{"_id":"5bc79dd2bdec2269a7715af7","slug":"15398086919-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रावण ने विभीषण को राज्य से बाहर निकाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रावण ने विभीषण को राज्य से बाहर निकाला
Updated Thu, 18 Oct 2018 02:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। रेलवे रोड स्थित बनखंडी में श्रीरामलीला कमेटी सुभाष बनखंडी ऋषिकेश की ओर से आयोजित रामलीला में विभीषण शरणागत, सेतुबंध रामेश्वरम पूजा और रावण-अंगद संवाद की लीलाओं का मंचन किया गया। विभीषण अपने बड़े भाई रावण से कहता है कि माता सीता को प्रभु श्रीराम को सम्मान के साथ भेज दें और क्षमा मांग लें। इससे रावण क्रोधित होकर भरे दरबार में विभीषण को लात मारकर राज्य से बाहर कर देता है। इसके बाद विभीषण श्रीराम की शरण में चला जाता है।
उधर, सेतुबंध रामेश्वरम लीला में भगवान श्रीराम समुद्र की पूजा कर उनसे लंका पर चढ़ाई करने के लिए रास्ते की विनती करते हैं, लेकिन श्रीराम के आग्रह करने पर भी जब समुंदर ने रास्ता नहीं दिया तो उन्होंने वाण निकालकर समंदर को सुखाने की चेतावनी दी। जिसके बाद राजा समुद्र अवतरित हुए। उन्होंने बताया कि आप यहां पर एक शिवलिंग की स्थापना कीजिए। इसके बाद नल-नील ने पत्थरों का पुल बनाया चढ़ाई करने से पूर्व श्री राम ने एक बार फिर रावण को संधि करने के लिए राजा बाली के पुत्र अंगद को दूत बनाकर लंका भेजा लेकिन रावण ने अहंकार के चलते श्रीराम के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
इस अवसर पर श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विनोद पाल, महामंत्री हरीश तिवाड़ी, इंद्र कुमार गोदवानी, सतीश पाल, निर्देशक मनमीत कुमार, रोहताश पाल, हुकुमचंद्र, सुरेंद्र कुमार, दीपक जोशी, राजेश दिवाकर, विनोद रतूडी, पप्पू पाल, महेंद्र सिंह, विनायक, मिलन, सतपाल, सुनील नेगी, भारतेंदु शंकर पांडे, नीतीश पाल, सागर कालरा, शशांक पाल, सुभाष पाल, राकेश पारचा, बाली पाल, मनोज गर्ग, प्रशांत पाल, ललित शर्मा, अशोक मौर्य, संजय शर्मा, अनिल धीमान, राजू कुशवाहा, राजेश धीमान, राजेश साहनी, अमर आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
उधर, सेतुबंध रामेश्वरम लीला में भगवान श्रीराम समुद्र की पूजा कर उनसे लंका पर चढ़ाई करने के लिए रास्ते की विनती करते हैं, लेकिन श्रीराम के आग्रह करने पर भी जब समुंदर ने रास्ता नहीं दिया तो उन्होंने वाण निकालकर समंदर को सुखाने की चेतावनी दी। जिसके बाद राजा समुद्र अवतरित हुए। उन्होंने बताया कि आप यहां पर एक शिवलिंग की स्थापना कीजिए। इसके बाद नल-नील ने पत्थरों का पुल बनाया चढ़ाई करने से पूर्व श्री राम ने एक बार फिर रावण को संधि करने के लिए राजा बाली के पुत्र अंगद को दूत बनाकर लंका भेजा लेकिन रावण ने अहंकार के चलते श्रीराम के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
विज्ञापन
इस अवसर पर श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विनोद पाल, महामंत्री हरीश तिवाड़ी, इंद्र कुमार गोदवानी, सतीश पाल, निर्देशक मनमीत कुमार, रोहताश पाल, हुकुमचंद्र, सुरेंद्र कुमार, दीपक जोशी, राजेश दिवाकर, विनोद रतूडी, पप्पू पाल, महेंद्र सिंह, विनायक, मिलन, सतपाल, सुनील नेगी, भारतेंदु शंकर पांडे, नीतीश पाल, सागर कालरा, शशांक पाल, सुभाष पाल, राकेश पारचा, बाली पाल, मनोज गर्ग, प्रशांत पाल, ललित शर्मा, अशोक मौर्य, संजय शर्मा, अनिल धीमान, राजू कुशवाहा, राजेश धीमान, राजेश साहनी, अमर आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन