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स्वस्थ रहने को करें जीवन शैली में बदलाव : प्रो. रविकांत
Updated Sun, 25 Nov 2018 12:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
नियमित दिनचर्या व सही खान पान से ही हृदयाघात, लकवा व धमनी रोगों से बचा जा सकता है। यदि स्वस्थ रहना है तो आवश्यक रूप में जीवन शैली में बदलाव लाना होगा।
यह बात एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में आयोजित दो दिवसीय उत्तराखंड कॉर्डियाबकान-2018 कार्यशाला के समापन पर कही। इस अवसर पर डीन प्रो. सुरेखा किशोर ने हृदय रोग व मधुमेह को लेकर नए मॉडल का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि गरीब देशों में एनजीओ इन बीमारियों को कंट्रोल करने में बड़ी अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने इसके लिए नुक्कड़ नाटक व मधुमेह बचाव से जुड़े जागरूकता कार्यक्रमों पर जोर दिया। प्रो. बीना रवि ने आयुष विभाग को मधुमेह व हृदय रोग से बचाव के लिए एक सहायक घटक के रूप में महत्वपूर्ण बताया। कार्डिबिकान सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आशुतोष मिश्रा ने बताया कि कार्यशाला का आयोजन युवा चिकित्सकों व रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। कार्यशाला के समन्वयक डॉ. रविकांत ने सुदूरवर्ती क्षेत्रों में जनजागरूकता के लिए इस तरह के आयोजनों पर जोर दिया।
एम्स जोधपुर के डॉ. रविंद्र शुक्ला ने बताया कि शुगर की जांच के लिए अधिकतर लोग सुई का प्रयोग करते हैं जिससे उन्हें परेशानी होती है। वर्तमान में ऐसी मशीनें उपलब्ध है इससे व्यक्ति बिना शारीरिक कष्ट के दिन में कई बार शुगर जांच करा सकते हैं। डॉ. ज्योतिर्मय पाल ने बताया कि शुगर व कोलेस्ट्रॉल बढ़ने व कम चलने फिरने से 65 वर्ष व इससे अधिक उम्र के लोग हाईपर टेंशन से ग्रसित हो रहे हैं। कई बार एक से अधिक रोगों की दवा लेने से दवा का असर कम हो जाता है। बढ़ती उम्र में नमक का कम प्रयोग करने व ब्लड प्रेशर की नियमित दवा के सेवन से इन बीमारियों से बचा जा सकता है। इस अवसर पर सह समन्वयक व मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी धर, कार्यक्रम सचिव डॉ. मोनिका पठानिया, सह सचिव डॉ. मुकेश कुमार आदि उपस्थित रहे।
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क्विज प्रतियोगिता में सैफई कॉलेज रहा प्रथम
कार्यशाला के दौरान मधुमेह विषय पर क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसमें राजकीय मेडिकल कॉलेज सैफई, एम्स ऋषिकेश, आदेश मेडिकल कॉलेज भटिंडा व महंत इंद्रेश कॉलेज ने प्रतिभाग किया। क्विज में सैफई कॉलेज ने प्रथम व ऋषिकेश एम्स ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
10 विशेषज्ञों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र
कार्यशाला में 10 विशेषज्ञों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इसमें मधुमेह और हृदय रोग विषय शामिल रहे। शोध पत्र प्रस्तुत करने वालों में डॉ. शुभम जैन, डॉ. निशा, डॉ. किरन, डॉ. अगस्टिम, डॉ. शंकर, डॉ. दिव्यांशी, डॉ. संचय जैन आदि उपस्थित रहे।
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नियमित दिनचर्या व सही खान पान से ही हृदयाघात, लकवा व धमनी रोगों से बचा जा सकता है। यदि स्वस्थ रहना है तो आवश्यक रूप में जीवन शैली में बदलाव लाना होगा।
यह बात एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में आयोजित दो दिवसीय उत्तराखंड कॉर्डियाबकान-2018 कार्यशाला के समापन पर कही। इस अवसर पर डीन प्रो. सुरेखा किशोर ने हृदय रोग व मधुमेह को लेकर नए मॉडल का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि गरीब देशों में एनजीओ इन बीमारियों को कंट्रोल करने में बड़ी अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने इसके लिए नुक्कड़ नाटक व मधुमेह बचाव से जुड़े जागरूकता कार्यक्रमों पर जोर दिया। प्रो. बीना रवि ने आयुष विभाग को मधुमेह व हृदय रोग से बचाव के लिए एक सहायक घटक के रूप में महत्वपूर्ण बताया। कार्डिबिकान सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आशुतोष मिश्रा ने बताया कि कार्यशाला का आयोजन युवा चिकित्सकों व रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। कार्यशाला के समन्वयक डॉ. रविकांत ने सुदूरवर्ती क्षेत्रों में जनजागरूकता के लिए इस तरह के आयोजनों पर जोर दिया।
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एम्स जोधपुर के डॉ. रविंद्र शुक्ला ने बताया कि शुगर की जांच के लिए अधिकतर लोग सुई का प्रयोग करते हैं जिससे उन्हें परेशानी होती है। वर्तमान में ऐसी मशीनें उपलब्ध है इससे व्यक्ति बिना शारीरिक कष्ट के दिन में कई बार शुगर जांच करा सकते हैं। डॉ. ज्योतिर्मय पाल ने बताया कि शुगर व कोलेस्ट्रॉल बढ़ने व कम चलने फिरने से 65 वर्ष व इससे अधिक उम्र के लोग हाईपर टेंशन से ग्रसित हो रहे हैं। कई बार एक से अधिक रोगों की दवा लेने से दवा का असर कम हो जाता है। बढ़ती उम्र में नमक का कम प्रयोग करने व ब्लड प्रेशर की नियमित दवा के सेवन से इन बीमारियों से बचा जा सकता है। इस अवसर पर सह समन्वयक व मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी धर, कार्यक्रम सचिव डॉ. मोनिका पठानिया, सह सचिव डॉ. मुकेश कुमार आदि उपस्थित रहे।
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क्विज प्रतियोगिता में सैफई कॉलेज रहा प्रथम
कार्यशाला के दौरान मधुमेह विषय पर क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसमें राजकीय मेडिकल कॉलेज सैफई, एम्स ऋषिकेश, आदेश मेडिकल कॉलेज भटिंडा व महंत इंद्रेश कॉलेज ने प्रतिभाग किया। क्विज में सैफई कॉलेज ने प्रथम व ऋषिकेश एम्स ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
10 विशेषज्ञों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र
कार्यशाला में 10 विशेषज्ञों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इसमें मधुमेह और हृदय रोग विषय शामिल रहे। शोध पत्र प्रस्तुत करने वालों में डॉ. शुभम जैन, डॉ. निशा, डॉ. किरन, डॉ. अगस्टिम, डॉ. शंकर, डॉ. दिव्यांशी, डॉ. संचय जैन आदि उपस्थित रहे।