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छात्रों ने दी लोकनृत्यों की प्रस्तुति
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प्रतीकात्मक तस्वीर
ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
वीर शहीद केसरी चंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर के बीएड विभाग में शुक्रवार को ‘नाट्य कला एवं संस्कृति’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के समापन पर छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक लोकगीत और लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां दीं।
कार्यशाला में आकाशवाणी केंद्र नजीबाबाद की पूर्व संगीत निर्देशक डॉ. माधुरी बड़थ्वाल ने छात्र-छात्राओं को लोक संस्कृति और नाट्य कला के विभिन्न पहलुओं से रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी संस्कृति की नकल के कारण युवा पीढ़ी अपनी मूल संस्कृति से विमुख हो रही है। कहा कि किसी भी समाज की लोक संस्कृति में वहां के रीति रिवाज और परंपराएं समाहित होती हैं। इन्हीं परंपराओं की झलक उस समाज के लोकगीतों, गीत नाटिकाओं और एतिहासिक नाटकों में मिलती है। उन्होंने कई लोक कलाओं की प्रस्तुति देकर छात्र-छात्राओं को अपनी लोक संस्कृति से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।
बीएड विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रुचि बहुखंडी ने कहा कि लोक विधाएं जीवन को अनुशासित और शुचितापूर्ण जीने के तरीके बतातीं हैं। क्षेत्र विशेष की लोक विधाएं उस क्षेत्र का इतिहास बताने के साथ ही भविष्य की राह दिखातीं हैं। इस दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. केएल बिष्ट, डॉ. सत्येंद्र, डॉ. विधि ढौंढियाल, कविता बडोला, विमल डबराल आदि मौजूद रहे।
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वीर शहीद केसरी चंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर के बीएड विभाग में शुक्रवार को ‘नाट्य कला एवं संस्कृति’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के समापन पर छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक लोकगीत और लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां दीं।
कार्यशाला में आकाशवाणी केंद्र नजीबाबाद की पूर्व संगीत निर्देशक डॉ. माधुरी बड़थ्वाल ने छात्र-छात्राओं को लोक संस्कृति और नाट्य कला के विभिन्न पहलुओं से रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी संस्कृति की नकल के कारण युवा पीढ़ी अपनी मूल संस्कृति से विमुख हो रही है। कहा कि किसी भी समाज की लोक संस्कृति में वहां के रीति रिवाज और परंपराएं समाहित होती हैं। इन्हीं परंपराओं की झलक उस समाज के लोकगीतों, गीत नाटिकाओं और एतिहासिक नाटकों में मिलती है। उन्होंने कई लोक कलाओं की प्रस्तुति देकर छात्र-छात्राओं को अपनी लोक संस्कृति से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।
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बीएड विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रुचि बहुखंडी ने कहा कि लोक विधाएं जीवन को अनुशासित और शुचितापूर्ण जीने के तरीके बतातीं हैं। क्षेत्र विशेष की लोक विधाएं उस क्षेत्र का इतिहास बताने के साथ ही भविष्य की राह दिखातीं हैं। इस दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. केएल बिष्ट, डॉ. सत्येंद्र, डॉ. विधि ढौंढियाल, कविता बडोला, विमल डबराल आदि मौजूद रहे।
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