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मां भगवती के नौ रूपों की महिमा बताई
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
सेलाकुई। हरिपुर के ग्राम देवता मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद् देवी भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास अनिल कृष्ण महाराज ने मां भगवती के नौ रूपों की महिमा से भक्तों को परिचित कराया। कथा में माता के भजनों की प्रस्तुतियों ने भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
अनिल कृष्ण ने कहा कि मां भगवती का पहला रूप शैलपुत्री के रूप में अवतरित हुआ। मां भगवती ने भगवान भोलेनाथ की कई वर्षों तक कठिन साधना की और भगवान शिव को प्राप्त किया। साथ ही अपने भक्तों को अभय दान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि पर्वतराज हिमालय को बेटी के रूप में साक्षात माता जगदंबा मिलीं, जिसे पाकर वह धन्य हो गए। इसके बाद उन्होंने ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धि धात्री स्वरूप की महिमा का विस्तार से वर्णन किया और भक्तों को माता के प्रत्येक स्वरूप की पूजा-अर्चना की सलाह दी।
अनिल कृष्ण ने कहा कि माता की पूजा करने से बुद्धि, शक्ति, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इस बीच कथा व्यास ने माता के भजन भी सुनाए। इस दौरान बलवीर सिंह गुसाईं, वीर सिंह रावत, राजेंद्र प्रसाद बलूनी, प्रेम सिंह गुसाईं, हेमंत सिंह नेगी, कुंदन सिंह नेगी, मोहर सिंह, विमला नेगी, अनीता गुसाईं, लीला देवी, चंद्र किशोर भट्ट आदि मौजूद रहे।
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सेलाकुई। हरिपुर के ग्राम देवता मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद् देवी भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास अनिल कृष्ण महाराज ने मां भगवती के नौ रूपों की महिमा से भक्तों को परिचित कराया। कथा में माता के भजनों की प्रस्तुतियों ने भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
अनिल कृष्ण ने कहा कि मां भगवती का पहला रूप शैलपुत्री के रूप में अवतरित हुआ। मां भगवती ने भगवान भोलेनाथ की कई वर्षों तक कठिन साधना की और भगवान शिव को प्राप्त किया। साथ ही अपने भक्तों को अभय दान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि पर्वतराज हिमालय को बेटी के रूप में साक्षात माता जगदंबा मिलीं, जिसे पाकर वह धन्य हो गए। इसके बाद उन्होंने ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धि धात्री स्वरूप की महिमा का विस्तार से वर्णन किया और भक्तों को माता के प्रत्येक स्वरूप की पूजा-अर्चना की सलाह दी।
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अनिल कृष्ण ने कहा कि माता की पूजा करने से बुद्धि, शक्ति, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इस बीच कथा व्यास ने माता के भजन भी सुनाए। इस दौरान बलवीर सिंह गुसाईं, वीर सिंह रावत, राजेंद्र प्रसाद बलूनी, प्रेम सिंह गुसाईं, हेमंत सिंह नेगी, कुंदन सिंह नेगी, मोहर सिंह, विमला नेगी, अनीता गुसाईं, लीला देवी, चंद्र किशोर भट्ट आदि मौजूद रहे।
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