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पांच साल से बंद योजना का काम शुरू होने की उम्मीद जगी
Updated Wed, 11 Apr 2018 02:32 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
बजट के अभाव में पांच साल से बंद पड़ी श्रीनगर-पौड़ी वैकल्पिक श्रोत योजना का काम जल्द शुरू होने की उम्मीद जगी है। श्रीनगर, श्रीकोट और पौड़ी के लोगों को पेयजल की समस्या पर शासन ने योजना का संज्ञान लिया है। बृहस्पतिवार को शासन ने इस संबंध में कार्यदायी संस्था पेयजल निगम, जल संस्थान और फंडिंग कंपनी एएचपीसी की बैठक बुलाई गई है।
साल 2010 में विद्युत उत्पादन के लिए राज्य सरकार ने अलकनंदा नदी का पानी डायवर्ट कर दिया था। पानी कम होने के कारण श्रीनगर व श्रीकोट स्थित वाटर वर्क्स में आवश्यकता के अनुरूप पानी पहुंचना बंद हो गया। जिससे जिलों में पानी की समस्या पैदा हो रही थी। समस्या के समाधान को श्रीनगर-पौड़ी वैकल्पिक श्रोत योजना पर कार्य शुरू किया गया था। इस योजना का निर्माण 20 करोड़ की लागत से होना था। इसके लिए फंडिंग कंपनी एएचपीसी ने साल 2013 तक आठ करोड़ रुपये जारी किए। इस बजट से पेयजल निगम ने 70 फीसदी काम पूरा कराया, लेकिन उसके बाद कोई बजट जारी नहीं किया। जिस वजह से अब तक योजना का काम बंद पड़ा है। जिसका खामियाजा श्रीनगर, श्रीकोट व पौड़ी की जनता को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। पेयजल निगम के मुख्य अभियंता वीसी पुरोहित के मुताबिक एएचपीसी की ओर से बजट न मिलने के कारण योजना का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। बृहस्पतिवार को इस संबंध में सचिव पेयजल ने बैठक बुलाई है। उसके बाद आगे की स्थिति साफ हो पाएगी।
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बजट के अभाव में पांच साल से बंद पड़ी श्रीनगर-पौड़ी वैकल्पिक श्रोत योजना का काम जल्द शुरू होने की उम्मीद जगी है। श्रीनगर, श्रीकोट और पौड़ी के लोगों को पेयजल की समस्या पर शासन ने योजना का संज्ञान लिया है। बृहस्पतिवार को शासन ने इस संबंध में कार्यदायी संस्था पेयजल निगम, जल संस्थान और फंडिंग कंपनी एएचपीसी की बैठक बुलाई गई है।
साल 2010 में विद्युत उत्पादन के लिए राज्य सरकार ने अलकनंदा नदी का पानी डायवर्ट कर दिया था। पानी कम होने के कारण श्रीनगर व श्रीकोट स्थित वाटर वर्क्स में आवश्यकता के अनुरूप पानी पहुंचना बंद हो गया। जिससे जिलों में पानी की समस्या पैदा हो रही थी। समस्या के समाधान को श्रीनगर-पौड़ी वैकल्पिक श्रोत योजना पर कार्य शुरू किया गया था। इस योजना का निर्माण 20 करोड़ की लागत से होना था। इसके लिए फंडिंग कंपनी एएचपीसी ने साल 2013 तक आठ करोड़ रुपये जारी किए। इस बजट से पेयजल निगम ने 70 फीसदी काम पूरा कराया, लेकिन उसके बाद कोई बजट जारी नहीं किया। जिस वजह से अब तक योजना का काम बंद पड़ा है। जिसका खामियाजा श्रीनगर, श्रीकोट व पौड़ी की जनता को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। पेयजल निगम के मुख्य अभियंता वीसी पुरोहित के मुताबिक एएचपीसी की ओर से बजट न मिलने के कारण योजना का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। बृहस्पतिवार को इस संबंध में सचिव पेयजल ने बैठक बुलाई है। उसके बाद आगे की स्थिति साफ हो पाएगी।
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