{"_id":"5ba409ff867a557f721c24a1","slug":"21537477119-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सैनिकों का मनोबल बढ़ाने में परिजनों की भूमिका अहम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सैनिकों का मनोबल बढ़ाने में परिजनों की भूमिका अहम
Updated Fri, 21 Sep 2018 02:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सैनिकों का मनोबल बढ़ाने में परिजनों की भूमिका अहम
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
देहरादून। तुनवाला, हरियावाला इनक्लेव में पीबीओआर पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन के महिला प्रकोष्ठ की सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान सैनिकों का मनोबल बढ़ाने में परिजनों की भूमिका और पूर्व सैनिकों का आश्रितों के हक व अधिकारों पर चर्चा की गई।
सभा की अध्यक्ष पीबीओआर पूर्व सैनिक महिला प्रकोष्ठ की डोईवाला प्रभारी रक्षा बोड़ोई ने कहा कि जब सैनिक सरहदों में तैनात होते हैं तो उनका मनोबल बढ़ाने के लिए परिजनों (पत्नी, बहन, माता पिता) की महत्वपूर्ण भूमिका के साथ विशेष योगदान भी होता है। यही कारण है कि सैनिक तनाव मुक्त होकर सरहद की सुरक्षा में तैनात रहता है। जिस प्रकार सरहद की जिम्मेदारी सैनिक पर है। उसी प्रकार घर का दायित्व पत्नियों और अन्य परिजनों पर है। मौजूदा समय में सरहद की आतंकी गतिविधियों के सैनिकों के घरों में भी काफी तनाव रहता है। ऐसे में सरकार को सैनिक परिवारों के लिए सरकारी नौकरी आदि सुविधाओं का विशेष प्रावधान तत्काल करना चाहिए। इसके तहत सेना से जुड़े संबंधित विभाग जैसे सोल्जर बोर्ड, ईसीएचएस, सीएसडी कैंटीन आदि संस्थानों में विशेष ध्यान देना चाहिए। इस दौरान रक्षा बोड़ोई ने पूर्व सैनिकों के आश्रित महिलाओं को उनके हक, अधिकारों की जानकारी दी। सभा में केंद्रीय कार्यकारणी के सदस्य विनोद बलूनी, पुष्पा भारद्वाज, दीपा गुसाईं ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर में अनिता नेगी, सुनीता बिष्ट, देवेश्वरी चौधरी, सूरजी रावत, मंजू बिष्ट, संगीता पुरोहित, उर्मिला रावत, गणेशी नेगी, दुर्गा देवी आदि उपस्थित रहीं।
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
देहरादून। तुनवाला, हरियावाला इनक्लेव में पीबीओआर पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन के महिला प्रकोष्ठ की सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान सैनिकों का मनोबल बढ़ाने में परिजनों की भूमिका और पूर्व सैनिकों का आश्रितों के हक व अधिकारों पर चर्चा की गई।
सभा की अध्यक्ष पीबीओआर पूर्व सैनिक महिला प्रकोष्ठ की डोईवाला प्रभारी रक्षा बोड़ोई ने कहा कि जब सैनिक सरहदों में तैनात होते हैं तो उनका मनोबल बढ़ाने के लिए परिजनों (पत्नी, बहन, माता पिता) की महत्वपूर्ण भूमिका के साथ विशेष योगदान भी होता है। यही कारण है कि सैनिक तनाव मुक्त होकर सरहद की सुरक्षा में तैनात रहता है। जिस प्रकार सरहद की जिम्मेदारी सैनिक पर है। उसी प्रकार घर का दायित्व पत्नियों और अन्य परिजनों पर है। मौजूदा समय में सरहद की आतंकी गतिविधियों के सैनिकों के घरों में भी काफी तनाव रहता है। ऐसे में सरकार को सैनिक परिवारों के लिए सरकारी नौकरी आदि सुविधाओं का विशेष प्रावधान तत्काल करना चाहिए। इसके तहत सेना से जुड़े संबंधित विभाग जैसे सोल्जर बोर्ड, ईसीएचएस, सीएसडी कैंटीन आदि संस्थानों में विशेष ध्यान देना चाहिए। इस दौरान रक्षा बोड़ोई ने पूर्व सैनिकों के आश्रित महिलाओं को उनके हक, अधिकारों की जानकारी दी। सभा में केंद्रीय कार्यकारणी के सदस्य विनोद बलूनी, पुष्पा भारद्वाज, दीपा गुसाईं ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर में अनिता नेगी, सुनीता बिष्ट, देवेश्वरी चौधरी, सूरजी रावत, मंजू बिष्ट, संगीता पुरोहित, उर्मिला रावत, गणेशी नेगी, दुर्गा देवी आदि उपस्थित रहीं।
विज्ञापन