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दूसरे दिन भी ठप रही सीएचसी की ओपीडी, मरीजों की फजीहत

Sat, 29 Jun 2019 02:04 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jun 2019 02:04 AM IST
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दूसरे दिन भी ठप रही सीएचसी की ओपीडी, मरीजों की फजीहत
ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
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मानदेय भुगतान और संविदा नवीनीकरण की मांग के समर्थन में उपनल स्वास्थ्यकर्मियों का कार्य बहिष्कार दूसरे दिन भी जारी रहा। इससे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विकासनगर में ओपीडी का संचालन नहीं हुआ, जिससे मरीजों को फजीहत झेलनी पड़ी। हालांकि इस दौरान कुछ चिकित्सकों ने पुराने मरीजों का परीक्षण भी किया, लेकिन दवा काउंटर बंद रहने से मरीजों को दवाई नहीं मिल सकी। जबकि, पर्ची काउंटर बंद रहने से दूर दराज से आए मरीजों को बैरंग ही लौटना पड़ा।
सीएचसी विकासनगर की ओपीडी का संचालन पूरी तरह से उपनल स्वास्थ्यकर्मियों पर ही निर्भर है। यहां नियुक्त 32 पैरामेडिकल कर्मचारियों में से 28 कर्मी उपनल के माध्यम से तैनात हैं। उपनल कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सीएचसी की व्यवस्थाएं पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी हैं। यहां हर रोज करीब 600 की ओपीडी संचालित होती है, जिनमें से 400 के करीब नए मरीज आते हैं, लेकिन पिछले दो दिनों से दवा और पर्ची काउंटर बंद होने से नए मरीजों को उपचार नहीं मिल रहा है। वहीं, एक्सरे और पैथोलॉजी की सेवाएं भी ठप पड़ी हुई हैं।
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उधर, उपनल कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष अनिल गैरोला ने बताया कि मानदेय भुगतान को लेकर सकारात्मक कार्रवाई होने के बाद ही हड़ताल समाप्त की जाएगी।
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इनका कहना है कि....
- पिछले दो दिनों से बदन दर्द की शिकायत होने पर डाकपत्थर से सुबह आठ बजे ही अस्पताल में पहुंच गई थी। 10 बजे पता चला कि कर्मचारियों की हड़ताल है। इस कारण बिना उपचार के ही वापस जाना पड़ रहा है। - लीला देवी
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- बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलने की आस में ही यहां आए थे। अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि यहां हड़ताल है। निजी अस्पताल में उपचार के लायक पैसे नहीं होने के कारण बिना उपचार कराए ही वापस जाना पड़ रहा है। - विरेंद्र सिंह
- चकराता अस्पताल में संसाधनों की कमी होने पर बेटी को बेहतर उपचार की आस में विकासनगर आया था, लेकिन यहां अस्पताल में पर्ची नहीं बन रही है। कर्मचारी हड़ताल समाप्त होने के बाद आने की बात कह रहे हैं। - हरीश रतूड़ी

- बदन दर्द और बुखार की शिकायत होने पर चार दिन पहले डाकपत्थर से सीएचसी में उपचार के लिए आई थी। दवा समाप्त होने पर दोबारा डॉक्टर को दिखाने आई, लेकिन दवा काउंटर बंद होने से दवाई नहीं मिल रही है। - मंजू चौहान
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