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ईश्वर काल्पनिक और प्रकृति वास्तविक
Updated Mon, 17 Dec 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। बजरंग मुनि सामाजिक शोध संस्थान की ओर से ‘ईश्वर के अस्तित्व’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुनि ने कहा कि भाषाओं के आधार पर ईश्वर अलग हो सकता है लेकिन ईश्वर सदा एक ही है। रविवार को देहरादून रोड स्थित संस्था में ज्ञानयज्ञ कार्यक्रम आयोजित किया गया। बजरंग मुनि ने ईश्वर और भगवान के बीच भेद बताते हुए कहा कि ईश्वर अदृश्य शक्ति और भगवान प्रेरणादायक के रूप में होते हैं। उन्होंने कहा ईश्वर काल्पनिक और प्रकृति वास्तविक होती है।
नास्तिक लोगों की भूल है कि समाज की व्यवस्था के सही संचालन में ईश्वरीय शक्ति की कोई आवश्यकता नहीं होती है। जबकि ईश्वर से बढ़कर संसार में कुछ भी नहीं है। इस मौके पर संस्था निदेशक आचार्य पंकज ने कहा कि प्रकृति की सत्ता को चुनौती नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा मनुष्य अतीत का दुख, वर्तमान का मोह और भविष्य का भय लेकर जीवनभर यात्रा करता है। इस अवसर पर ज्ञानयज्ञ संरक्षक प्रमोद वात्सल्य, चौधरी रतिराम शास्त्री, राष्ट्रीय संयोजक अभ्युदय, संस्था के कुल सचिव नवीन कुमार शर्मा, तेजस्वी, डॉ. संतोष मुनि, विनोद जुगलान, आचार्य रामकृष्ण पोखरियाल, कार्यालय सहयोगी मंगल प्रसाद, दीपक दरगन, पंडित रवि शास्त्री, नितेश आदि मौजूद रहे।
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नास्तिक लोगों की भूल है कि समाज की व्यवस्था के सही संचालन में ईश्वरीय शक्ति की कोई आवश्यकता नहीं होती है। जबकि ईश्वर से बढ़कर संसार में कुछ भी नहीं है। इस मौके पर संस्था निदेशक आचार्य पंकज ने कहा कि प्रकृति की सत्ता को चुनौती नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा मनुष्य अतीत का दुख, वर्तमान का मोह और भविष्य का भय लेकर जीवनभर यात्रा करता है। इस अवसर पर ज्ञानयज्ञ संरक्षक प्रमोद वात्सल्य, चौधरी रतिराम शास्त्री, राष्ट्रीय संयोजक अभ्युदय, संस्था के कुल सचिव नवीन कुमार शर्मा, तेजस्वी, डॉ. संतोष मुनि, विनोद जुगलान, आचार्य रामकृष्ण पोखरियाल, कार्यालय सहयोगी मंगल प्रसाद, दीपक दरगन, पंडित रवि शास्त्री, नितेश आदि मौजूद रहे।
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