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पति, जेठ और ससुर को दहेज हत्या में सात साल सजा
Updated Sat, 19 May 2018 02:40 AM IST
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पति, जेठ और ससुर को दहेज हत्या में सात साल सजा
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
नौ साल पहले हुई दहेज हत्या के मामले में शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश एनएस धनिक की कोर्ट ने दोषियों को सात साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पांच हजार का अर्थदंड भी लगाया है। दोषियों में मृतका के पति, जेठ और ससुर शामिल हैं।
शासकीय अधिवक्ता बलवंत राय अग्रवाल ने बताया कि राजपुर क्षेत्र के राजू थापा की बेटी लता की शादी राजपुर के ही गांव कैरवान निवासी हेमंत से हुई थी। 17 अक्टूबर 2009 को लता के ससुराल वालों ने राजू को बताया कि उसकी तबीयत खराब है। सूचना पर जब वह लता के ससुराल पहुंचा तो देखा कि उसकी मृत्यु हो चुकी थी। उसे बताया गया था कि लता ने फांसी लगाई है। इसके बाद राजू थापा ने लता के पति हेमंत, ससुर जीत बहादुर व जेठ खुम बहादुर पर आरोप लगाया कि वे लता से दहेज की मांग करते हुए मारपीट करते थे। इसके बाद जब उसने दहेज लाने से मना किया तो आरोपियों ने उसकी हत्या कर दी। इस शिकायत पर राजपुर थाना में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। करीब 30 दिन बाद मामले में आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया। मामले के नौ साल बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें दहेज हत्या के दोष में सात साल की सजा सुनाई। जबकि दहेज के लिए प्रताड़ित करने पर उन्हें तीन साल की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसके साथ ही कोर्ट ने पांच हजार का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर उन्हें छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
नौ साल पहले हुई दहेज हत्या के मामले में शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश एनएस धनिक की कोर्ट ने दोषियों को सात साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पांच हजार का अर्थदंड भी लगाया है। दोषियों में मृतका के पति, जेठ और ससुर शामिल हैं।
शासकीय अधिवक्ता बलवंत राय अग्रवाल ने बताया कि राजपुर क्षेत्र के राजू थापा की बेटी लता की शादी राजपुर के ही गांव कैरवान निवासी हेमंत से हुई थी। 17 अक्टूबर 2009 को लता के ससुराल वालों ने राजू को बताया कि उसकी तबीयत खराब है। सूचना पर जब वह लता के ससुराल पहुंचा तो देखा कि उसकी मृत्यु हो चुकी थी। उसे बताया गया था कि लता ने फांसी लगाई है। इसके बाद राजू थापा ने लता के पति हेमंत, ससुर जीत बहादुर व जेठ खुम बहादुर पर आरोप लगाया कि वे लता से दहेज की मांग करते हुए मारपीट करते थे। इसके बाद जब उसने दहेज लाने से मना किया तो आरोपियों ने उसकी हत्या कर दी। इस शिकायत पर राजपुर थाना में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। करीब 30 दिन बाद मामले में आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया। मामले के नौ साल बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें दहेज हत्या के दोष में सात साल की सजा सुनाई। जबकि दहेज के लिए प्रताड़ित करने पर उन्हें तीन साल की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसके साथ ही कोर्ट ने पांच हजार का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर उन्हें छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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