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कई टरबाइनें बंद, पंजाब व अन्य स्त्रोतों से लेनी पड़ रही बिजली
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- क्षेत्र में बर्फबारी के बाद जल विद्युत गृहों में पानी का डिस्चार्ज कम होने से बनी समस्या
- छबरो, खोदरी, ढकरानी, ढालीपुर और कुल्हाल पावर हाउस में बिजली उत्पादन प्रभावित
बिशन सिंह बोरा
विकासनगर। जौनसार बावर और पछवादून क्षेत्र में बर्फबारी के बाद जल विद्युत गृहों में पानी का डिस्चार्ज कम होने से कई टरबाइनें बंद हो गईं हैं। इससे बिजली उत्पादन में 70 फीसदी से अधिक की कमी दर्ज की गई है। छिबरो, खोदरी, ढकरानी, ढालीपुर और कुल्हाल पावर हाउस की 50 फीसदी से अधिक टरबाइनें बंद होने से बिजली उत्पादन में आई गिरावट के कारण प्रदेश में हर रोज 36 मिलियन यूनिट बिजली पंजाब और अन्य स्रोतों से लेनी पड़ रही है।
प्रदेश के 240 मेगावाट के भूमिगत पावर हाउस छिबरों में 60 मेगावाट की चार टरबाइनें हैं। इससे बरसात और गर्मियों में दो सौ मेगावाट से अधिक का उत्पादन होता है। जबकि, 120 मेगावाट के खोदरी जल विद्युत गृह में तीस-तीस मेगावाट की चार, 33.75 मेगावाट क्षमता के ढकरानी पावर हाउस में 11.25 मेगावाट की तीन, ढालीपुर पावर हाउस में 17 मेगावाट की तीन और कुल्हाल में दस-दस मेगावाट की तीन टरबाइनों से विद्युत उत्पादन होता है। लेकिन, सर्दी तेज होते ही डिस्चार्ज कम होने से विद्युत उत्पादन में भारी गिरावट आ गई है। यूपीसीएल के मुख्य अभियंता एके सिंह के मुताबिक इन दिनों हर रोज 36 एमयू (मिलियन यूनिट) बिजली अन्य स्रोतों से लेनी पड़ रही है। यूजेवीएनएल यमुनाघाटी के महाप्रबंधक इरशाद अली के मुताबिक पछवादून के पांचों पावर हाउसों से इन दिनों मुश्किल से 25 से 30 फीसदी बिजली का उत्पादन हो रहा है। ढकरानी पावर हाउस के अधिशासी अभियंता सुखजीत सिंह ने बताया कि टरबाइनों को चलाने के लिए पहले पानी एकत्र किया जा रहा है। उसके बाद चार घंटे सुबह और चार घंटे शाम को 11.25 मेगावाट की तीन में से दो टरबाइनें चलाई जा रहीं हैं।
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इन स्त्रोतों से ली जा रही बिजली
उत्तराखंड में हर रोज पंजाब से सात, केंद्रीय स्रोतों से 11, गैस उत्पादन से चार, सोलर प्लांट से पांच, शुगर मिल से दशमलव पांच और यूजेवीएनएल से आठ मिलियन यूनिट बिजली ली जा रही है। ताकि, सर्दी के मौसम में बिजली की बढ़ती खपत को पूरा किया जा सके।
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250 गांवों में दूसरे दिन भी छाया रहा अंधेरा
- चकराता, साहिया और विकासनगर में घंटों ठप रही विद्युत आपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
चकराता/विकासनगर। बर्फबारी और बारिश से लाइनें क्षतिग्रस्त होने से जौनसार बावर और पछवादून के 250 से अधिक गांवों में बुधवार को दूसरे दिन भी अंधेरा छाया रहा। 33 केवी लाइन में खराबी आने से छावनी बाजार चकराता में नौ घंटे बिजली बंद रही। सुबह पांच बजे बंद हुई विद्युत आपूर्ति दोपहर दो बजे सुचारु हो पाई। वहीं, विकासनगर में भी पूरे दिन बिजली की आंख मिचोली जारी रही।
जौनसार बावर के मोहना, सावरा, सुजऊ, बुरास्वा, लोखंडी, लोहारी चकराता, साहिया, त्यूनी, कोरवा, कोटि, लांघापोखरी, ग्वासापुल, पुरोड़ी, लालकुर्ती, आलूमंडी, भंगार, क्वासी, गोराघाटी, जाड़ी, सूजउ, कन्धाड, सिजला, कुन्ना, मंझगांव, संमोग, सतोली, मेहरावना, रावना, जोगियों सहित 250 से अधिक गांव, कस्बे और मजरों में दूसरे दिन भी अंधेरा छाया रहा। चकराता कैंट क्षेत्र को छोड़कर अधिकतर गांवों में विद्युत आपूर्ति सुचारु नहीं हो पायी है। स्थानीय निवासी राजेंद्र सिंह, केशर, पंकज आदि का कहना है कि विद्युत आपूर्ति सुचारु नहीं होने से लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। -----
33 केवी लाइन में फाल्ट आया था, जिसे ठीक कर दिया गया है। लेकिन, भारी बर्फबारी से जगह-जगह लाइनें टूट जाने से समस्या बनी है। बर्फबारी से सभी मार्ग बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में मरम्मत कार्य नहीं हो पा रहा है।
