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देव पालकियों के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
चकराता। सिमोग मंदिर से तीन देवताओं पालकी एक रात के प्रवास को देसेऊ गांव पहुंचने पर देव दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। हजारों पदयात्रियों के साथ गांव पहुंचीं देव पालकियों का देसेऊ के ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और खुशहाली की मन्नत मांगी। पालकी के साथ आए यात्रियों का भी फूल मालाओं से स्वागत किया गया।
जौनसार बावर में परिवार की खुशहाली बनी रहने के लिए देवताओं के चिह्नों, देव पालकियों को घर पर आमंत्रित करने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। सोमवार को देसेऊ गांव के लगनाण परिवार के मुखिया ने सिमोग मंदिर से शिलगुर, बिजट और चूड़ेश्वर महाराज की देव पालकियों के साथ हजारों पद यात्रियों को अपने घर रात्रि प्रवास पर आमंत्रित किया। सुबह देव लग्नानुसार तीनों देव पालकियां विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना कर मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकाली गईं, जिसके बाद पालकियों का देसेऊ के लिए प्रस्थान हुआ।
मंदिर समिति सिमोग के पुजारी मायाराम ने बताया कि सिमोग मंदिर से देव पालकियों के पद यात्रियों के साथ जाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। नंगे पांव पदयात्री देवताओं को शाही स्नान के साथ ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं। देव पालकियों के देसेऊ गांव पहुंचते ही ग्रामीण गांव की सीमा के बाहर पारंपरिक गाजे बाजों के साथ देवता के स्वागत के लिए खड़े थे। ग्रामीणों ने बारी बारी से देव पालकी को कांधा देकर गांव की सीमा के अंदर प्रवेश कराया, जहां से देव पालकी आमंत्रित करने वाले परिवार के सदस्य उन्हें अपने आवास पर ले गए। रात को ग्रामीण महिला व पुरुषों ने देवता के गीत गाने के साथ ही हारुल, तांदी, झैंता, रासों की शानदार प्रस्तुति दी और भंडारे में सामूहिक भोज किया।
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देवता के पुजारी ने बताया कि मंगलवार को देवता की पालकियां मूल मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगी। इस दौरान लगनाण परिवार के मुखिया बिशनदत्त शर्मा, खजान शर्मा, विद्यादत्त जोशी, विपिन, गुड्डू, चैतराम, सुनील, अनिल शर्मा, पंचराम शर्मा, श्याम दत्त, सूरत शर्मा, पूरण शर्मा, विजय शर्मा आदि मौजूद रहे।
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चकराता। सिमोग मंदिर से तीन देवताओं पालकी एक रात के प्रवास को देसेऊ गांव पहुंचने पर देव दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। हजारों पदयात्रियों के साथ गांव पहुंचीं देव पालकियों का देसेऊ के ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और खुशहाली की मन्नत मांगी। पालकी के साथ आए यात्रियों का भी फूल मालाओं से स्वागत किया गया।
जौनसार बावर में परिवार की खुशहाली बनी रहने के लिए देवताओं के चिह्नों, देव पालकियों को घर पर आमंत्रित करने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। सोमवार को देसेऊ गांव के लगनाण परिवार के मुखिया ने सिमोग मंदिर से शिलगुर, बिजट और चूड़ेश्वर महाराज की देव पालकियों के साथ हजारों पद यात्रियों को अपने घर रात्रि प्रवास पर आमंत्रित किया। सुबह देव लग्नानुसार तीनों देव पालकियां विधि विधान पूर्वक पूजा अर्चना कर मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकाली गईं, जिसके बाद पालकियों का देसेऊ के लिए प्रस्थान हुआ।
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मंदिर समिति सिमोग के पुजारी मायाराम ने बताया कि सिमोग मंदिर से देव पालकियों के पद यात्रियों के साथ जाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। नंगे पांव पदयात्री देवताओं को शाही स्नान के साथ ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं। देव पालकियों के देसेऊ गांव पहुंचते ही ग्रामीण गांव की सीमा के बाहर पारंपरिक गाजे बाजों के साथ देवता के स्वागत के लिए खड़े थे। ग्रामीणों ने बारी बारी से देव पालकी को कांधा देकर गांव की सीमा के अंदर प्रवेश कराया, जहां से देव पालकी आमंत्रित करने वाले परिवार के सदस्य उन्हें अपने आवास पर ले गए। रात को ग्रामीण महिला व पुरुषों ने देवता के गीत गाने के साथ ही हारुल, तांदी, झैंता, रासों की शानदार प्रस्तुति दी और भंडारे में सामूहिक भोज किया।
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देवता के पुजारी ने बताया कि मंगलवार को देवता की पालकियां मूल मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगी। इस दौरान लगनाण परिवार के मुखिया बिशनदत्त शर्मा, खजान शर्मा, विद्यादत्त जोशी, विपिन, गुड्डू, चैतराम, सुनील, अनिल शर्मा, पंचराम शर्मा, श्याम दत्त, सूरत शर्मा, पूरण शर्मा, विजय शर्मा आदि मौजूद रहे।