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राज्य में अब कई स्कूलों को मिलाकर होगा स्कूल कांप्लेक्स का गठन, नई राषट्रीय नीति की खबर
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2019 का मसौदा तैयार कर लिया है। इसके तहत सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए सभी राज्यों में जिलावार दस-दस स्कूलों का एक ‘स्कूल कॉम्प्लेक्स’ गठित किया जाएगा। इस कॉम्प्लेक्स को अधिकार दिए जाएंगे। इसे ही स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ानी होगी। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी होगी यही एक-दूसरे स्कूल से उपलब्ध कराएगा।
रविवार को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के डॉ. अंकित जोशी ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से तैयार किए गए मसौदे की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना को साल 2023 तक धरातल पर उतारा जाएगा। देश में ऐसे स्कूल जहां छात्र-छात्राओं की संख्या 20 से कम होगी ऐसे स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने पर ज्यादा फोकस रहेगा। ‘स्कूल कॉम्प्लेक्स’ योजना के तहत स्कूलों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर रहेगा। इस कॉम्प्लेक्स में प्राइमरी से लेकर इंटरमीडिएट तक के स्कूल शामिल होंगे। ‘स्कूल कॉम्प्लेक्स’ डेवलपमेंट कमेटियों का भी गठन किया जाएगा। इन कमेटियों को विशेष अधिकार दिए जाएंगे। इसमें शामिल स्कूल एक दूसरे स्कूलों के शैक्षणिक संसाधनों का इस्तेमाल भी कर सकेंगे। शैक्षणिक स्तर सुधारने के लिए ‘टीचर्स डेवलपमेंट प्लान’ लागू किया जाएगा।
स्टेट स्कूल रेगुलेटरी अथॉरिटी का भी होगा गठन
नई नीति के तहत सभी राज्यों में स्टेट स्कूल रेगुलेटरी अथारिटी भी गठित की जाएगी। यह अथॉरिटी शिक्षा से जुड़े सभी मसलों पर सुनवाई करने के साथ ही उनका निपटारा भी करेगी। नई नीति के प्रस्तावित मसौदे के तहत अब शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों की जगह अभिभावक स्कूलों की निगरानी करेेंगे और शिक्षा के उन्नयन को लेकर अहम सुझाव भी देंगे। अध्ययनरत कमजोर बच्चों के उन्नयन के लिए ‘नेशनल ट्यूटर प्रोग्राम’ भी चलाया जाएगा। शिक्षकों का भी नेशनल टीचर्स डाटा तैयार किया जाएगा।
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नई नीति के प्रस्तावित मसौदे के अहम बिंदु
1- शिक्षकों को केंद्र और राज्य सरकार के कार्यक्रमों में नहीं लगाया जाएगा।
2- नीति के तहत प्रधानाचार्र्यों और स्कूलों की जवाबदेही तय की जाएगी।
3- स्कूलों के औचक निरीक्षण की जगह सहयोग दिया जाएगा।
4- राज्यों के एससीईआरटी को और अधिक अधिकार दिए जाएंगे।
5-राज्यों में स्पेशल एजूकेशन जोन बनाए जाएंगे। जिसके गठन में दो तिहाई बजट केेंद्र मुहैया कराएगी।
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देहरादून। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2019 का मसौदा तैयार कर लिया है। इसके तहत सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए सभी राज्यों में जिलावार दस-दस स्कूलों का एक ‘स्कूल कॉम्प्लेक्स’ गठित किया जाएगा। इस कॉम्प्लेक्स को अधिकार दिए जाएंगे। इसे ही स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ानी होगी। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी होगी यही एक-दूसरे स्कूल से उपलब्ध कराएगा।
रविवार को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के डॉ. अंकित जोशी ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से तैयार किए गए मसौदे की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना को साल 2023 तक धरातल पर उतारा जाएगा। देश में ऐसे स्कूल जहां छात्र-छात्राओं की संख्या 20 से कम होगी ऐसे स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने पर ज्यादा फोकस रहेगा। ‘स्कूल कॉम्प्लेक्स’ योजना के तहत स्कूलों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर रहेगा। इस कॉम्प्लेक्स में प्राइमरी से लेकर इंटरमीडिएट तक के स्कूल शामिल होंगे। ‘स्कूल कॉम्प्लेक्स’ डेवलपमेंट कमेटियों का भी गठन किया जाएगा। इन कमेटियों को विशेष अधिकार दिए जाएंगे। इसमें शामिल स्कूल एक दूसरे स्कूलों के शैक्षणिक संसाधनों का इस्तेमाल भी कर सकेंगे। शैक्षणिक स्तर सुधारने के लिए ‘टीचर्स डेवलपमेंट प्लान’ लागू किया जाएगा।
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स्टेट स्कूल रेगुलेटरी अथॉरिटी का भी होगा गठन
नई नीति के तहत सभी राज्यों में स्टेट स्कूल रेगुलेटरी अथारिटी भी गठित की जाएगी। यह अथॉरिटी शिक्षा से जुड़े सभी मसलों पर सुनवाई करने के साथ ही उनका निपटारा भी करेगी। नई नीति के प्रस्तावित मसौदे के तहत अब शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों की जगह अभिभावक स्कूलों की निगरानी करेेंगे और शिक्षा के उन्नयन को लेकर अहम सुझाव भी देंगे। अध्ययनरत कमजोर बच्चों के उन्नयन के लिए ‘नेशनल ट्यूटर प्रोग्राम’ भी चलाया जाएगा। शिक्षकों का भी नेशनल टीचर्स डाटा तैयार किया जाएगा।
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नई नीति के प्रस्तावित मसौदे के अहम बिंदु
1- शिक्षकों को केंद्र और राज्य सरकार के कार्यक्रमों में नहीं लगाया जाएगा।
2- नीति के तहत प्रधानाचार्र्यों और स्कूलों की जवाबदेही तय की जाएगी।
3- स्कूलों के औचक निरीक्षण की जगह सहयोग दिया जाएगा।
4- राज्यों के एससीईआरटी को और अधिक अधिकार दिए जाएंगे।
5-राज्यों में स्पेशल एजूकेशन जोन बनाए जाएंगे। जिसके गठन में दो तिहाई बजट केेंद्र मुहैया कराएगी।