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साल दर साल खतरनाक हो रहा प्रदूषण चिंता का विषय : सीएम
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साल दर साल खतरनाक हो रहा प्रदूषण चिंता का विषय : सीएम
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। विश्व पर्यावरण दिवस पर वन विभाग समेत कई विभागों, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संगठनों की ओर से कार्यक्रम हुए। जिसमें विशेषज्ञों, वक्ताओं ने देश-दुनिया में साल दर साल खतरनाक हो रहे प्रदूषण पर चिंता जताई। मुख्य कार्यक्रम वन विभाग की ओर से होटल पैसेफिक में आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री और वन मंत्री ने प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताते हुए लोगोें को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई।
इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भारतीय संस्कृति अरण्य (वनों) की संस्कृति रही है। भारत में पर्यावरण के प्रति लोगों में काफी पहले से चेतना का संचार हो गया था। 300 साल पहले राजस्थान में पेड़ों की रक्षा के लिए चिपको आंदोलन शुरू हुआ था, जिसमें महल बनाने के लिए पेड़ काटे जाने के विरोध पर 450 लोगाें को राजा के आदेश पर मार डाला गया था, उनमें कई महिलाएं भी थीं। उत्तराखंड में भी गौरा देवी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए चिपको आंदोलन शुरू किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण पूरी दुनिया में चिंता का विषय बना हुआ है। प्रदूषण के चलते दुनियाभर में लाखों लोग जान गंवा रहे हैं।
कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। पिछले साल रिस्पना व कोसी नदी पर वृहद स्तर पर पौधारोपण किया गया। नए बांधों व झीलों के निर्माण की दिशा में सरकार काम कर रही है। सूर्यधार, सौंग व मलढ़ूग बांध बनाए जा रहे हैं। इन परियोजनाआें के पूरा होने से आने वाले समय में दून घाटी में जलसंकट से निपटा जा सकेगा। पौड़ी, गैरसैंण अल्मोड़ा आदि जगहों पर झीलें बनाई जा रही हैं। आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ पर्यावरण व पानी उपलब्ध हो, इसके लिए हमें जल स्रोतों के पुनर्जीवीकरण की दिशा में भी विशेष ध्यान देना होगा। वर्षा के जल का संरक्षण करना जरूरी है। पर्यावरण संरक्षण के लिए जन सहभागिता का होना अति आवश्यक है।
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वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए विश्वव्यापी पहल जरूरी है। भारत जैव विविधता वाला देश है। देश की जैव विविधता में 28 प्रतिशत योगदान उत्तराखंड का है।
मेयर सुनील उनियाल गामा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण व स्वच्छता के लिए सबको प्रतिदिन समय देना जरूरी चाहिए। शहर को स्वच्छ रखने में सबका सहयोग जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले पॉलिथीन का बहिष्कार करना होगा।
कार्यक्रम में विधायक खजान दास, पूर्व राज्यसभा सदस्य तरुण विजय, पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी, प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण आनंदवर्द्धन, प्रमुख वन संरक्षक जयराज समेत कई लोगों ने संबोधित किया। कार्यक्रम में पीसीसीएफ समीर सिन्हा, एपीसीसीएफ जेएस सुहाग, मुख्य वन संरक्षक जीएस पांडे, मुख्य वन संरक्षक पीके सिंह, वन संरक्षक पीके पात्रो, डीएफओ देहरादून राजीव धीमान समेत वन विभाग के तमाम अधिकारी उपस्थित थे।
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पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने नंदा देवी राजजात यात्रा निकालने के साथ ही रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। गायिका सोनिया आनंद रावत ने गीतों के जरिये पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
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मुख्यमंत्री ने किया पौधारोपण
विश्व पर्यावरण दिवस पर सीएम त्रिवेेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास परिसर में पौधारोपण किया। साथ ही पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय व मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी पौधारोपण किया।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। विश्व पर्यावरण दिवस पर वन विभाग समेत कई विभागों, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संगठनों की ओर से कार्यक्रम हुए। जिसमें विशेषज्ञों, वक्ताओं ने देश-दुनिया में साल दर साल खतरनाक हो रहे प्रदूषण पर चिंता जताई। मुख्य कार्यक्रम वन विभाग की ओर से होटल पैसेफिक में आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री और वन मंत्री ने प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताते हुए लोगोें को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई।
इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भारतीय संस्कृति अरण्य (वनों) की संस्कृति रही है। भारत में पर्यावरण के प्रति लोगों में काफी पहले से चेतना का संचार हो गया था। 300 साल पहले राजस्थान में पेड़ों की रक्षा के लिए चिपको आंदोलन शुरू हुआ था, जिसमें महल बनाने के लिए पेड़ काटे जाने के विरोध पर 450 लोगाें को राजा के आदेश पर मार डाला गया था, उनमें कई महिलाएं भी थीं। उत्तराखंड में भी गौरा देवी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए चिपको आंदोलन शुरू किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण पूरी दुनिया में चिंता का विषय बना हुआ है। प्रदूषण के चलते दुनियाभर में लाखों लोग जान गंवा रहे हैं।
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कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। पिछले साल रिस्पना व कोसी नदी पर वृहद स्तर पर पौधारोपण किया गया। नए बांधों व झीलों के निर्माण की दिशा में सरकार काम कर रही है। सूर्यधार, सौंग व मलढ़ूग बांध बनाए जा रहे हैं। इन परियोजनाआें के पूरा होने से आने वाले समय में दून घाटी में जलसंकट से निपटा जा सकेगा। पौड़ी, गैरसैंण अल्मोड़ा आदि जगहों पर झीलें बनाई जा रही हैं। आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ पर्यावरण व पानी उपलब्ध हो, इसके लिए हमें जल स्रोतों के पुनर्जीवीकरण की दिशा में भी विशेष ध्यान देना होगा। वर्षा के जल का संरक्षण करना जरूरी है। पर्यावरण संरक्षण के लिए जन सहभागिता का होना अति आवश्यक है।
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वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए विश्वव्यापी पहल जरूरी है। भारत जैव विविधता वाला देश है। देश की जैव विविधता में 28 प्रतिशत योगदान उत्तराखंड का है।
मेयर सुनील उनियाल गामा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण व स्वच्छता के लिए सबको प्रतिदिन समय देना जरूरी चाहिए। शहर को स्वच्छ रखने में सबका सहयोग जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले पॉलिथीन का बहिष्कार करना होगा।
कार्यक्रम में विधायक खजान दास, पूर्व राज्यसभा सदस्य तरुण विजय, पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी, प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण आनंदवर्द्धन, प्रमुख वन संरक्षक जयराज समेत कई लोगों ने संबोधित किया। कार्यक्रम में पीसीसीएफ समीर सिन्हा, एपीसीसीएफ जेएस सुहाग, मुख्य वन संरक्षक जीएस पांडे, मुख्य वन संरक्षक पीके सिंह, वन संरक्षक पीके पात्रो, डीएफओ देहरादून राजीव धीमान समेत वन विभाग के तमाम अधिकारी उपस्थित थे।
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पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने नंदा देवी राजजात यात्रा निकालने के साथ ही रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। गायिका सोनिया आनंद रावत ने गीतों के जरिये पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
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मुख्यमंत्री ने किया पौधारोपण
विश्व पर्यावरण दिवस पर सीएम त्रिवेेंद्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास परिसर में पौधारोपण किया। साथ ही पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय व मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी पौधारोपण किया।