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मेरी भी आवाज सुनो...मैं ऋषिकेश हूं
Updated Wed, 21 Nov 2018 02:31 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। नगर पालिका से उच्चीकृत होकर मुझे नगर निगम का दर्जा मिला। वो तारीख 5 अप्रैल 2018 थी। चुनाव की कवायद शुरू हुई। टिकट के लिए मारामारी भी हुई। इस पड़ाव के बाद उम्मीदवार घोषित हुए। 18 नवंबर को चुनाव हुआ और मुझे महिला के रूप में पहला मेयर भी मिल गया। सबने चुनाव के दौरान खूब वादे और दावे किए लेकिन मेरी उम्मीदें क्या हैं, ये किसी ने नहीं पूछा। जी, हां...मैं ऋषिकेश हूं। गंगा के तट पर लोगों को अपने दामन में ठौर देकर मैंने नगर का स्वरूप ग्रहण किया। ऋषियों और मुनियों ने यहां सिद्घि प्राप्ति की। प्रकृति की मनोरम छटा में साधकों ने योग के ऐसा परचम लहराया कि मुझे योग की वैश्विक राजधानी का खिताब हासिल हुआ। आश्रमों की आबादी और जीवनदायिनी गंगा के सानिध्य ने मुझे तीर्थनगरी का तमगा भी दिया।
कहने को तो मैं देवभूमि उत्तराखंड का द्वार भी हूं। असल बात तो यह है कि आधुनिकता की अंधी दौड़ ने मेरे स्वरूप को बहुत नुकसान पहुंचाया है। कागजों में तो मेरे इर्दगिर्द विकास की इबारत लिखी जा रही है लेकिन ये कोरे झूठ से कम नहीं है। मैं अव्यवस्था और लापरवाही की पूरी फेहरिस्त पेश कर सकता हूं। मेरी आकांक्षाओं के अनुरूप मुझे तुम सुसज्जित करोगे, इतनी अपेक्षा भी तुमसे नहीं है। अलबत्ता कुछ बुनियादी जरूरतें हैं जिन्हें मैं अपने 83 हजार 517 मतदाताओं की मार्फत अपने पहले मेयर के समक्ष पेश करना चाहता हूं। चूंकि पहली मेयर बनने का सौभाग्य एक महिला को ही प्राप्त हुआ है, इसलिए मैं चाहता हूं कि मां गंगा के संरक्षण को गंभीरता से प्रयास हों। लाख कोशिशों के बावजूद आज भी नालों का गंदा पानी मोक्ष दायिनी के दामन पर उड़ेला जा रहा है।
यह शर्मनाक है, इस पर अंकुश लगाओ। मैं किसी व्यक्ति विशेष या संस्था का नाम नहीं लेना चाहूंगा लेकिन मेरी छाती पर कूड़े का पहाड़ इकट्ठा किया जा रहा है, इसका उपाय जरूर करो। मुख्यमंत्री ने कूड़ा निस्तारण के लिए एक निजी संस्था के प्लांट का उद्घाटन भी किया था। उस संस्था के संचालक ने वादा किया था कि मैं शहर के कूड़े को इस प्लांट में रिसाइक्लिंग करूंगा। इससे स्वच्छता अभियान को भी गति मिलेगी। इसके उलट हकीकत बड़ी कष्टकारी है। उक्त प्लांट ठप पड़ा है। सारा कूड़ा मेरी नाक के नीचे गिराया जा रहा है। पहले मेयर से गुजारिश है कि कम से कम एक ट्रंचिंग ग्राउंड और रिसाइकिल प्लांट का इंतजाम प्राथमिकता पर कर दें।
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वैसे तो नगर क्षेत्र में बहुत समस्याएं हैं जिन्हें सुलझाने में पूरा कार्यकाल भी कम पड़ जाएगा। फिलहाल कुछ बड़े मुद्दे हैं, उनका ही समाधान हो गया तो मेहरबानी से कम न होगी। बड़ी मुसीबत तो यह है किन मेरे चारों ओर बेतरतीब कंक्रीट के जंगल उगाए जा रहे हैं। कोर्ट ने भी आदेश दिया है कि गंगा तट से पांच सौ मीटर के दायरे में कोई निर्माण न हो। ये फरमान भी अमल में नहीं आ सका। खुलेआम नियमों और मेरे स्वरूप को तहसनहस किया जा रहा है। आप नगर की प्रथम नागरिक बन चुकी हैं। लिहाजा आप मेरे उलाहने का भी संज्ञान लें। रुड़की-हरिद्वार विकास प्राधिकरण ने मेरे विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार किया था। नियमों की बात करूं तो मास्टर प्लान की मियाद 10 साल होती है। आज 18 साल हो गए योजना लागू नहीं हो पाई। नतीजा ये है कि मेरे वजूद पर बेतहाशा अवैध निर्माण हो चुके हैं। ये सिलसिला अब भी जारी है। मेरी विनम्र प्रार्थना ये भी है कि मेरे चारों ओर हो रहे अवैध निर्माणों के जाल से मुझे मुक्त करो। बेहद घुटन में मैं जी रहा हूं।
