{"_id":"59513fdc4f1c1b37048b4788","slug":"181498496988-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीएम दरबार पहुंचा चांठी-डोबारा पुल की शिकायत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएम दरबार पहुंचा चांठी-डोबारा पुल की शिकायत
Updated Mon, 26 Jun 2017 10:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नई टिहरी। प्रतापनगर के आवागमन को 11 साल बाद भी तैयार नहीं हो पाए चांठी-डोबरा पुल की शिकायत प्रधानमंत्री मोदी को पहुंची है। प्रतापनगर के कुड़ियालगांव निवासी युवक ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर पुल न बनने के कारण क्षेत्रवासियों को हो रही दिक्कतों से अवगत कराया। पीएमओ ने भी पत्र भेजकर राज्य सरकार को कार्रवाई करने को कहा है।
प्रतापनगर ब्लाक और उत्तरकाशी के गाजणा पट्टी के दो लाख की आबादी को आवागमन के उद्देश्य से सरकार ने 89 करोड़ स्वीकृत कर वर्ष 2006 में चांठी-डोबरा पुल का निर्माण शुरू करवाया था। अनुबंध के अनुसार 2008 में पुल बनकर तैयार हो जाना था, लेकिन विभिन्न कारणों से पुल के निर्माण में देरी हुई। जिससे निर्माण की लागत एक अरब 25 करोड़ बढ़ गई। निर्माण के नाम पर चार टावर और 260 मीटर आरसीसी पुल पर एक अरब 25 करोड़ खर्च कर दिए गए। वर्ष 2011 में आईआईटी रुड़की से तैयार करवाई गई पुल की डिजायन क्रॉस चेकिंग के दौरान आईआईटी खड़कपुर ने फेल कर दी, जिससे पुल का निर्माण बंद हो गया। पूर्ववर्ती सरकार ने कोरियाई कंसलटेंस से डिजायन बनाकर एक अरब 49 करोड़ 97 और स्वीकृत फरवरी 2016 में काम शुरू करवाया था। बावजूद कार्य की गति धीमी होने के चलते प्रतापनगर के कुड़ियालगांव निवासी युवक जितेंद्र कुड़ियाल ने फरवरी में प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजकर पुल निर्माण में पीएम मोदी का सहयोग मांगा। इस पर पीएमओ के ब्रह्मूराम ने पत्र को मुख्य सचिव उत्तराखंड सरकार को कार्रवाई के लिए भेजा है।
विज्ञापन
प्रतापनगर ब्लाक और उत्तरकाशी के गाजणा पट्टी के दो लाख की आबादी को आवागमन के उद्देश्य से सरकार ने 89 करोड़ स्वीकृत कर वर्ष 2006 में चांठी-डोबरा पुल का निर्माण शुरू करवाया था। अनुबंध के अनुसार 2008 में पुल बनकर तैयार हो जाना था, लेकिन विभिन्न कारणों से पुल के निर्माण में देरी हुई। जिससे निर्माण की लागत एक अरब 25 करोड़ बढ़ गई। निर्माण के नाम पर चार टावर और 260 मीटर आरसीसी पुल पर एक अरब 25 करोड़ खर्च कर दिए गए। वर्ष 2011 में आईआईटी रुड़की से तैयार करवाई गई पुल की डिजायन क्रॉस चेकिंग के दौरान आईआईटी खड़कपुर ने फेल कर दी, जिससे पुल का निर्माण बंद हो गया। पूर्ववर्ती सरकार ने कोरियाई कंसलटेंस से डिजायन बनाकर एक अरब 49 करोड़ 97 और स्वीकृत फरवरी 2016 में काम शुरू करवाया था। बावजूद कार्य की गति धीमी होने के चलते प्रतापनगर के कुड़ियालगांव निवासी युवक जितेंद्र कुड़ियाल ने फरवरी में प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजकर पुल निर्माण में पीएम मोदी का सहयोग मांगा। इस पर पीएमओ के ब्रह्मूराम ने पत्र को मुख्य सचिव उत्तराखंड सरकार को कार्रवाई के लिए भेजा है।
विज्ञापन