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कहीं 13 तो कहीं 14 को होगा महाशिवरात्रि व्रत
Updated Wed, 07 Feb 2018 02:04 AM IST
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कहीं 13 तो कहीं 14 को होगा महाशिवरात्रि व्रत
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
शास्त्र एवं पुराणों के अनुसार निशीथ व्यापिनी फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का व्रत किया जाता है। इस बार चतुर्दशी तिथि दो दिन होने की वजह से लोग असमंजस में हैं कि व्रत किस दिया किया जाए। कुछ मंदिरों में यह व्रत 14 फरवरी को भी किया जा रहा है। हालांकि ज्योतिषयों के अनुसार 13 फरवरी को व्रत करना शास्त्र सम्मत रहेगा।
धर्म सिंधु के अनुसार चतुर्दशी तिथि दूसरे दिन निशीथ काल में आंशिक रूप से व्याप्त हो और पहले दिन संपूर्ण भाग को व्याप्त करे तो महाशिवरात्रि का व्रत पहले दिन करना चाहिए। आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार इस वर्ष फाल्गुन चतुर्दशी तिथि 13 फरवरी को पूर्ण रूप से निशीथ व्यापिनी है, जबकि 14 फरवरी को रात 12.13 मिनट से 12.48 मिनट तक निशीथकाल में आंशिक व्याप्त है। ऐसे में यह व्रत 13 फरवरी को करना चाहिए।
डा. आचार्य सुशांत राज के अनुसार चतुर्दशी तिथि 13 फरवरी को रात्रि 10.34 मिनट पर आरंभ होगी और 14 फरवरी को रात्रि 12.46 मिनट पर समाप्त होगी। ज्योतिष पीपीएस राणा के अनुसार ईशान संहिता में वर्णित है कि जिस तिथि में अर्ध रात्रि व्यापिनी चतुर्दशी तिथि हो, उस तिथि में व्रत रखें। शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि इस दिन शिव का विवाह पार्वती जी के साथ हुआ था। इस वर्ष शिवरात्रि मंगलवार के दिन पड़ रही है। हनुमान जी शिव के रुद्रावतार हैं।
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ये रहेगा निशीथ काल का समय
ज्योतिषाचार्य गौरव आर्य के अनुसार दून में 13 फरवरी को निशीथकाल 12.04 मिनट से 12.56 मिनट तक रहेगा। अत: 13 फरवरी को निशीथकाल में चतुर्दशी रहेगी। 14 फरवरी को निशीथकाल से पहले चतुर्दशी तिथि समाप्त हो जाएगी।
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शिवार्चन करें, पूरी होगी मनोकामना
आचार्य संतोष खंडूरी के अनुसार जिनकी कुंडली में पितृदोष, चांडाल, विष योग, शासकीय प्रताड़ना आदि हों, वे इस दिन शिर्वाचन करेंगे तो शिव उपासक की मनोकामना पूर्ण होगी। शिवरात्रि में साधना एवं गुरु मंत्र दीक्षा के लिए सिद्धि दायक मुहूर्त होता है। शिवरात्रि का व्रत सब व्रतों में उत्तम एवं कल्याणकारी माना जाता है।
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टपकेश्वर में 13, सिद्धेश्वर में 14 को व्रत
महाशिवरात्रि का व्रत टपकेश्वर मंदिर में 13 फरवरी को ही किया जाएगा। महंत किशन गिरि ने बताया कि इस दिन बाबा का विशेष अभिषेक होगा, जिसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। वहीं केदारपुरम स्थित सिद्धेश्वर मंदिर में 14 फरवरी को व्रत किए जाने की तैयारी है। मंदिर के पंडित संजय खंकरियाल ने बताया कि मंदिर में जहां श्रद्धालु 14 को व्रत करेंगे। वहीं 14 और 15 को महाशिवरात्रि मेला भी लगेगा। इसी तरह शिव मंदिरों में अलग-अलग दिन व्रत किया जाएगा।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
शास्त्र एवं पुराणों के अनुसार निशीथ व्यापिनी फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का व्रत किया जाता है। इस बार चतुर्दशी तिथि दो दिन होने की वजह से लोग असमंजस में हैं कि व्रत किस दिया किया जाए। कुछ मंदिरों में यह व्रत 14 फरवरी को भी किया जा रहा है। हालांकि ज्योतिषयों के अनुसार 13 फरवरी को व्रत करना शास्त्र सम्मत रहेगा।
धर्म सिंधु के अनुसार चतुर्दशी तिथि दूसरे दिन निशीथ काल में आंशिक रूप से व्याप्त हो और पहले दिन संपूर्ण भाग को व्याप्त करे तो महाशिवरात्रि का व्रत पहले दिन करना चाहिए। आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार इस वर्ष फाल्गुन चतुर्दशी तिथि 13 फरवरी को पूर्ण रूप से निशीथ व्यापिनी है, जबकि 14 फरवरी को रात 12.13 मिनट से 12.48 मिनट तक निशीथकाल में आंशिक व्याप्त है। ऐसे में यह व्रत 13 फरवरी को करना चाहिए।
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डा. आचार्य सुशांत राज के अनुसार चतुर्दशी तिथि 13 फरवरी को रात्रि 10.34 मिनट पर आरंभ होगी और 14 फरवरी को रात्रि 12.46 मिनट पर समाप्त होगी। ज्योतिष पीपीएस राणा के अनुसार ईशान संहिता में वर्णित है कि जिस तिथि में अर्ध रात्रि व्यापिनी चतुर्दशी तिथि हो, उस तिथि में व्रत रखें। शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि इस दिन शिव का विवाह पार्वती जी के साथ हुआ था। इस वर्ष शिवरात्रि मंगलवार के दिन पड़ रही है। हनुमान जी शिव के रुद्रावतार हैं।
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ये रहेगा निशीथ काल का समय
ज्योतिषाचार्य गौरव आर्य के अनुसार दून में 13 फरवरी को निशीथकाल 12.04 मिनट से 12.56 मिनट तक रहेगा। अत: 13 फरवरी को निशीथकाल में चतुर्दशी रहेगी। 14 फरवरी को निशीथकाल से पहले चतुर्दशी तिथि समाप्त हो जाएगी।
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शिवार्चन करें, पूरी होगी मनोकामना
आचार्य संतोष खंडूरी के अनुसार जिनकी कुंडली में पितृदोष, चांडाल, विष योग, शासकीय प्रताड़ना आदि हों, वे इस दिन शिर्वाचन करेंगे तो शिव उपासक की मनोकामना पूर्ण होगी। शिवरात्रि में साधना एवं गुरु मंत्र दीक्षा के लिए सिद्धि दायक मुहूर्त होता है। शिवरात्रि का व्रत सब व्रतों में उत्तम एवं कल्याणकारी माना जाता है।
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टपकेश्वर में 13, सिद्धेश्वर में 14 को व्रत
महाशिवरात्रि का व्रत टपकेश्वर मंदिर में 13 फरवरी को ही किया जाएगा। महंत किशन गिरि ने बताया कि इस दिन बाबा का विशेष अभिषेक होगा, जिसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। वहीं केदारपुरम स्थित सिद्धेश्वर मंदिर में 14 फरवरी को व्रत किए जाने की तैयारी है। मंदिर के पंडित संजय खंकरियाल ने बताया कि मंदिर में जहां श्रद्धालु 14 को व्रत करेंगे। वहीं 14 और 15 को महाशिवरात्रि मेला भी लगेगा। इसी तरह शिव मंदिरों में अलग-अलग दिन व्रत किया जाएगा।