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कहने को तो मैं देवभूमि उत्तराखंड का द्वार भी हूं। असल बात तो यह है कि आधुनिकता की अंधी दौड़ ने मेरे स्वरूप को बहुत नुकसान पहुंचाया है। कागजों में तो मेरे इर्दगिर्द विकास की इबारत लिखी जा रही है लेकिन ये कोरे झूठ से कम नहीं है। मैं अव्यवस्था और लापरवाही की पूरी फेहरिस्त पेश कर सकता हूं। मेरी आकांक्षाओं के अनुरूप मुझे तुम सुसज्जित करोगे, इतनी अपेक्षा भी तुमसे नहीं है। अलबत्ता कुछ बुनियादी जरूरतें हैं जिन्हें मैं अपने 83 हजार 517 मतदाताओं की मार्फत अपने पहले मेयर के समक्ष पेश करना चाहता हूं। चूंकि पहली मेयर बनने का सौभाग्य एक महिला को ही प्राप्त हुआ है, इसलिए मैं चाहता हूं कि मां गंगा के संरक्षण को गंभीरता से प्रयास हों। लाख कोशिशों के बावजूद आज भी नालों का गंदा पानी मोक्ष दायिनी के दामन पर उड़ेला जा रहा है।
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यह शर्मनाक है, इस पर अंकुश लगाओ। मैं किसी व्यक्ति विशेष या संस्था का नाम नहीं लेना चाहूंगा लेकिन मेरी छाती पर कूड़े का पहाड़ इकट्ठा किया जा रहा है, इसका उपाय जरूर करो। मुख्यमंत्री ने कूड़ा निस्तारण के लिए एक निजी संस्था के प्लांट का उद्घाटन भी किया था। उस संस्था के संचालक ने वादा किया था कि मैं शहर के कूड़े को इस प्लांट में रिसाइक्लिंग करूंगा। इससे स्वच्छता अभियान को भी गति मिलेगी। इसके उलट हकीकत बड़ी कष्टकारी है। उक्त प्लांट ठप पड़ा है। सारा कूड़ा मेरी नाक के नीचे गिराया जा रहा है। पहले मेयर से गुजारिश है कि कम से कम एक ट्रंचिंग ग्राउंड और रिसाइकिल प्लांट का इंतजाम प्राथमिकता पर कर दें।
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वैसे तो नगर क्षेत्र में बहुत समस्याएं हैं जिन्हें सुलझाने में पूरा कार्यकाल भी कम पड़ जाएगा। फिलहाल कुछ बड़े मुद्दे हैं, उनका ही समाधान हो गया तो मेहरबानी से कम न होगी। बड़ी मुसीबत तो यह है किन मेरे चारों ओर बेतरतीब कंक्रीट के जंगल उगाए जा रहे हैं। कोर्ट ने भी आदेश दिया है कि गंगा तट से पांच सौ मीटर के दायरे में कोई निर्माण न हो। ये फरमान भी अमल में नहीं आ सका। खुलेआम नियमों और मेरे स्वरूप को तहसनहस किया जा रहा है। आप नगर की प्रथम नागरिक बन चुकी हैं। लिहाजा आप मेरे उलाहने का भी संज्ञान लें। रुड़की-हरिद्वार विकास प्राधिकरण ने मेरे विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार किया था। नियमों की बात करूं तो मास्टर प्लान की मियाद 10 साल होती है। आज 18 साल हो गए योजना लागू नहीं हो पाई। नतीजा ये है कि मेरे वजूद पर बेतहाशा अवैध निर्माण हो चुके हैं। ये सिलसिला अब भी जारी है। मेरी विनम्र प्रार्थना ये भी है कि मेरे चारों ओर हो रहे अवैध निर्माणों के जाल से मुझे मुक्त करो। बेहद घुटन में मैं जी रहा हूं।