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आदिवासी क्षेत्र में बनाए इस्कान मंदिर
Updated Tue, 13 Jun 2017 09:59 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
शारदा एवं ज्योर्तिपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने इस्कान संस्था पर निशाना साधा है। उन्होंने वृंदावन, ऋषिकेश, मुंबई के बजाए आदिवासी क्षेत्रों में मंदिर बनाकर उनकी सेवा करने की सलाह दी। कहा कि यह संस्था अपने सिद्धांत से भटक गई है। अमेरिका में संचालित संस्था को अब देश से धन भेजा जा रहा है, जो कि गलत है।
कनखल स्थित मठ में अमर उजाला से बातचीत में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि इस्कान संस्था विदेेशों में कृष्ण नाम का प्रचार करती है। उसका उद्देश्य प्रचार के दौरान मिली राशि गरीबों और पिछड़ों की सेवा में लगाना था। इस्कान का रजिस्ट्रेशन अमेरिका में है। वर्तमान में संस्था देश के मंदिरों से एकत्रित होने वाले धन को विदेशों में भेज रही है। अब इसका नया समुदाय भी खड़ा करने का काम किया जा रहा है। इनके प्रचार करने का तरीका भी गीता के प्रचार के सिद्धांत के विपरीत है। इस्कान से जुड़े लोग जनता को भ्रमित करते हुए भगवान शिव की पूजा के बजाय केवल श्रीकृष्ण की पूजा करने की बात करते हैं, जोकि सनातन धर्म के खिलाफ है। उन्होंने इस्कान की ओर से वृंदावन, ऋषिकेश, मुंबई में मंदिर बनाने का विरोध करते हुए कहा कि जहां पर पहले से ही भगवान श्रीकृष्ण के कई मंदिर हैं तो ऐसे स्थानों के बजाय आदिवासी क्षेत्रों में मंदिर बनाने चाहिए, ताकि पूजा अर्चना या चंदा के रूप में आए धन को गरीबों की सेवा में लगाया जाए।
पूर्णागिरी मंदिर में शीघ्र पूजा करेंगे
हरिद्वार (ब्यूरो)। जोशीमठ में पूूर्णागिरी मंदिर परिसर में अनशन समाप्त होने के बाद स्वस्थ होने पर शंकराचार्य के शिष्य दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पूजा अर्चना करने जाएंगे। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि कानून के अनुसार ज्योर्तिमठ की व्यवस्था का प्रबंधक शंकराचार्य होते हैं। वर्तमान में वे ज्योर्तिमठ के प्रबंधक हैं और वहां की व्यवस्था उनके अनुसार चलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब मंदिर पर कोई ताला नहीं लगा सकेंगे। मालूम हो कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद छह जून से अनशन पर थे, लेकिन उनकी तीन दिन की चेतावानी के बाद मंदिर का ताला नहीं खोला तो उन्होंने पानी लेना भी छोड़ दिया था। प्रशासन ने उन्हें जबरदस्ती उठाते हुए ऋषिकेश एम्स में भर्ती किया और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने मांगे पूरी करने का आश्वासन देते हुए उनका अनशन तुड़वाया।
हरिद्वार।
शारदा एवं ज्योर्तिपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने इस्कान संस्था पर निशाना साधा है। उन्होंने वृंदावन, ऋषिकेश, मुंबई के बजाए आदिवासी क्षेत्रों में मंदिर बनाकर उनकी सेवा करने की सलाह दी। कहा कि यह संस्था अपने सिद्धांत से भटक गई है। अमेरिका में संचालित संस्था को अब देश से धन भेजा जा रहा है, जो कि गलत है।
कनखल स्थित मठ में अमर उजाला से बातचीत में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि इस्कान संस्था विदेेशों में कृष्ण नाम का प्रचार करती है। उसका उद्देश्य प्रचार के दौरान मिली राशि गरीबों और पिछड़ों की सेवा में लगाना था। इस्कान का रजिस्ट्रेशन अमेरिका में है। वर्तमान में संस्था देश के मंदिरों से एकत्रित होने वाले धन को विदेशों में भेज रही है। अब इसका नया समुदाय भी खड़ा करने का काम किया जा रहा है। इनके प्रचार करने का तरीका भी गीता के प्रचार के सिद्धांत के विपरीत है। इस्कान से जुड़े लोग जनता को भ्रमित करते हुए भगवान शिव की पूजा के बजाय केवल श्रीकृष्ण की पूजा करने की बात करते हैं, जोकि सनातन धर्म के खिलाफ है। उन्होंने इस्कान की ओर से वृंदावन, ऋषिकेश, मुंबई में मंदिर बनाने का विरोध करते हुए कहा कि जहां पर पहले से ही भगवान श्रीकृष्ण के कई मंदिर हैं तो ऐसे स्थानों के बजाय आदिवासी क्षेत्रों में मंदिर बनाने चाहिए, ताकि पूजा अर्चना या चंदा के रूप में आए धन को गरीबों की सेवा में लगाया जाए।
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पूर्णागिरी मंदिर में शीघ्र पूजा करेंगे
हरिद्वार (ब्यूरो)। जोशीमठ में पूूर्णागिरी मंदिर परिसर में अनशन समाप्त होने के बाद स्वस्थ होने पर शंकराचार्य के शिष्य दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पूजा अर्चना करने जाएंगे। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि कानून के अनुसार ज्योर्तिमठ की व्यवस्था का प्रबंधक शंकराचार्य होते हैं। वर्तमान में वे ज्योर्तिमठ के प्रबंधक हैं और वहां की व्यवस्था उनके अनुसार चलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब मंदिर पर कोई ताला नहीं लगा सकेंगे। मालूम हो कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद छह जून से अनशन पर थे, लेकिन उनकी तीन दिन की चेतावानी के बाद मंदिर का ताला नहीं खोला तो उन्होंने पानी लेना भी छोड़ दिया था। प्रशासन ने उन्हें जबरदस्ती उठाते हुए ऋषिकेश एम्स में भर्ती किया और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने मांगे पूरी करने का आश्वासन देते हुए उनका अनशन तुड़वाया।
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