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जापानी तकनीकी से समृद्ध होंगे उतराखंड के वन - सीएम
Updated Thu, 12 Apr 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, मसूरी
सीएम त्रिवेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार वनों के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए तत्पर है। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जायका) के सहयोग से वन संरक्षण की दिशा में उत्तराखंड, देशभर में नई मिसाल कायम करेगा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में कार्य कर रही जायका के सहयोग से जापानी तकनीक का उपयोग कर उत्तराखंड के वनों को समृद्ध बनाना और लोगों को उनकी मूल आजीविका से जोड़ने का काम बेहद सराहनीय है। बुधवार को सीएम ने यहां एक होटल के सभागार में जायका की ओर से आयोजित तीन दिवसीय 10वीं राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।
बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस दौरान जायका के कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इससे राज्य को बेहद लाभ होगा। उन्होंने कहा कि वनों में आगजनी की घटना गंभीर मसला है। साथ ही नदियों का स्वरूप बचाए रखने की भी चुनौती है। कुमाऊं की कोसी और देहरादून की रिस्पना नदी सूखने की कगार पर हैं। इनको पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस दौरान वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से उत्तराखंड में संचालित जायका परियोजना उत्तराखंड के विकास और वनों के संरक्षण में मील का पत्थर साबित हो रही है। केंद्रीय वन मंत्रालय के निदेशक सिद्धांत दास ने कहा प्रजेंटेशन देकर बताया कि हिंदुस्तान में ग्रीन कवर एरिया मौजूदा समय में 24 प्रतिशत रह गया है, जबकि यह 33 प्रतिशत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में वनों पर ध्यान देकर ग्रीन कवर एरिया बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है।
उत्तराखंड में जायका परियोजना के मुख्य प्रतिनिधि टाकेमा साकामोटो सैन ने कहा कि जायका विश्व के 150 देशों में काम कर रही है, लेकिन भारत इनमें बड़े देश के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। जैव विविधता और पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखकर जायका उत्तराखंड को देश के अन्य राज्यों की तुलना में अग्रिम पंक्ति में लाना चाहती है। पलायन आयोग के उपाध्यक्ष शरद सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड के 71 प्रतिशत भू-भाग में वन क्षेत्र फैला है, जो कि सबसे ज्यादा वन क्षेत्र वाले इलाकों में से एक है। प्रमुख वन संरक्षक जयराज सिंह ने कहा कि राज्य में सात हजार से अधिक वन पंचायतों में जायका परियोजना चल रही है। 2013 की आपदा के बाद जायका ने उत्तराखंड को चुना था। कार्यशाला में देश के 13 राज्यों के 100 से अधिक वन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर जायका की ‘वॉलनट’ और ‘अवनत वनों का पारिस्थितिकीय सुधार’ पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
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ये भी रहे उपस्थित
कार्यशाला में क्षेत्रीय विधायक गणेश जोशी, विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, पूर्व वन महानिदेशक भारत सरकार डॉ. एसएस नेगी, अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह, परियोजना के प्रमुख निदेशक अनूप मलिक, मुख्य वन संरक्षक एवं परियोजना निदेशक डॉ. कपिल जोषी, परियोजना निदेशक एसएम जोषी, परियोजना सलाहकार एसके सिंह, मुख्य वन संरक्षक डॉ. राजेंद्र सिंह बिस्ट, वरिष्ठ प्रतिनिधि टोरू उमाची, डीएफओ मसूरी कहकशां नसीम आदि उपस्थित रहे।
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सीएम त्रिवेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार वनों के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए तत्पर है। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जायका) के सहयोग से वन संरक्षण की दिशा में उत्तराखंड, देशभर में नई मिसाल कायम करेगा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में कार्य कर रही जायका के सहयोग से जापानी तकनीक का उपयोग कर उत्तराखंड के वनों को समृद्ध बनाना और लोगों को उनकी मूल आजीविका से जोड़ने का काम बेहद सराहनीय है। बुधवार को सीएम ने यहां एक होटल के सभागार में जायका की ओर से आयोजित तीन दिवसीय 10वीं राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।
बतौर मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस दौरान जायका के कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इससे राज्य को बेहद लाभ होगा। उन्होंने कहा कि वनों में आगजनी की घटना गंभीर मसला है। साथ ही नदियों का स्वरूप बचाए रखने की भी चुनौती है। कुमाऊं की कोसी और देहरादून की रिस्पना नदी सूखने की कगार पर हैं। इनको पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस दौरान वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से उत्तराखंड में संचालित जायका परियोजना उत्तराखंड के विकास और वनों के संरक्षण में मील का पत्थर साबित हो रही है। केंद्रीय वन मंत्रालय के निदेशक सिद्धांत दास ने कहा प्रजेंटेशन देकर बताया कि हिंदुस्तान में ग्रीन कवर एरिया मौजूदा समय में 24 प्रतिशत रह गया है, जबकि यह 33 प्रतिशत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में वनों पर ध्यान देकर ग्रीन कवर एरिया बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है।
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उत्तराखंड में जायका परियोजना के मुख्य प्रतिनिधि टाकेमा साकामोटो सैन ने कहा कि जायका विश्व के 150 देशों में काम कर रही है, लेकिन भारत इनमें बड़े देश के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। जैव विविधता और पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखकर जायका उत्तराखंड को देश के अन्य राज्यों की तुलना में अग्रिम पंक्ति में लाना चाहती है। पलायन आयोग के उपाध्यक्ष शरद सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड के 71 प्रतिशत भू-भाग में वन क्षेत्र फैला है, जो कि सबसे ज्यादा वन क्षेत्र वाले इलाकों में से एक है। प्रमुख वन संरक्षक जयराज सिंह ने कहा कि राज्य में सात हजार से अधिक वन पंचायतों में जायका परियोजना चल रही है। 2013 की आपदा के बाद जायका ने उत्तराखंड को चुना था। कार्यशाला में देश के 13 राज्यों के 100 से अधिक वन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर जायका की ‘वॉलनट’ और ‘अवनत वनों का पारिस्थितिकीय सुधार’ पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
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ये भी रहे उपस्थित
कार्यशाला में क्षेत्रीय विधायक गणेश जोशी, विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, पूर्व वन महानिदेशक भारत सरकार डॉ. एसएस नेगी, अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह, परियोजना के प्रमुख निदेशक अनूप मलिक, मुख्य वन संरक्षक एवं परियोजना निदेशक डॉ. कपिल जोषी, परियोजना निदेशक एसएम जोषी, परियोजना सलाहकार एसके सिंह, मुख्य वन संरक्षक डॉ. राजेंद्र सिंह बिस्ट, वरिष्ठ प्रतिनिधि टोरू उमाची, डीएफओ मसूरी कहकशां नसीम आदि उपस्थित रहे।