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छात्रावासों को पंजीकरण के दायरे में लाने की तैयारी
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छात्रावासों को पंजीकरण के दायरे में लाने की तैयारी
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राज्य के तमाम शैक्षणिक संस्थानों व निजी छात्रावासों को भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दायरे में लाने की तैयारी है। सूत्रों की माने तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी छात्रावासों को पंजीकरण के दायरे में लाने के साथ ही उनसे पंजीकरण शुल्क समेत अन्य शुल्क वसूलने की तैयारी मेें हैं। इस संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारियोें के बीच मंथन होने के साथ ही तमाम पहलुओं पर चर्चा की जा चुकी है। सूत्रों के मुताबिक आचार संहिता समाप्त होेने के साथ ही प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो केवल राजधानी में 300 के करीब छात्रावास शैक्षणिक संस्थानों व निजी संचालकों द्वारा संचालित हैं, जबकि राज्य में इनकी संख्या हजारों में हैं। इन छात्रावासों में प्रदूषण नियंत्रण नियमों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। छात्रावास संचालकों ने नगर निगम, जिला प्रशासन, जिला पंचायत या अन्य सरकारी संस्थानों अथवा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकरण भी नहीं कराया हुआ है।
अब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी इन छात्रावास संचालकों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो जल्द ही इस संबंध में बोर्ड बैठक मेें प्रस्ताव लाया जाएगा और कोई निर्णय लेकर छात्रावासों को पंजीकरण के दायरे में लाया जाएगा। हालांकि इस संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कोई भी अधिकारी लोकसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लागू होेने की वजह से कुछ भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में जल्द ही कोई फैसला लिया जाएगा। बताया कि इन छात्रावासों में प्रदूषण नियंत्रण कानूनों का उल्लंघन किया जा रहा है। जिस कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर इस संबंध में बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुुबुद्धि से जानकारी ली गई तो उन्होंने आचार संहिता लागू होने का हवाला देकर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राज्य के तमाम शैक्षणिक संस्थानों व निजी छात्रावासों को भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दायरे में लाने की तैयारी है। सूत्रों की माने तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी छात्रावासों को पंजीकरण के दायरे में लाने के साथ ही उनसे पंजीकरण शुल्क समेत अन्य शुल्क वसूलने की तैयारी मेें हैं। इस संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारियोें के बीच मंथन होने के साथ ही तमाम पहलुओं पर चर्चा की जा चुकी है। सूत्रों के मुताबिक आचार संहिता समाप्त होेने के साथ ही प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो केवल राजधानी में 300 के करीब छात्रावास शैक्षणिक संस्थानों व निजी संचालकों द्वारा संचालित हैं, जबकि राज्य में इनकी संख्या हजारों में हैं। इन छात्रावासों में प्रदूषण नियंत्रण नियमों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। छात्रावास संचालकों ने नगर निगम, जिला प्रशासन, जिला पंचायत या अन्य सरकारी संस्थानों अथवा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकरण भी नहीं कराया हुआ है।
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अब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी इन छात्रावास संचालकों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो जल्द ही इस संबंध में बोर्ड बैठक मेें प्रस्ताव लाया जाएगा और कोई निर्णय लेकर छात्रावासों को पंजीकरण के दायरे में लाया जाएगा। हालांकि इस संबंध में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कोई भी अधिकारी लोकसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लागू होेने की वजह से कुछ भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में जल्द ही कोई फैसला लिया जाएगा। बताया कि इन छात्रावासों में प्रदूषण नियंत्रण कानूनों का उल्लंघन किया जा रहा है। जिस कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर इस संबंध में बोर्ड के सदस्य सचिव एसपी सुुबुद्धि से जानकारी ली गई तो उन्होंने आचार संहिता लागू होने का हवाला देकर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
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