{"_id":"5b9d6df1867a557fee026241","slug":"181537043953-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैंडल मार्च निकालकर मांगी पुरानी पेंशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैंडल मार्च निकालकर मांगी पुरानी पेंशन
Updated Sun, 16 Sep 2018 02:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैंडल मार्च निकालकर मांगी पुरानी पेंशन
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग को लेकर एक दर्जन से अधिक संगठनों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने शनिवार को कैंडल मार्च निकाला। उन्होंने कहा कि नई पेंशन व्यवस्था से कर्मचारियों को बहुत अधिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। कर्मचारी हर स्तर पर इसका विरोध करेंगे।
शनिवार शाम पुरानी पेंशन बहाली मंच के बैनर तले कर्मचारी धरनास्थल पर एकत्रित हुए। इसके बाद कर्मचारियों ने कनक चौक, सर्वे चौक, तिब्बती बाजार होते हुए वापस धरनास्थल तक कैंडल मार्च निकाला। मंच के प्रदेश अध्यक्ष रघुवीर बिष्ट ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों और ब्लॉकों में भी कैंडल मार्च निकाला गया। उन्होंने बताया कि एक अक्तूबर को प्रदेशभर के कर्मचारी, शिक्षक अधिकारी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे। 28 अक्तूबर को सभी सांसदों के आवास पर भूख हड़ताल और 26 नवंबर को संसद का घेराव किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 27 राज्यों में पुरानी पेंशन को बहाल करने की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है।
कैंडल मार्च में माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संजय बिजल्वाण, मंत्री अनिल नौटियाल, पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष जयप्रकाश बहुगुणा, आरएल उनियाल, प्रदीप डबराल, आशीष शर्मा, पेंशन बहाली मंच के मंत्री मुकेश रतूड़ी, राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगराण, माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ के प्रदेश अध्यक्ष बीएस पंवार, जिलाध्यक्ष सतीश सेमवाल, पर्वतीय शिक्षक-कर्मचारी संगठन के सुभाष देवलियाल, प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री दिग्विजय चौहान, सुभाष चौहान, गिरीश सेमवाल, दिनेश डोबरियाल, रोहित बिष्ट, वीरेंद्र पंवार, जयसिंह कठैत, बीना गोयल, नीलिमा, सुषमा अग्रवाल, नीलम बुडाकोटी समेत अन्य कर्मचारी शामिल रहे।
विज्ञापन
--
यह संगठन रहे शामिल
कैंडल मार्च में अधिकारी-कर्मचारी समन्वय मंच, कर्मचारी शिक्षक आउटसोर्स संयुक्त मोर्चा, मिनिस्टीरियल फेडरेशन ऑफ उत्तराखंड, राजकीय शिक्षक संघ, माध्यमिक शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ, सचिवालय संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, वाणिज्य कर, आईटीआई, संस्कृति विभाग, एजुकेशनल मिनिस्टीरियल समेत अन्य कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग को लेकर एक दर्जन से अधिक संगठनों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने शनिवार को कैंडल मार्च निकाला। उन्होंने कहा कि नई पेंशन व्यवस्था से कर्मचारियों को बहुत अधिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। कर्मचारी हर स्तर पर इसका विरोध करेंगे।
शनिवार शाम पुरानी पेंशन बहाली मंच के बैनर तले कर्मचारी धरनास्थल पर एकत्रित हुए। इसके बाद कर्मचारियों ने कनक चौक, सर्वे चौक, तिब्बती बाजार होते हुए वापस धरनास्थल तक कैंडल मार्च निकाला। मंच के प्रदेश अध्यक्ष रघुवीर बिष्ट ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों और ब्लॉकों में भी कैंडल मार्च निकाला गया। उन्होंने बताया कि एक अक्तूबर को प्रदेशभर के कर्मचारी, शिक्षक अधिकारी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे। 28 अक्तूबर को सभी सांसदों के आवास पर भूख हड़ताल और 26 नवंबर को संसद का घेराव किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 27 राज्यों में पुरानी पेंशन को बहाल करने की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है।
विज्ञापन
कैंडल मार्च में माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संजय बिजल्वाण, मंत्री अनिल नौटियाल, पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष जयप्रकाश बहुगुणा, आरएल उनियाल, प्रदीप डबराल, आशीष शर्मा, पेंशन बहाली मंच के मंत्री मुकेश रतूड़ी, राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगराण, माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ के प्रदेश अध्यक्ष बीएस पंवार, जिलाध्यक्ष सतीश सेमवाल, पर्वतीय शिक्षक-कर्मचारी संगठन के सुभाष देवलियाल, प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री दिग्विजय चौहान, सुभाष चौहान, गिरीश सेमवाल, दिनेश डोबरियाल, रोहित बिष्ट, वीरेंद्र पंवार, जयसिंह कठैत, बीना गोयल, नीलिमा, सुषमा अग्रवाल, नीलम बुडाकोटी समेत अन्य कर्मचारी शामिल रहे।
विज्ञापन
--
यह संगठन रहे शामिल
कैंडल मार्च में अधिकारी-कर्मचारी समन्वय मंच, कर्मचारी शिक्षक आउटसोर्स संयुक्त मोर्चा, मिनिस्टीरियल फेडरेशन ऑफ उत्तराखंड, राजकीय शिक्षक संघ, माध्यमिक शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक संघ, सचिवालय संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, वाणिज्य कर, आईटीआई, संस्कृति विभाग, एजुकेशनल मिनिस्टीरियल समेत अन्य कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।