{"_id":"5a7b669a4f1c1b514a8b8099","slug":"181518036634-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"होम्योपैथिक डाक्टर भी लिख सकेंगे ऐलोपैथिक दवाएं होम्योपैथिक निदेशक ने","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
होम्योपैथिक डाक्टर भी लिख सकेंगे ऐलोपैथिक दवाएं होम्योपैथिक निदेशक ने
Updated Thu, 08 Feb 2018 02:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
प्रदेश में चिकित्सकों की कमी को देखते हुए होम्योपैथिक चिकित्सकों को भी ऐलोपैथिक दवाएं लिखे जाने की मंजूरी मिल सकती है। निदेशक होम्योपैथिक नसरीन फातिमा के मुताबिक इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। विभागीय मंत्री इसके लिए तैयार हैं। प्रस्ताव जल्द ही शासन को भेजा जाएगा।
निदेशक होम्योपैथिक नसरीन फातिमा ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सकों के 60 फीसदी पद रिक्त हैं। ऐसे में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सकों को भी ऐलोपैथिक दवाएं लिखे जाने की मंजूरी मिलनी चाहिए। इस संबंध में उनकी मुख्यमंत्री से वार्ता हो चुकी है। वहीं, विभागीय मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत भी इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अन्य प्रदेशों महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सकों को इसकी मंजूरी मिल चुकी है। उत्तराखंड में भी इन प्रदेशों की तरह चिकित्सकों को ब्रिज कोर्स कराकर ऐलोपैथिक दवाएं खिलने की मंजूरी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिज कोर्स छह महीने और साल भर का किया जा सकता है। महाराष्ट्र में एक साल का ब्रिज कोर्स करने वाले प्रैक्टिस भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल्द प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा।
विज्ञापन
प्रदेश में चिकित्सकों की कमी को देखते हुए होम्योपैथिक चिकित्सकों को भी ऐलोपैथिक दवाएं लिखे जाने की मंजूरी मिल सकती है। निदेशक होम्योपैथिक नसरीन फातिमा के मुताबिक इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। विभागीय मंत्री इसके लिए तैयार हैं। प्रस्ताव जल्द ही शासन को भेजा जाएगा।
निदेशक होम्योपैथिक नसरीन फातिमा ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सकों के 60 फीसदी पद रिक्त हैं। ऐसे में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सकों को भी ऐलोपैथिक दवाएं लिखे जाने की मंजूरी मिलनी चाहिए। इस संबंध में उनकी मुख्यमंत्री से वार्ता हो चुकी है। वहीं, विभागीय मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत भी इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अन्य प्रदेशों महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सकों को इसकी मंजूरी मिल चुकी है। उत्तराखंड में भी इन प्रदेशों की तरह चिकित्सकों को ब्रिज कोर्स कराकर ऐलोपैथिक दवाएं खिलने की मंजूरी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिज कोर्स छह महीने और साल भर का किया जा सकता है। महाराष्ट्र में एक साल का ब्रिज कोर्स करने वाले प्रैक्टिस भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल्द प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा।
विज्ञापन