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गौरेया के संरक्षण के लिए नौनिहालों को किया प्रेरित
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
डांडा जीवनगढ़ स्थित विकास निकेतन स्कूल के नौनिहालों को शुक्रवार को गौरेया संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। विद्यालय की सह प्रबंधक मोहिनी नौटियाल ने गौरेया का महत्व बताते हुए शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को उसके संरक्षण के लिए उचित उपाय करने को जागरूक किया।
उन्होंने कहा कि शहरीकरण, गांवों का बदलता स्वरूप, कृषि में रासायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों का प्रयोग गौरेया के अस्तित्व पर संकट का कारण बन गया है। बावजूद इसके प्रकृति ने हर जीव को विपरीत परिस्थितियों में जिंदा रहने की काबिलियत दी है। उन्होंने बताया कि गौरेया के संरक्षण के लिए घरों में सुरक्षित स्थानों पर लकड़ी, मिट्टी के घोंसले बनाकर लटकाए जा सकते हैं। इसके अलावा पानी और अनाज के साथ पके हुए अन्न का बिखराव कर गौरेया को दोबारा अपने घर-आंगन में बुला सकते हैं।
प्रधानाचार्य शैलेश सागर ने कहा कि गौरेया की चहक गुम करने के लिए भी हम ही जिम्मेदार हैं। लिहाजा उसके अस्तित्व को बचाना प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है। छात्रों ने गौरेया के लिए घोंसले बनाकर अपने घरों में रखने के साथ ही आसपास के लोगों को भी इसके संरक्षण के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। इस दौरान सोनू महार, प्रियंका चौहान, शीतल शर्मा, मंजू, पूजा, पारुल पाल, कांता, प्रेरणा, निशि, प्रियंका कश्यप आदि मौजूद रहे।
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डांडा जीवनगढ़ स्थित विकास निकेतन स्कूल के नौनिहालों को शुक्रवार को गौरेया संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। विद्यालय की सह प्रबंधक मोहिनी नौटियाल ने गौरेया का महत्व बताते हुए शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को उसके संरक्षण के लिए उचित उपाय करने को जागरूक किया।
उन्होंने कहा कि शहरीकरण, गांवों का बदलता स्वरूप, कृषि में रासायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों का प्रयोग गौरेया के अस्तित्व पर संकट का कारण बन गया है। बावजूद इसके प्रकृति ने हर जीव को विपरीत परिस्थितियों में जिंदा रहने की काबिलियत दी है। उन्होंने बताया कि गौरेया के संरक्षण के लिए घरों में सुरक्षित स्थानों पर लकड़ी, मिट्टी के घोंसले बनाकर लटकाए जा सकते हैं। इसके अलावा पानी और अनाज के साथ पके हुए अन्न का बिखराव कर गौरेया को दोबारा अपने घर-आंगन में बुला सकते हैं।
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प्रधानाचार्य शैलेश सागर ने कहा कि गौरेया की चहक गुम करने के लिए भी हम ही जिम्मेदार हैं। लिहाजा उसके अस्तित्व को बचाना प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है। छात्रों ने गौरेया के लिए घोंसले बनाकर अपने घरों में रखने के साथ ही आसपास के लोगों को भी इसके संरक्षण के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। इस दौरान सोनू महार, प्रियंका चौहान, शीतल शर्मा, मंजू, पूजा, पारुल पाल, कांता, प्रेरणा, निशि, प्रियंका कश्यप आदि मौजूद रहे।
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