{"_id":"5b6865c24f1c1bf6548b70f5","slug":"191533568450-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फोटो-प्रदेश के लिए-टॉपर्स कानक्लेव पैकेज- विज्ञान प्रौद्योगिकी का श्रेष्ठ उपयोग मानवता की भलाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फोटो-प्रदेश के लिए-टॉपर्स कानक्लेव पैकेज- विज्ञान प्रौद्योगिकी का श्रेष्ठ उपयोग मानवता की भलाई
Updated Mon, 06 Aug 2018 08:44 PM IST
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फोटा समेत यूथ के लिए : टॉपर्स कॉन्क्लेव
‘विज्ञान प्रौद्योगिकी का श्रेष्ठ उपयोग मानवता की भलाई’
राजभवन में शुरू हुआ टॉपर्स कॉन्क्लेव, इसरो के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एएस किरन कुमार हुए होनहारों से रूबरू
राज्यपाल और इसरो के पूर्व अध्यक्ष ने किया शुभारंभ, विद्यालयी शिक्षा मंत्री, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री भी पहुंचे
राज्यपाल डॉ. पाल ने छात्र-छात्राओं को स्मार्ट कैंपस के साथ स्मार्ट विलेज का ध्वजवाहक बनने की दी प्रेरणा
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का श्रेष्ठ उपयोग मानवता की भलाई करना है। राजभवन में शुरू हुए टॉपर्स कॉन्क्लेव के पहले दिन यह बात इसरो के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एएस किरन कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि जितनी तेजी से दुनिया में तकनीकी बदलाव आ रहे हैं, उस हिसाब से हमारे युवाओं को भी तैयार होना होगा। निश्चित तौर पर आने वाले समय में इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे। टॉपर्स कॉन्क्लेव में प्रदेशभर के राज्य विश्वविद्यालयों के दो-दो टॉपर्स शिरकत कर रहे हैं।
सोमवार को राजभवन में पांच दिवसीय टॉपर्स कॉन्क्लेव का शुभारंभ राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल और इसरो के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एएस किरन कुमार ने किया। उनके साथ उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय भी थे। इस मौके पर राज्यपाल डॉ. केके पाल ने कहा कि टॉपर्स कॉन्क्लेव का मकसद एकेडमिक एक्सीलेंस का वातावरण विकसित करना है। कॉन्क्लेव की कार्यवाही और व्याख्यानों को एक किताब के रूप में प्रकाशित कर सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को भेजा जाएगा। उन्होंने छात्र-छात्राओं को स्मार्ट कैंपस के साथ ही स्मार्ट विलेज का ध्वजवाहक बनने की प्रेरणा दी। कॉन्क्लेव में प्रो. एएस किरन कुमार ने ‘राष्ट्र निर्माण में वैज्ञानिक एवं तकनीकी शोध की भूमिका’ विषय पर कहा कि हमें असफ लताओं से सीख लेते रहना चाहिए।
उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अभियान के शुरुआती दिनों की चुनौतियों के बारे में बताते हुए कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान में चंद्रयान, मंगलयान और सेटेलाइट लांच विकिल्स ने भारत की प्रतिष्ठा पूरी दुनिया में बढ़ाई है। उन्होंने लर्निंग, अनलर्निंग और रि-लर्निंग के बारे में बताया। कॉन्क्लेव में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने छात्रों को चुनौतियों और संघर्षों के सामने हार न मानने की सीख दी। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों में शैक्षिक कैलेंडर लागू कर दिया गया है। कॉलेजों में 93 प्रतिशत फैकल्टी नियुक्त हैं। जल्द ही हरिद्वार में देश का पहला ज्ञान कुंभ आयोजित किया जाएगा। दूसरे सत्र में दून विवि के कुलपति प्रो. सीएस नौटियाल ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के समय भारत, जापान और चीन आर्थिक रूप से लगभग समान थे। आज इनमें बड़ा गैप है।
