कोविडकाल के बीच 400 किलोवाट का सोलर प्लांट तैयार, अब पीएस रावत लिखेंगे आत्मनिर्भरता की इबारत
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कोविडकाल शुरू होने से पहले 200 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाने वाले विकासकर्ता आलोक पंवार दूसरे विकासकर्ताओं के लिए एक प्रेरणा बने हैं। अब उन्हीं की तरह टिहरी जिले के एक और विकासकर्ता पीएस रावत कोरोनाकाल की विकट चुनौतियों के बीच 400 किलोवाट का सोलर प्लांट तैयार करने जा रहे हैं।
बकौल रावत, पिछले सात महीने के लगातार परिश्रम के बाद अब प्लांट तकरीबन अंतिम रूप में है। वह 24 अक्तूबर तक प्लांट का शुभारंभ करने की सोच रहे हैं। वह भी चाहते हैं कि उनके संयंत्र का उद्घाटन भी मुख्यमंत्री के हाथों हो। मुख्यमंत्री ने हाल ही में विकासकर्ता आलोक पंवार के प्लांट का चिन्यालीसौड़ टिपरी में उद्घाटन किया था।
रावत ने 40 नाली भूमि पर जामणीखाल में यह प्लांट लगाया है। वह कहते हैं, मुख्यमंत्री सौर ऊर्जा स्वरोजगार योजना बहुत शानदार है। लेकिन, भूपरिवर्तन और बैंक लोन की प्रक्रिया इतनी कठिन है कि उन जैसे कई विकासकर्ताओं ने हिम्मत छोड़ दी है।
बहरहाल, सरकारी तंत्र की जटिल प्रक्रियाओं और कोरोनाकाल की दुश्वारियों से लड़ते हुए रावत अपने प्लांट के लिए सभी जरूरी इंतजाम कर चुके हैं। उनका सुझाव है कि सरकार को प्रशासन और राजस्व विभाग के अधिकारियों को ज्यादा सख्ती से निर्देश देने होंगे।
चिंता : मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में 143 का पेच
सौर ऊर्जा संयंत्र योजना के जरिये राज्य के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के मुख्यमंत्री के सपने में उत्तराखंड जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा 143 मुख्य अड़चन बन गई है। सरकार ने सोलर प्लांट लगाने के लिए कृषि भूमि को गैर कृषि भूमि में परिवर्तन न कराने की कानूनी छूट तो दी, लेेकिन यह छूट लीज की भूमि पर लागू नहीं है।
400 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाने की तैयारी कर रहे पीएस रावत ने भी 40 नाली में से कुछ भूमि लीज पर ली है और लेकिन सात महीने के बाद भी उसका भू परिवर्तन नहीं हो पाया है। टिहरी जिले के बेसौली तल्ली में 300 किलोवाट का प्लांट लगा रहे जगदीश पालीवाल भी भू उपयोग परिवर्तन में आधे-अधूरे प्रावधान से व्यथित हैं।
उनके लोन की फाइल रेसकोर्स स्थित एक प्रमुख बैंक की शाखा में कई दिन धूल फांकती रही और एक दिन गुम हो गई। फिर बात शुरू हुई तो लीज की भूमि के भू उपयोग परिवर्तन का पेच फंस गया। अब पालीवाल भी उसी बैंक का दरवाजा खटखटाने जा रहे हैं जहां से दूसरे विकासकर्ता पीएस रावत को लोन मिला।
सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने में परामर्श देने का काम करने वाले मनीष कठैत कहते हैं, ये कमाल की योजना है, जिसमें अगले 25 साल तक कैश फ्लो सुनिश्चित है। लेकिन सरकार अभी तक बैंकों में यह भरोसा ने जमा पाई है। कठैत के मुताबिक, पहाड़ में छोटी जोतें हैं। बड़े प्रोजेक्ट के लिए एक साथ बड़ा भूखंड शायद ही किसी के पास हो।
भू अध्यादेश कानून में संशोधन आधा-अधूरा रहा। कायदे से उसमें लीज की भूमि को भी शामिल करना चाहिए कि उस पर प्लांट लगेगा तो वह स्वत: अकृषि हो जाएगी। लेकिन, अभी विकासकर्ता को इस भूमि को अकृषि कराना पड़ रहा है। सिस्टम की अपनी चाल है, जबकि प्रोजेक्ट टाइम बाउंड हैं। इस कारण विकास कर्ताओं का उत्साह टूट रहा है।
लैंड यूज पर सीएम के हैं निर्देश
सौर ऊर्जा संयंत्र योजना की नोडल एजेंसी उरेडा के मुख्य परियोजना अधिकारी एके त्यागी के मुताबिक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोलर प्लांट योजना में भू उपयोग परिवर्तन को लेकर कड़े निर्देश हैं। जिलाधिकारियों के स्तर पर भी संबंधित एसडीएम को पत्र जारी हुए हैं। इससे भू उपयोग परिवर्तन के मामलों में तेजी भी आई है।
ये है असर
योजना के तहत सरकार ने 287 विकासकर्ताओं को 203 मेगावाट के प्रोजेक्ट निविदा के माध्यम से आवंटित किए। इसमें से अभी तक 20-25 मेगावाट पर भी काम शुरू हो पाया है। इसकी एक बड़ी वजह भू उपयोग परिवर्तन और बैंक लोन है।
मुख्यमंत्री सौर ऊर्जा स्वरोजगार योजना में विकासकर्ता को कृषि भूमि का भूउपयोग परिवर्तन नहीं कराना होगा। इस संबंध में सरकार ने बाकायदा नियमों में प्रावधान किया है। सभी जिलाधिकारियों को समय समय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं। यदि कहीं कोई ऐसी शिकायत है तो ऐसे मामले में पूछा जाएगा। योजना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमें खुशी है कि बड़ी संख्या में नौजवान इस योजना से जुड़ रहे हैं।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री