{"_id":"5d2103228ebc3e6d057464eb","slug":"156244455214-dehradun-news37","type":"story","status":"publish","title_hn":"पर्यटन स्थलों पर बनाए जाएंगे बांस के अतिथिगृह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पर्यटन स्थलों पर बनाए जाएंगे बांस के अतिथिगृह
विज्ञापन
पर्यटन स्थलों पर बनाए जाएंगे बांस के अतिथिगृह
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राज्य के पर्यटन स्थलों में पर्यटकों को रहने की दिक्कत न हो, इसके लिए पर्यटन स्थलाें पर बांस से बने अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त अतिथिगृह बनाए जाएंगे। अतिथिगृहों के निर्माण की जिम्मेदारी उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद को सौंपी गई है। परिषद ने इस दिशा में काम करना भी शुरू कर दिया है। योजना के पहले चरण में धनोल्टी में 40 कमरे बनाए जा रहे हैं।
उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज चंद्रन ने बताया कि बंास से बनाए जा रहे अतिथिगृहों का मसौदा तैयार कर लिया गया है। पहले चरण में धनोल्टी में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त 40 कमरे बनाए जा रहे हैं। इन अतिथिगृहों को बनाए जाने के बाद इन्हें इको पार्क सोसायटी, स्वयं सहायता समूहों व महिला मंगल दलों को सौंप दिया जाएगा जो इसका संचालन करेंगे। 40 कमरों को बनाने के लिए 30 लाख रुपये की लागत आ रही है, जो बांस एवं रेशा विकास परिषद द्वारा वहन किया जाएगा। ज्ञात हो कि विकास परिषद की ओर से राज्य के पर्वतीय इलाकों में स्थित एक हजार स्कूलों में भी बांस के बने भूकंपरोधी, आपदारोधी कमरे बनाए जा रहे हैं।
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राज्य के पर्यटन स्थलों में पर्यटकों को रहने की दिक्कत न हो, इसके लिए पर्यटन स्थलाें पर बांस से बने अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त अतिथिगृह बनाए जाएंगे। अतिथिगृहों के निर्माण की जिम्मेदारी उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद को सौंपी गई है। परिषद ने इस दिशा में काम करना भी शुरू कर दिया है। योजना के पहले चरण में धनोल्टी में 40 कमरे बनाए जा रहे हैं।
उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज चंद्रन ने बताया कि बंास से बनाए जा रहे अतिथिगृहों का मसौदा तैयार कर लिया गया है। पहले चरण में धनोल्टी में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त 40 कमरे बनाए जा रहे हैं। इन अतिथिगृहों को बनाए जाने के बाद इन्हें इको पार्क सोसायटी, स्वयं सहायता समूहों व महिला मंगल दलों को सौंप दिया जाएगा जो इसका संचालन करेंगे। 40 कमरों को बनाने के लिए 30 लाख रुपये की लागत आ रही है, जो बांस एवं रेशा विकास परिषद द्वारा वहन किया जाएगा। ज्ञात हो कि विकास परिषद की ओर से राज्य के पर्वतीय इलाकों में स्थित एक हजार स्कूलों में भी बांस के बने भूकंपरोधी, आपदारोधी कमरे बनाए जा रहे हैं।
विज्ञापन