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उन्होंने कहा कि हमें भी स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बहुत कुछ करना है। पलायन की समस्या से पूरी दुनिया जूझ रही है। उत्तराखंड में हम हर्बल प्रोडक्शन को बढ़ावा देकर राज्य और देश के विकास के लिए काम कर सकते हैं। अंतिम सत्र में मुक्त विवि की छात्रा आरती ने कहा कि आज के युग में तकनीकी आविष्कार बेहद जरूरी हैं। डिजिटल इंडिया को सपोर्ट किया जाना चाहिए। प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में संचार की सुविधाएं उपलब्ध हों। पंतनगर विवि के छात्र ने कहा कि भारत में आधुनिक तकनीक बहुत ही सस्ती कीमत पर उपलब्ध हो जाती है। हमारे अंतरिक्ष मिशन हॉलीवुड की फि ल्मों से भी कम कीमत पर सफ ल हुए हैं। इस मौके पर आवासीय विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी, यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल, राज्यपाल के सचिव रविनाथ रमन सहित बड़ी संख्या में छात्र और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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ये टॉपर्स कर रहे हैं शिरकत
संजीव कुमार साहू और सुदर्शन मिश्रा, पंतनगर विश्वविद्यालय
डॉ. बी बसु मैत्री और डॉ. पूजा अग्रवाल, एचएनबी मेडिकल विश्वविद्यालय
उत्तम प्रसाद सेमवाल और आरती, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय
डॉ. तृप्ति जोशी और डॉ. पारुल रानी, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय
नितिन आर्य और अभिषेक आर्य, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय
इमलियांगर जमीर और अवंतिका देवरानी, उत्तराखंड औद्यानिकी विश्वविद्यालय
अदिति बिष्ट और क्षिति, दून विश्वविद्यालय
दीपा और ललिता तिवारी, उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय
श्रेया वशिष्ठ और सचिन शर्मा, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय
प्रदीप कुमार और पूजा, कुमाऊं विश्वविद्यालय
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अभी इनके होंगे व्याख्यान
भारत की समृद्धि के लिए तकनीकी नवाचार विषय पर दून विवि के कुलपति प्रो. सीएस नौटियाल, साइबर रिजीम और इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर प्रो. दुर्गेश पंत, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स पर डॉ. राजेंद्र डोभाल, गंगा पुनर्जीवन के लिए कार्ययोजना में एफआरआई की निदेशक डॉ. सविता, व्यावसायिक सफलता के सूत्र पर कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीके नौरियाल, इकोलॉजी और इकोनॉमी पर हेस्को के संस्थापक डॉ. अनिल जोशी, उत्तराखंड में स्वरोजगार के अवसर एवं चुनौतियों पर श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डॉ. यूएस रावत, उत्तराखंड में कला, संस्कृति एवं विरासत पर लोकेश ओहरी और लाइटर साइड ऑफ ग्रेविटी पर प्रो. जेवी नारलेकर का व्याख्यान होगा।
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‘विज्ञान प्रौद्योगिकी का श्रेष्ठ उपयोग मानवता की भलाई’
राजभवन में शुरू हुआ टॉपर्स कॉन्क्लेव, इसरो के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एएस किरन कुमार हुए होनहारों से रूबरू
राज्यपाल और इसरो के पूर्व अध्यक्ष ने किया शुभारंभ, विद्यालयी शिक्षा मंत्री, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री भी पहुंचे
राज्यपाल डॉ. पाल ने छात्र-छात्राओं को स्मार्ट कैंपस के साथ स्मार्ट विलेज का ध्वजवाहक बनने की दी प्रेरणा
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का श्रेष्ठ उपयोग मानवता की भलाई करना है। राजभवन में शुरू हुए टॉपर्स कॉन्क्लेव के पहले दिन यह बात इसरो के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एएस किरन कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि जितनी तेजी से दुनिया में तकनीकी बदलाव आ रहे हैं, उस हिसाब से हमारे युवाओं को भी तैयार होना होगा। निश्चित तौर पर आने वाले समय में इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे। टॉपर्स कॉन्क्लेव में प्रदेशभर के राज्य विश्वविद्यालयों के दो-दो टॉपर्स शिरकत कर रहे हैं।
सोमवार को राजभवन में पांच दिवसीय टॉपर्स कॉन्क्लेव का शुभारंभ राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल और इसरो के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एएस किरन कुमार ने किया। उनके साथ उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय भी थे। इस मौके पर राज्यपाल डॉ. केके पाल ने कहा कि टॉपर्स कॉन्क्लेव का मकसद एकेडमिक एक्सीलेंस का वातावरण विकसित करना है। कॉन्क्लेव की कार्यवाही और व्याख्यानों को एक किताब के रूप में प्रकाशित कर सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को भेजा जाएगा। उन्होंने छात्र-छात्राओं को स्मार्ट कैंपस के साथ ही स्मार्ट विलेज का ध्वजवाहक बनने की प्रेरणा दी। कॉन्क्लेव में प्रो. एएस किरन कुमार ने ‘राष्ट्र निर्माण में वैज्ञानिक एवं तकनीकी शोध की भूमिका’ विषय पर कहा कि हमें असफ लताओं से सीख लेते रहना चाहिए।
