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जुनूनी अमीषा ने फतह किया किलिमंजारो
Updated Sat, 13 Jan 2018 01:33 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
54 घंटे के रिकॉर्ड समय में माउंट किलिमंजारो फतह करने वाली अमीषा चौहान अब 2019 में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह करने के अभियान में जुटेंगी। शुक्रवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अमीषा ने यह जानकारी दी।
मूलत: भनस्वाडी दसजुला जौनपुर टिहरी निवासी अमीषा का परिवार दून के नकरौंदा इलाके में रहता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कम समय में चोटी फतह करने का लक्ष्य तय किया था, जिसे पाने में वह कामयाब रही। 28 दिसंबर को दोपहर 12 बजे उन्होंने अपना अभियान शुरू किया और 30 दिसंबर को शाम साढ़े पांच बजे समाप्त किया। उनके पिता सू.मे. (आनररी लेफ्टिनेंट) रविंद्र सिंह चौहान ने बताया कि अमीषा का जन्म सात माह में हो गया था। इसके चलते उसका सामान्य बच्चों जैसा विकास नहीं हुआ। अमीषा ने सात वर्ष की उम्र में बोलना सीखा था। अब भी अमीषा को बोलने और सुनने में दिक्कत होती है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने अमीषा को माउंट एवरेस्ट समेत अन्य अभियानों में पूरी मदद देने का आश्वासन दिया है।
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54 घंटे के रिकॉर्ड समय में माउंट किलिमंजारो फतह करने वाली अमीषा चौहान अब 2019 में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह करने के अभियान में जुटेंगी। शुक्रवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अमीषा ने यह जानकारी दी।
मूलत: भनस्वाडी दसजुला जौनपुर टिहरी निवासी अमीषा का परिवार दून के नकरौंदा इलाके में रहता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कम समय में चोटी फतह करने का लक्ष्य तय किया था, जिसे पाने में वह कामयाब रही। 28 दिसंबर को दोपहर 12 बजे उन्होंने अपना अभियान शुरू किया और 30 दिसंबर को शाम साढ़े पांच बजे समाप्त किया। उनके पिता सू.मे. (आनररी लेफ्टिनेंट) रविंद्र सिंह चौहान ने बताया कि अमीषा का जन्म सात माह में हो गया था। इसके चलते उसका सामान्य बच्चों जैसा विकास नहीं हुआ। अमीषा ने सात वर्ष की उम्र में बोलना सीखा था। अब भी अमीषा को बोलने और सुनने में दिक्कत होती है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने अमीषा को माउंट एवरेस्ट समेत अन्य अभियानों में पूरी मदद देने का आश्वासन दिया है।
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