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12 साल बाद ककाड़ी पहुंचे शिलगुर देवता
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ब्यूरो,अमर उजाला/विकासनगर
साहिया। बारह साल बाद ककाड़ी गांव में जागड़े में शिलगुर देवता के दर्शन के लिए पथराई आंखें बृहस्पतिवार को देव दर्शन के बाद खुशियों से भर आईं। देवता के जागड़े में हजारों श्रद्धालुुओं ने देव दर्शन कर पुण्य कमाया। मंदिर समिति की ओर से आयोजित भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार शिलगुर देवता 12 वर्ष में एक बार हरिद्वार और एक बार हिमाचल प्रदेश के चूड़धार में शाही स्नान को जाते हैं। तीन माह पूर्व हरिद्वार से शाही स्नान कर लौटे देवता 11 जून को चूड़धार शाही स्नान को रवाना हुए थे। तीन दिन की पदयात्रा के बाद बृहस्पतिवार को देवता के वापस लौटने पर जागड़ा पर्व मनाया गया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ जैसे ही देव पालकी ने गांव में प्रवेश किया तो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के सिर श्रद्धा से झुक गए। लाल व सफेद रंगों की पताकाओं के साथ देव पालकी ककाड़ी गांव के मंदिर परिसर पहुंची तो हजारों श्रद्धालु भी मंदिर परिसर में पहुंच गए। ग्रामीणों ने विधि विधान से देव पूजन कर खुशहाली की मन्नत मांगी। देर शाम तक मंदिर परिसर शिलगुर देवता के जयकारों से गूंजता रहा।
इस दौरान पुजारी खुशीराम शर्मा, बजीर दयाराम बिष्ट, भंडारी जवाहर सिंह, ग्राम प्रधान राधा देवी, दलीप सिंह बिष्ट, प्रताप सिंह बिष्ट, सियाराम शर्मा, खजान सिंह पंवार, भगत सिंह बिष्ट, सरदार सिंह बिष्ट, अंतराम बिष्ट, सुल्तान सिंह, पूरण सिंह, जयपाल सिंह, खजान सिंह, जीत सिंह, जालम सिंह आदि मौजूद रहे।
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साहिया। बारह साल बाद ककाड़ी गांव में जागड़े में शिलगुर देवता के दर्शन के लिए पथराई आंखें बृहस्पतिवार को देव दर्शन के बाद खुशियों से भर आईं। देवता के जागड़े में हजारों श्रद्धालुुओं ने देव दर्शन कर पुण्य कमाया। मंदिर समिति की ओर से आयोजित भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार शिलगुर देवता 12 वर्ष में एक बार हरिद्वार और एक बार हिमाचल प्रदेश के चूड़धार में शाही स्नान को जाते हैं। तीन माह पूर्व हरिद्वार से शाही स्नान कर लौटे देवता 11 जून को चूड़धार शाही स्नान को रवाना हुए थे। तीन दिन की पदयात्रा के बाद बृहस्पतिवार को देवता के वापस लौटने पर जागड़ा पर्व मनाया गया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ जैसे ही देव पालकी ने गांव में प्रवेश किया तो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के सिर श्रद्धा से झुक गए। लाल व सफेद रंगों की पताकाओं के साथ देव पालकी ककाड़ी गांव के मंदिर परिसर पहुंची तो हजारों श्रद्धालु भी मंदिर परिसर में पहुंच गए। ग्रामीणों ने विधि विधान से देव पूजन कर खुशहाली की मन्नत मांगी। देर शाम तक मंदिर परिसर शिलगुर देवता के जयकारों से गूंजता रहा।
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इस दौरान पुजारी खुशीराम शर्मा, बजीर दयाराम बिष्ट, भंडारी जवाहर सिंह, ग्राम प्रधान राधा देवी, दलीप सिंह बिष्ट, प्रताप सिंह बिष्ट, सियाराम शर्मा, खजान सिंह पंवार, भगत सिंह बिष्ट, सरदार सिंह बिष्ट, अंतराम बिष्ट, सुल्तान सिंह, पूरण सिंह, जयपाल सिंह, खजान सिंह, जीत सिंह, जालम सिंह आदि मौजूद रहे।
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