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चार साल में भी नहीं बन सकी श्रीनगर-काशीपुर पावर ग्रिड लाइन
Updated Mon, 14 May 2018 02:00 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
वर्ष 2013 में श्रीनगर से काशीपुर तक हाईटेंशन पावर ग्रिड लाइन बिछाने का काम 530 करोड़ का बजट जारी होने के बावजूद अभी तक नहीं शुरू हो सका है। 190 किलोमीटर की इस महत्वाकांक्षी योजना से जहां राज्य में बिजली आपूर्ति को मजबूत किया जा सकता है। वहीं यूपीपीसीएल को भी सहूलियत होगी। बहरहाल पावर ग्रिड पर काम शुरू नहीं होने से नाराज प्रबंध निदेशक ने छह सदस्यीय टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं।
पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) की ओर से श्रीनगर स्थित 400 केवी के पावर हाउस से काशीपुर पावर हाउस तक हाईटेंशन लाइन बिछाने का काम करना था। लाइन बिछाने का काम वर्ष 2013 में कोबरा इंस्टालेशिया नामक कंपनी को सौंपा गया और 530 करोड़ का बजट भी जारी किया गया, लेकिन काम आजतक शुरू नहीं हो पाया है। पिटकुल के आला अफसरों ने पांच साल तक न तो नया टेंडर जारी किया और न ही निर्माण कार्यों की कोई सुध ली। वहीं अब प्रबंध निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी ने निदेशक वित्त अमिताभ मोइत्रा, निदेशक परिचालन संजय मित्तल की अगुवाई में छह सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि इसके पहले सचिव ऊर्जा ने भी जांच के आदेश जारी कर संबंधित लापरवाह अफसरों को चिह्नित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। प्रबंध निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी का कहना है कि जांच कमेटी कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद प्रकरण में दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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वर्ष 2013 में श्रीनगर से काशीपुर तक हाईटेंशन पावर ग्रिड लाइन बिछाने का काम 530 करोड़ का बजट जारी होने के बावजूद अभी तक नहीं शुरू हो सका है। 190 किलोमीटर की इस महत्वाकांक्षी योजना से जहां राज्य में बिजली आपूर्ति को मजबूत किया जा सकता है। वहीं यूपीपीसीएल को भी सहूलियत होगी। बहरहाल पावर ग्रिड पर काम शुरू नहीं होने से नाराज प्रबंध निदेशक ने छह सदस्यीय टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं।
पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) की ओर से श्रीनगर स्थित 400 केवी के पावर हाउस से काशीपुर पावर हाउस तक हाईटेंशन लाइन बिछाने का काम करना था। लाइन बिछाने का काम वर्ष 2013 में कोबरा इंस्टालेशिया नामक कंपनी को सौंपा गया और 530 करोड़ का बजट भी जारी किया गया, लेकिन काम आजतक शुरू नहीं हो पाया है। पिटकुल के आला अफसरों ने पांच साल तक न तो नया टेंडर जारी किया और न ही निर्माण कार्यों की कोई सुध ली। वहीं अब प्रबंध निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी ने निदेशक वित्त अमिताभ मोइत्रा, निदेशक परिचालन संजय मित्तल की अगुवाई में छह सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि इसके पहले सचिव ऊर्जा ने भी जांच के आदेश जारी कर संबंधित लापरवाह अफसरों को चिह्नित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। प्रबंध निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी का कहना है कि जांच कमेटी कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद प्रकरण में दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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