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रात्रि प्रवास पर ककाड़ी पधारीं देव पालकियां
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
साहिया। कालसी ब्लॉक के ककाड़ी गांव में रविवार को एक साथ पधारीं तीन देव पालकियों के दर्शन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। देव पालकियां जहां से भी गुजरीं, वहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मन्नत पूरी होने पर ककाड़ी निवासी धन सिंह बिष्ट ने कनबुआ गांव से शिलगुर और बिजट महाराज के साथ ही अपने गांव के ईष्ट देव की पालकी को रात्रि प्रवास पर आमंत्रित किया था।
जौनसार बावर परगने में धार्मिक मान्यता है कि देवताओं से मांगी गई मन्नत पूरी होने पर ग्रामीण एक रात के प्रवास पर देवता को अपने घर आमंत्रित करते हैं। इसी धार्मिक परंपरा के तहत कनबुआ मंदिर से दो देवताओं की पालकी और ककाड़ी मंदिर से एक देवता की पालकी धन सिंह बिष्ट के घर पहुंची। रविवार सुबह कनबुआ मंदिर से शिलगुर और बिजट महाराज की देव पालकी ने देवलग्नानुसार ककाड़ी के लिए प्रस्थान किया। ककाड़ी गांव के शिलगुर मंदिर में पहुंचने के बाद देव पालकियों को आमंत्रित करने वाले परिवार के सदस्यों ने कंधा देकर अपने आवास पर चलने का आग्रह किया। इसके बाद तीन देव पालकियां एक साथ उनके आवास पर पहुंची, जहां सैकड़ों ग्रामीणों ने देव दर्शन कर पुण्य कमाया और खुशहाली की मन्नत मांगी।
ग्रामीणों ने रात में देवता के गीत गाते हुए रात्रि जागरण किया। सोमवार सुबह पूजा-अर्चना के बाद देव पालकियां मूल मंदिरों को प्रस्थान करेंगी। देव पालकी के साथ यात्रा में पुजारी खुशीराम शर्मा, दाताराम पंवार, वजीर शांति सिंह पंवार, भंडारी संतन सिंह पंवार, सूरत सिंह पंवार, जवाहर सिंह बिष्ट, दयाराम बिष्ट, धन सिंह पंवार, खजान सिंह, नारायण सिंह, मुकेश पंवार, सियाराम शर्मा, गेंदाराम, विरेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, असाड़ सिंह, जालम सिंह, मायाराम, भगत सिंह आदि शामिल रहे।
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साहिया। कालसी ब्लॉक के ककाड़ी गांव में रविवार को एक साथ पधारीं तीन देव पालकियों के दर्शन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। देव पालकियां जहां से भी गुजरीं, वहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मन्नत पूरी होने पर ककाड़ी निवासी धन सिंह बिष्ट ने कनबुआ गांव से शिलगुर और बिजट महाराज के साथ ही अपने गांव के ईष्ट देव की पालकी को रात्रि प्रवास पर आमंत्रित किया था।
जौनसार बावर परगने में धार्मिक मान्यता है कि देवताओं से मांगी गई मन्नत पूरी होने पर ग्रामीण एक रात के प्रवास पर देवता को अपने घर आमंत्रित करते हैं। इसी धार्मिक परंपरा के तहत कनबुआ मंदिर से दो देवताओं की पालकी और ककाड़ी मंदिर से एक देवता की पालकी धन सिंह बिष्ट के घर पहुंची। रविवार सुबह कनबुआ मंदिर से शिलगुर और बिजट महाराज की देव पालकी ने देवलग्नानुसार ककाड़ी के लिए प्रस्थान किया। ककाड़ी गांव के शिलगुर मंदिर में पहुंचने के बाद देव पालकियों को आमंत्रित करने वाले परिवार के सदस्यों ने कंधा देकर अपने आवास पर चलने का आग्रह किया। इसके बाद तीन देव पालकियां एक साथ उनके आवास पर पहुंची, जहां सैकड़ों ग्रामीणों ने देव दर्शन कर पुण्य कमाया और खुशहाली की मन्नत मांगी।
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ग्रामीणों ने रात में देवता के गीत गाते हुए रात्रि जागरण किया। सोमवार सुबह पूजा-अर्चना के बाद देव पालकियां मूल मंदिरों को प्रस्थान करेंगी। देव पालकी के साथ यात्रा में पुजारी खुशीराम शर्मा, दाताराम पंवार, वजीर शांति सिंह पंवार, भंडारी संतन सिंह पंवार, सूरत सिंह पंवार, जवाहर सिंह बिष्ट, दयाराम बिष्ट, धन सिंह पंवार, खजान सिंह, नारायण सिंह, मुकेश पंवार, सियाराम शर्मा, गेंदाराम, विरेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, असाड़ सिंह, जालम सिंह, मायाराम, भगत सिंह आदि शामिल रहे।
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