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महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण को हरी झंडी
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महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण को हरी झंडी
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पिटकुल की महत्वाकांक्षी परियोजना श्रीनगर-काशीपुर ट्रांसमिशन लाइन को नए सिरे से खींचने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एडीबी की ओर से परियोजना के लिए 1117 करोड़ की स्वीकृति दिए जाने के बाद पिटकुल प्रबंधन के स्तर पर टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। इस परियोजना के पूरा होने जहां गढ़वाल क्षेत्र की कई महत्वाकांक्षी जलविद्युत परियोजनाओं में बनने वाली 1200 मेगावाट बिजली को उत्तरी ग्रिड में भेजा जा सकेगा। साथ ही कुमाऊं मंडल में बिजली आपूर्ति को और बेहतर किया जा सकेगा।
पिटकुल प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल ने बताया कि साल 2014 मेें इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दिए जाने के बाद एडीबी की ओर से 530 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया था। ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण के लिए टेंडर भी कर दिया गया था, जिसमें स्पेन की कोबरा कंपनी को ठेका भी देकर पिटकुल की ओर से 53 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान भी कर दिया गया था, लेकिन बाद में कुछ अड़चन आ गई जिसकी वजह से कंपनी ने काम से हाथ पीछे खींच लिए और परियोजना अधर में लटक गई। एडीबी ने बजट देने से ही इंकार कर दिया। आखिरकार ऊर्जा सचिव के साथ एडीबी व केंद्र सरकार के अफसरों के बीच हुई कई दौर की वार्ता के बाद एडीबी नए सिरे से बजट देने पर सहमत हो गया। प्रबंध निदेशक सिंघल के मुताबिक इस परियोजना की निर्माण लागत 1117 करोड़ को देने के लिए एडीबी राजी हो गया है
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परियोजना में 41 किमी अतिरिक्त लाइन खींचनी होगी
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जिम कार्बेट के ऊपर से लाइन ले जाने की मंजूरी नहीं मिलने से परियोजना में अब 40 किमी अतिरिक्त लाइन खींचनी पड़ेगी। पिटकुल अफसरों के मुताबिक अब 150 किमी की जगह 191 किमी पावरग्रिड लाइन खींची जाएगी।
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कोबरा कंपनी ने कोर्ट दायर किया वाद
कोबरा कंपनी के साथ विवाद की वजह से निर्माण कार्य अधर में लटक जाने की वजह से प्रकरण अब अदालत में भी पहुंच गया। कोबरा कंपनी की ओर से अदालत में वाद दायर किया गया, जो विचाराधीन है।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पिटकुल की महत्वाकांक्षी परियोजना श्रीनगर-काशीपुर ट्रांसमिशन लाइन को नए सिरे से खींचने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एडीबी की ओर से परियोजना के लिए 1117 करोड़ की स्वीकृति दिए जाने के बाद पिटकुल प्रबंधन के स्तर पर टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। इस परियोजना के पूरा होने जहां गढ़वाल क्षेत्र की कई महत्वाकांक्षी जलविद्युत परियोजनाओं में बनने वाली 1200 मेगावाट बिजली को उत्तरी ग्रिड में भेजा जा सकेगा। साथ ही कुमाऊं मंडल में बिजली आपूर्ति को और बेहतर किया जा सकेगा।
पिटकुल प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल ने बताया कि साल 2014 मेें इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दिए जाने के बाद एडीबी की ओर से 530 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया था। ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण के लिए टेंडर भी कर दिया गया था, जिसमें स्पेन की कोबरा कंपनी को ठेका भी देकर पिटकुल की ओर से 53 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान भी कर दिया गया था, लेकिन बाद में कुछ अड़चन आ गई जिसकी वजह से कंपनी ने काम से हाथ पीछे खींच लिए और परियोजना अधर में लटक गई। एडीबी ने बजट देने से ही इंकार कर दिया। आखिरकार ऊर्जा सचिव के साथ एडीबी व केंद्र सरकार के अफसरों के बीच हुई कई दौर की वार्ता के बाद एडीबी नए सिरे से बजट देने पर सहमत हो गया। प्रबंध निदेशक सिंघल के मुताबिक इस परियोजना की निर्माण लागत 1117 करोड़ को देने के लिए एडीबी राजी हो गया है
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परियोजना में 41 किमी अतिरिक्त लाइन खींचनी होगी
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जिम कार्बेट के ऊपर से लाइन ले जाने की मंजूरी नहीं मिलने से परियोजना में अब 40 किमी अतिरिक्त लाइन खींचनी पड़ेगी। पिटकुल अफसरों के मुताबिक अब 150 किमी की जगह 191 किमी पावरग्रिड लाइन खींची जाएगी।
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कोबरा कंपनी ने कोर्ट दायर किया वाद
कोबरा कंपनी के साथ विवाद की वजह से निर्माण कार्य अधर में लटक जाने की वजह से प्रकरण अब अदालत में भी पहुंच गया। कोबरा कंपनी की ओर से अदालत में वाद दायर किया गया, जो विचाराधीन है।