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प्रवक्ता पद पर आवेदन से वंचित रह गए संस्कृत के छात्र
Updated Thu, 20 Sep 2018 01:20 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने प्रदेश के संस्कृत महाविद्यालयों और उत्तराखंड संस्कृत विवि की शास्त्री (डीबीए) और आचार्य (एमए) को प्रवक्ता संवर्ग के लिए नहीं माना है। ऐसे में प्रदेश के हजारों संस्कृत छात्रों का भविष्य अंधकार में पहुंच गया है।
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने 30 अगस्त को शासन के माध्यम से शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रवक्ता संवर्ग समूह-ग सेवा परीक्षा में 917 रिक्त पदों पर ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। ऐसे में जब संस्कृत महाविद्यालयों और संस्कृत विवि से शास्त्री और आचार्य उत्तीर्ण छात्रों ने प्रवक्ता पद के लिए आवेदन करना चाहा तो ऑनलाइन आवेदन पत्र में शास्त्री और आचार्य का कोई विकल्प नहीं था। इसके चलते संस्कृत के छात्र ऑनलाइन आवेदन पत्र नहीं भर पाए। प्रकाश चंद्र तिवारी, विकाश जोशी, ज्योति प्रकाश, राकेश, रोहित, हर्षमणि आदि संस्कृत के छात्रों का कहना है वह आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन पत्र में शास्त्री और आचार्य का विकल्प न होने से वे आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। आवेदन पत्र में बीए और एमए का ही विकल्प दिया गया है। संस्कृत छात्रों के प्रवक्ता पद के लिए अयोग्य होने पर संस्कृत जगत में गहमा-गहमी का माहौल बना हुआ। उधर, उत्तराखंड संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. पीयूष कांत दीक्षित ने शास्त्री और आचार्य के छात्रों को प्रवक्ता की परीक्षा में शामिल किए जाने के संबंध में आयोग के अध्यक्ष और सचिव को पत्र भेजा है।
कोट:
शासन की सेवा नियमावली के अनुसार की प्रवक्ता संवर्ग के 917 पदों पर विज्ञप्ति जारी की गई है। शासन स्तर पर सेवा नियमावली में परिवर्तन होने पर ही आयोग इस दिशा में आगे की कार्रवाई कर सकता है।
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-आनंद स्वरूप, सचिव उत्तराखंड लोक सेवा आयोग।
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उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने प्रदेश के संस्कृत महाविद्यालयों और उत्तराखंड संस्कृत विवि की शास्त्री (डीबीए) और आचार्य (एमए) को प्रवक्ता संवर्ग के लिए नहीं माना है। ऐसे में प्रदेश के हजारों संस्कृत छात्रों का भविष्य अंधकार में पहुंच गया है।
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने 30 अगस्त को शासन के माध्यम से शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रवक्ता संवर्ग समूह-ग सेवा परीक्षा में 917 रिक्त पदों पर ऑनलाइन आवेदन मांगे थे। ऐसे में जब संस्कृत महाविद्यालयों और संस्कृत विवि से शास्त्री और आचार्य उत्तीर्ण छात्रों ने प्रवक्ता पद के लिए आवेदन करना चाहा तो ऑनलाइन आवेदन पत्र में शास्त्री और आचार्य का कोई विकल्प नहीं था। इसके चलते संस्कृत के छात्र ऑनलाइन आवेदन पत्र नहीं भर पाए। प्रकाश चंद्र तिवारी, विकाश जोशी, ज्योति प्रकाश, राकेश, रोहित, हर्षमणि आदि संस्कृत के छात्रों का कहना है वह आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन पत्र में शास्त्री और आचार्य का विकल्प न होने से वे आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। आवेदन पत्र में बीए और एमए का ही विकल्प दिया गया है। संस्कृत छात्रों के प्रवक्ता पद के लिए अयोग्य होने पर संस्कृत जगत में गहमा-गहमी का माहौल बना हुआ। उधर, उत्तराखंड संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. पीयूष कांत दीक्षित ने शास्त्री और आचार्य के छात्रों को प्रवक्ता की परीक्षा में शामिल किए जाने के संबंध में आयोग के अध्यक्ष और सचिव को पत्र भेजा है।
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कोट:
शासन की सेवा नियमावली के अनुसार की प्रवक्ता संवर्ग के 917 पदों पर विज्ञप्ति जारी की गई है। शासन स्तर पर सेवा नियमावली में परिवर्तन होने पर ही आयोग इस दिशा में आगे की कार्रवाई कर सकता है।
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-आनंद स्वरूप, सचिव उत्तराखंड लोक सेवा आयोग।