन में भी देरी हो गई। साथ ही कई कटौतियां स्वत: हो गईं। एसोसिएशन ने इस सिस्टम को जल्द ठीक करने की मांग की है।
एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष सुनील दत्त कोठारी ने बताया कि आईएफएमएस प्रणाली को अप्रैल 2019 में लागू कर दिया गया था, लेकिन इससे पहले आहरण वितरण अधिकारियों को इसका न तो प्रयोग दिखाया गया और न ही प्रशिक्षित किया गया। ऐसे में मार्च का वेतन काफी देर से जारी किया जा सका। यही नहीं अब साफ्टवेयर में कमी के कारण कई भत्ते देय न होने के बाद भी अपडेट हो रहे हैं। कई कटौतियां अपने आप हो रही हैं। साथ ही सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों की ग्रेच्युटी, नगदीकरण, जीपीएफ आदि के निस्तारण की व्यवस्था इस साफ्टवेयर में नहीं है। कोठारी ने कहा कि एसोसिएशन ने मुख्य सचिव उत्तराखंड को पत्र भेजकर जल्द से जल्द खामियां दूर करने की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि यदि 15 दिनों के भीतर यह खामियां दूर नहीं होती हैं तो पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा।
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उत्तरांचल फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन का कहना है कि बिना प्रशिक्षण के एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) लागू होने से वित्तीय प्रबंधन पटरी से उतर गया है। इससे कई विसंगतियां पैदा हो गई हैं। अधिकारियों को प्रशिक्षण न होने से अप्रैल का वेतन में भी देरी हो गई। साथ ही कई कटौतियां स्वत: हो गईं। एसोसिएशन ने इस सिस्टम को जल्द ठीक करने की मांग की है।
एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष सुनील दत्त कोठारी ने बताया कि आईएफएमएस प्रणाली को अप्रैल 2019 में लागू कर दिया गया था, लेकिन इससे पहले आहरण वितरण अधिकारियों को इसका न तो प्रयोग दिखाया गया और न ही प्रशिक्षित किया गया। ऐसे में मार्च का वेतन काफी देर से जारी किया जा सका। यही नहीं अब साफ्टवेयर में कमी के कारण कई भत्ते देय न होने के बाद भी अपडेट हो रहे हैं। कई कटौतियां अपने आप हो रही हैं। साथ ही सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों की ग्रेच्युटी, नगदीकरण, जीपीएफ आदि के निस्तारण की व्यवस्था इस साफ्टवेयर में नहीं है। कोठारी ने कहा कि एसोसिएशन ने मुख्य सचिव उत्तराखंड को पत्र भेजकर जल्द से जल्द खामियां दूर करने की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि यदि 15 दिनों के भीतर यह खामियां दूर नहीं होती हैं तो पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा।
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