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उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अभियान के शुरुआती दिनों की चुनौतियों के बारे में बताते हुए कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान में चंद्रयान, मंगलयान और सेटेलाइट लांच विकिल्स ने भारत की प्रतिष्ठा पूरी दुनिया में बढ़ाई है। उन्होंने लर्निंग, अनलर्निंग और रि-लर्निंग के बारे में बताया। कॉन्क्लेव में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने छात्रों को चुनौतियों और संघर्षों के सामने हार न मानने की सीख दी। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों में शैक्षिक कैलेंडर लागू कर दिया गया है। कॉलेजों में 93 प्रतिशत फैकल्टी नियुक्त हैं। जल्द ही हरिद्वार में देश का पहला ज्ञान कुंभ आयोजित किया जाएगा। दूसरे सत्र में दून विवि के कुलपति प्रो. सीएस नौटियाल ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के समय भारत, जापान और चीन आर्थिक रूप से लगभग समान थे। आज इनमें बड़ा गैप है।
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उन्होंने कहा कि हमें भी स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बहुत कुछ करना है। पलायन की समस्या से पूरी दुनिया जूझ रही है। उत्तराखंड में हम हर्बल प्रोडक्शन को बढ़ावा देकर राज्य और देश के विकास के लिए काम कर सकते हैं। अंतिम सत्र में मुक्त विवि की छात्रा आरती ने कहा कि आज के युग में तकनीकी आविष्कार बेहद जरूरी हैं। डिजिटल इंडिया को सपोर्ट किया जाना चाहिए। प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में संचार की सुविधाएं उपलब्ध हों। पंतनगर विवि के छात्र ने कहा कि भारत में आधुनिक तकनीक बहुत ही सस्ती कीमत पर उपलब्ध हो जाती है। हमारे अंतरिक्ष मिशन हॉलीवुड की फि ल्मों से भी कम कीमत पर सफ ल हुए हैं। इस मौके पर आवासीय विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी, यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल, राज्यपाल के सचिव रविनाथ रमन सहित बड़ी संख्या में छात्र और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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ये टॉपर्स कर रहे हैं शिरकत
संजीव कुमार साहू और सुदर्शन मिश्रा, पंतनगर विश्वविद्यालय
डॉ. बी बसु मैत्री और डॉ. पूजा अग्रवाल, एचएनबी मेडिकल विश्वविद्यालय
उत्तम प्रसाद सेमवाल और आरती, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय
डॉ. तृप्ति जोशी और डॉ. पारुल रानी, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय
नितिन आर्य और अभिषेक आर्य, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय
इमलियांगर जमीर और अवंतिका देवरानी, उत्तराखंड औद्यानिकी विश्वविद्यालय
अदिति बिष्ट और क्षिति, दून विश्वविद्यालय
दीपा और ललिता तिवारी, उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय
श्रेया वशिष्ठ और सचिन शर्मा, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय
प्रदीप कुमार और पूजा, कुमाऊं विश्वविद्यालय
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अभी इनके होंगे व्याख्यान
भारत की समृद्धि के लिए तकनीकी नवाचार विषय पर दून विवि के कुलपति प्रो. सीएस नौटियाल, साइबर रिजीम और इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर प्रो. दुर्गेश पंत, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स पर डॉ. राजेंद्र डोभाल, गंगा पुनर्जीवन के लिए कार्ययोजना में एफआरआई की निदेशक डॉ. सविता, व्यावसायिक सफलता के सूत्र पर कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीके नौरियाल, इकोलॉजी और इकोनॉमी पर हेस्को के संस्थापक डॉ. अनिल जोशी, उत्तराखंड में स्वरोजगार के अवसर एवं चुनौतियों पर श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डॉ. यूएस रावत, उत्तराखंड में कला, संस्कृति एवं विरासत पर लोकेश ओहरी और लाइटर साइड ऑफ ग्रेविटी पर प्रो. जेवी नारलेकर का व्याख्यान होगा।