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भोजनमाता संगठन ने की दस आकस्मिक अवकाश की मांग
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
भोजनमाता संगठन की राजकीय प्राथमिक विद्यालय हरबर्टपुर में बैठक संपन्न हुई। बैठक में संगठन ने प्रदेश सरकार से सालभर में दस आकस्मिक अवकाश दिए जाने की मांग की। बैठक के बाद भोजनमाताओं को दी गई वर्दी के लिए लोगो वितरित किया गया।
संगठन की प्रदेश अध्यक्ष उषा देवी ने कहा कि प्रदेशभर के शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में करीब 30 हजार भोजनमाताएं अपनी सेवा दे रही हैं। नियुक्ति के बाद से ही अल्प मानदेय पर कार्य करने वाली भोजनमाताओं की सरकारी स्तर पर लगातार उपेक्षा हो रही है। कहा कि विद्यालयों में एमडीएम जैसी महत्वपूर्ण योजना के संचालन का जिम्मा संभालने के बावजूद भोजनमाताओं का मानदेय नहीं बढ़ाया जा रहा है, जबकि संगठन पिछले लंबे समय से प्रतिमाह छह हजार रुपये मानदेय के साथ ही साल भर में दस आकस्मिक अवकाश की मांग कर रहा है। बैठक में मौजूद पछवादून विकास मंच के संयोजक अतुल शर्मा ने कहा कि विद्यालयों में छात्र संख्या कम होने पर भोजनमाता की सेवा समाप्त नहीं होनी चाहिए।
इस दौरान निर्मला खत्री, बीना, लक्ष्मी, इंद्रा, दीपा, रोशनी, बबीता, सरला, ममता, संतोष, बाला, संजी, पुष्पा आदि मौजूद रहीं।
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भोजनमाता संगठन की राजकीय प्राथमिक विद्यालय हरबर्टपुर में बैठक संपन्न हुई। बैठक में संगठन ने प्रदेश सरकार से सालभर में दस आकस्मिक अवकाश दिए जाने की मांग की। बैठक के बाद भोजनमाताओं को दी गई वर्दी के लिए लोगो वितरित किया गया।
संगठन की प्रदेश अध्यक्ष उषा देवी ने कहा कि प्रदेशभर के शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में करीब 30 हजार भोजनमाताएं अपनी सेवा दे रही हैं। नियुक्ति के बाद से ही अल्प मानदेय पर कार्य करने वाली भोजनमाताओं की सरकारी स्तर पर लगातार उपेक्षा हो रही है। कहा कि विद्यालयों में एमडीएम जैसी महत्वपूर्ण योजना के संचालन का जिम्मा संभालने के बावजूद भोजनमाताओं का मानदेय नहीं बढ़ाया जा रहा है, जबकि संगठन पिछले लंबे समय से प्रतिमाह छह हजार रुपये मानदेय के साथ ही साल भर में दस आकस्मिक अवकाश की मांग कर रहा है। बैठक में मौजूद पछवादून विकास मंच के संयोजक अतुल शर्मा ने कहा कि विद्यालयों में छात्र संख्या कम होने पर भोजनमाता की सेवा समाप्त नहीं होनी चाहिए।
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इस दौरान निर्मला खत्री, बीना, लक्ष्मी, इंद्रा, दीपा, रोशनी, बबीता, सरला, ममता, संतोष, बाला, संजी, पुष्पा आदि मौजूद रहीं।