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सीएम की घोषणा के बाद भी बिजली नहीं
Updated Sun, 25 Jun 2017 10:31 PM IST
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सीएम की घोषणा के बाद भी बिजली नहीं
नौगांव (उत्तरकाशी)। ब्लॉक में पिफियारा गांव के दड़का तोक में मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी बिजली नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में यहां रह रहे 20 परिवारों को अंधेरे में ही रात गुजारनी पड़ रही है।
बता दें कि वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कंडारी गांव में एक कार्यक्रम के दौरान पिफियारा गांव के दड़का तोक में विद्युत लाइन बिछाने के लिए दस पोल की घोषणा की थी, जिससे वहां निवास कर रहे ग्रामीणों तक बिजली पहुंचाई जानी थी। मुख्यमंत्री की घोषणा से लोगों में बिजली आने की उम्मीद जगी थी, लेकिन ग्रामीणों का यह सपना आज तक पूरा नहीं हो पाया है। आज भी यहां ग्रामीणों को लैंप के सहारे रात गुजारनी पड़ती है। दड़का तोक में निवास कर रहे परिवारों के करीब एक दर्जन से भी ज्यादा बच्चे दो किमी दूर बर्नीगाड़ में स्कूल पढ़ने जाते हैं। बिजली नहीं होने के कारण बच्चों को मोमबत्ती और छिल्लों के सहारे पढ़ाई करनी पड़ रही है। प्रधान केंदा देवी, वन पंचायत सरपंच चैन सिंह रावत, राम सिंह, जयवीर सिंह, नारायण सिंह का कहना है कि यहां से कुछ ही दूर पर बिजली की लाइन गुजर रही है। दस बारह पोल लगने पर दड़का तोक तक बिजली लाइन पहुंच सकती है। लेकिन ऊर्जा निगम कुछ करने को तैयार नहीं है।
यूपीसीएल के अधिशासी अभियंता गौरव सकलानी का कहना है कि दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतिकरण योजना के तहत ही ऐसे तोकों तक बिजली पहुंचाई जाती है। यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। शीघ्र ही मामले को दिखवाकर बिजली पहुंचाने की कार्रवाई की जाएगी।
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नौगांव (उत्तरकाशी)। ब्लॉक में पिफियारा गांव के दड़का तोक में मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी बिजली नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में यहां रह रहे 20 परिवारों को अंधेरे में ही रात गुजारनी पड़ रही है।
बता दें कि वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कंडारी गांव में एक कार्यक्रम के दौरान पिफियारा गांव के दड़का तोक में विद्युत लाइन बिछाने के लिए दस पोल की घोषणा की थी, जिससे वहां निवास कर रहे ग्रामीणों तक बिजली पहुंचाई जानी थी। मुख्यमंत्री की घोषणा से लोगों में बिजली आने की उम्मीद जगी थी, लेकिन ग्रामीणों का यह सपना आज तक पूरा नहीं हो पाया है। आज भी यहां ग्रामीणों को लैंप के सहारे रात गुजारनी पड़ती है। दड़का तोक में निवास कर रहे परिवारों के करीब एक दर्जन से भी ज्यादा बच्चे दो किमी दूर बर्नीगाड़ में स्कूल पढ़ने जाते हैं। बिजली नहीं होने के कारण बच्चों को मोमबत्ती और छिल्लों के सहारे पढ़ाई करनी पड़ रही है। प्रधान केंदा देवी, वन पंचायत सरपंच चैन सिंह रावत, राम सिंह, जयवीर सिंह, नारायण सिंह का कहना है कि यहां से कुछ ही दूर पर बिजली की लाइन गुजर रही है। दस बारह पोल लगने पर दड़का तोक तक बिजली लाइन पहुंच सकती है। लेकिन ऊर्जा निगम कुछ करने को तैयार नहीं है।
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यूपीसीएल के अधिशासी अभियंता गौरव सकलानी का कहना है कि दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतिकरण योजना के तहत ही ऐसे तोकों तक बिजली पहुंचाई जाती है। यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। शीघ्र ही मामले को दिखवाकर बिजली पहुंचाने की कार्रवाई की जाएगी।
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