- अशोक कुमार, एसडीओ चकराता
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- छबरो, खोदरी, ढकरानी, ढालीपुर और कुल्हाल पावर हाउस में बिजली उत्पादन प्रभावित
बिशन सिंह बोरा
विकासनगर। जौनसार बावर और पछवादून क्षेत्र में बर्फबारी के बाद जल विद्युत गृहों में पानी का डिस्चार्ज कम होने से कई टरबाइनें बंद हो गईं हैं। इससे बिजली उत्पादन में 70 फीसदी से अधिक की कमी दर्ज की गई है। छिबरो, खोदरी, ढकरानी, ढालीपुर और कुल्हाल पावर हाउस की 50 फीसदी से अधिक टरबाइनें बंद होने से बिजली उत्पादन में आई गिरावट के कारण प्रदेश में हर रोज 36 मिलियन यूनिट बिजली पंजाब और अन्य स्रोतों से लेनी पड़ रही है।
प्रदेश के 240 मेगावाट के भूमिगत पावर हाउस छिबरों में 60 मेगावाट की चार टरबाइनें हैं। इससे बरसात और गर्मियों में दो सौ मेगावाट से अधिक का उत्पादन होता है। जबकि, 120 मेगावाट के खोदरी जल विद्युत गृह में तीस-तीस मेगावाट की चार, 33.75 मेगावाट क्षमता के ढकरानी पावर हाउस में 11.25 मेगावाट की तीन, ढालीपुर पावर हाउस में 17 मेगावाट की तीन और कुल्हाल में दस-दस मेगावाट की तीन टरबाइनों से विद्युत उत्पादन होता है। लेकिन, सर्दी तेज होते ही डिस्चार्ज कम होने से विद्युत उत्पादन में भारी गिरावट आ गई है। यूपीसीएल के मुख्य अभियंता एके सिंह के मुताबिक इन दिनों हर रोज 36 एमयू (मिलियन यूनिट) बिजली अन्य स्रोतों से लेनी पड़ रही है। यूजेवीएनएल यमुनाघाटी के महाप्रबंधक इरशाद अली के मुताबिक पछवादून के पांचों पावर हाउसों से इन दिनों मुश्किल से 25 से 30 फीसदी बिजली का उत्पादन हो रहा है। ढकरानी पावर हाउस के अधिशासी अभियंता सुखजीत सिंह ने बताया कि टरबाइनों को चलाने के लिए पहले पानी एकत्र किया जा रहा है। उसके बाद चार घंटे सुबह और चार घंटे शाम को 11.25 मेगावाट की तीन में से दो टरबाइनें चलाई जा रहीं हैं।
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इन स्त्रोतों से ली जा रही बिजली
उत्तराखंड में हर रोज पंजाब से सात, केंद्रीय स्रोतों से 11, गैस उत्पादन से चार, सोलर प्लांट से पांच, शुगर मिल से दशमलव पांच और यूजेवीएनएल से आठ मिलियन यूनिट बिजली ली जा रही है। ताकि, सर्दी के मौसम में बिजली की बढ़ती खपत को पूरा किया जा सके।
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250 गांवों में दूसरे दिन भी छाया रहा अंधेरा
- चकराता, साहिया और विकासनगर में घंटों ठप रही विद्युत आपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
चकराता/विकासनगर। बर्फबारी और बारिश से लाइनें क्षतिग्रस्त होने से जौनसार बावर और पछवादून के 250 से अधिक गांवों में बुधवार को दूसरे दिन भी अंधेरा छाया रहा। 33 केवी लाइन में खराबी आने से छावनी बाजार चकराता में नौ घंटे बिजली बंद रही। सुबह पांच बजे बंद हुई विद्युत आपूर्ति दोपहर दो बजे सुचारु हो पाई। वहीं, विकासनगर में भी पूरे दिन बिजली की आंख मिचोली जारी रही।
जौनसार बावर के मोहना, सावरा, सुजऊ, बुरास्वा, लोखंडी, लोहारी चकराता, साहिया, त्यूनी, कोरवा, कोटि, लांघापोखरी, ग्वासापुल, पुरोड़ी, लालकुर्ती, आलूमंडी, भंगार, क्वासी, गोराघाटी, जाड़ी, सूजउ, कन्धाड, सिजला, कुन्ना, मंझगांव, संमोग, सतोली, मेहरावना, रावना, जोगियों सहित 250 से अधिक गांव, कस्बे और मजरों में दूसरे दिन भी अंधेरा छाया रहा। चकराता कैंट क्षेत्र को छोड़कर अधिकतर गांवों में विद्युत आपूर्ति सुचारु नहीं हो पायी है। स्थानीय निवासी राजेंद्र सिंह, केशर, पंकज आदि का कहना है कि विद्युत आपूर्ति सुचारु नहीं होने से लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। -----
33 केवी लाइन में फाल्ट आया था, जिसे ठीक कर दिया गया है। लेकिन, भारी बर्फबारी से जगह-जगह लाइनें टूट जाने से समस्या बनी है। बर्फबारी से सभी मार्ग बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में मरम्मत कार्य नहीं हो पा रहा है।
- अशोक कुमार, एसडीओ चकराता