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वाद्य यंत्रों से जुड़ी सांस्कृतिक धरोहर को बचाएं

Sun, 18 Mar 2018 02:20 AM IST
Updated Sun, 18 Mar 2018 02:20 AM IST
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वाद्य यंत्रों से जुड़ी सांस्कृतिक धरोहर को बचाएं
वाद्य यंत्रों से जुड़ी सांस्कृतिक धरोहर को बचाएं
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ब्यूरो/अमर उजाला
मसूरी।
नगर स्थित वुडस्टाक स्कूल में आयोजित तीन दिवसीय माउंटेन फेस्टिवल का शनिवार को समापन हो गया। फेस्टिवल के अंतिम दिन पार्कर हॉल में प्रोफेसर डा. एंड्रयू ऑल्टर ने संगीत और ढोल विधा पर आधारित प्रदर्शनी दिखाई।
उन्होंने शनिवार को माउंटेन फेस्टिवल में ढोल व अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों से जुड़ी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यहां के पारंपरिक ढोल और इससे निकलने वाला स्वर संगीत अपने आप में एक भाषा है जो किसी भी समुदाय को आकर्षित करने की क्षमता रखता है। डा. शेखर पाठक ने विश्व और भारतीय हिमालयी क्षेत्रों में बोली जाने वाली भाषाओं की जानकारी दी।
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इस दौरान हेमचंद सकलानी ने पुस्तक ‘डूबती टिहरी की आखिरी कविताएं’ के माध्यम से टिहरी शहर से जुड़े इतिहास की जानकारी दी। इसके अलावा प्रसिद्ध लेखक स्टीफन ऑल्टर ने हिमालय की पारिस्थितिकी में आ रहे चिंताजनक बदलाव पर प्रकाश डाला। इस दौरान लोकेश ओहरी के स्थानीय जीवन शैली पर आधारित नाटक की प्रस्तुति दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। इस मौके पर कृष्णन कुट्टी, स्टीव ऑल्टर, शेखर पाठक, स्कूल के प्रधानाचार्य जॉनथन लांग, अनुपम शाह सहित काफी संख्या में स्कूली बच्चे मौजूद रहे।
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