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21 हजार दाखिल खारिज लटके, न घर बन रहे न मिल रहा लोन
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राजधानी में घर बनाने का सपना संजोए लोगों के सामने लेखपालों का बहिष्कार रोड़ा बन गया है। लोगों ने जमीन तो खरीद ली, लेकिन लेखपालों के बहिष्कार के कारण जमीन का दाखिल खारिज न होने से बैंक लोन नहीं पास कर रहे हैं। इसके अलावा एमडीडीए नक्शा भी नहीं पास कर रहा है।
लेखपाल पूरे प्रदेश में दाखिल खारिज कार्य का बहिष्कार कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा असर देहरादून जनपद में पड़ रहा है। अकेले देहरादून में ही दाखिल खारिज के लगभग 21 हजार मामले अटके हुए हैं। बिना दाखिल खारिज के एमडीडीए भूमि विशेष पर नक्शा भी पास नहीं करता है। ऐसे में जब नक्शा पास नहीं होगा तो बैंक भी लोन स्वीकृत नहीं करते हैं। इसके अलावा हरिद्वार में लगभग 20 हजार, ऊधमसिंहनगर में लगभग 17 हजार और नैनीताल में तकरीबन चार हजार दाखिल खारिज हटके हुए हैं। उत्तराखंड लेखपाल संघ के अध्यक्ष ताराचंद घिल्डियाल ने बताया कि जब तक सरकार उनकी मांगे मानकर एसआईटी पर नकेल नहीं कसती है तब तक उनका आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा।
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राजधानी में घर बनाने का सपना संजोए लोगों के सामने लेखपालों का बहिष्कार रोड़ा बन गया है। लोगों ने जमीन तो खरीद ली, लेकिन लेखपालों के बहिष्कार के कारण जमीन का दाखिल खारिज न होने से बैंक लोन नहीं पास कर रहे हैं। इसके अलावा एमडीडीए नक्शा भी नहीं पास कर रहा है।
लेखपाल पूरे प्रदेश में दाखिल खारिज कार्य का बहिष्कार कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा असर देहरादून जनपद में पड़ रहा है। अकेले देहरादून में ही दाखिल खारिज के लगभग 21 हजार मामले अटके हुए हैं। बिना दाखिल खारिज के एमडीडीए भूमि विशेष पर नक्शा भी पास नहीं करता है। ऐसे में जब नक्शा पास नहीं होगा तो बैंक भी लोन स्वीकृत नहीं करते हैं। इसके अलावा हरिद्वार में लगभग 20 हजार, ऊधमसिंहनगर में लगभग 17 हजार और नैनीताल में तकरीबन चार हजार दाखिल खारिज हटके हुए हैं। उत्तराखंड लेखपाल संघ के अध्यक्ष ताराचंद घिल्डियाल ने बताया कि जब तक सरकार उनकी मांगे मानकर एसआईटी पर नकेल नहीं कसती है तब तक उनका आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा।
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