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सिस्टम की बेरूखी के शिकार काश्तकार

Tue, 16 Oct 2018 02:09 AM IST
Updated Tue, 16 Oct 2018 02:09 AM IST
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सिस्टम की बेरूखी के शिकार काश्तकार
ब्यूरो/अमर उजाला, साहिया
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सिस्टम की बेरुखी काश्तकारों पर भारी पड़ रही हैै। रवि की फसल की बुआई का दौर शुरू हो चुका है, लेकिन जौनसार बावर क्षेत्र में 13 हाईड्रम योजनाएं बीते छह साल से क्षतिग्रस्त पड़ी हुई हैं। पूरी खेती-बाड़ी बारिश पर निर्भर होकर रह गई है। कभी इन हाईड्रम योजनाओं से 1700 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती थी। लेकिन वर्तमान में सिंचाई के अभाव में आधे से अधिक कृषि भूमि बंजर पड़ी हुई है। इससे काश्तकारों का रुझान भी खेती-बाड़ी की तरफ घटने लगा है।
वर्ष 1986 में इन योजनाओं को क्षेत्र में स्थापित किया गया था, जो 2013 तक ठीक चलीं। लेकिन भीषण आपदा में ये योजनाएं पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गईं। जड़वाला के काश्तकार संतन सिंह राठौर, चापनू के राजेश का कहना है कि पूर्व में खेती-बाड़ी कर वह अपने परिवार का भरण पोषण करते थे, लेकिन वर्तमान में सिंचाई के अभाव में उनकी भूमि बंजर पड़ी हुई है। कुछ यही कहानी कोटी निवासी चमन सिंह तोमर, टीकम सिंह तोमर, साहिया छानी निवासी गंगा सिंह राय, सतपाल राय, युवराज सिंह राय, धर्म सिंह राय आदि की है। जिनकी कृषि भूमि आज सिंचाई के अभाव में बंजर पड़ी है।
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इन काश्तकारों का कहना है कि सिंचाई के अभाव में वह महज मानसून में ही खेतीबाड़ी कर पाते हैं। इसके बाद पूरी फसल बारिश पर निर्भर हो कर रह जाती है। इन दिनों क्षेत्र में गेहूं की बुवाई शुरू हो चुकी है। लेकिन सिंचाई के अभाव में वे अब तक बुवाई शुरू नहीं कर सके हैं। बताया कि हाईड्रम योजनाओं के क्षतिग्रस्त होने से जड़वाला में 30 परिवारों की 50 हेक्टेयर कृषि भूमि, साहिया छानी में 200 से अधिक परिवारों की 250 हेक्टेयर कृषि भूमि, कोटी गाड में 80 से अधिक परिवारों की 150 हेक्टेयर भूमि बंजर हो रही है।
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ये योजनाएं भी क्षतिग्रस्त
जड़वाला, साहिया छानी के साथ ही कालसी और चकराता प्रखंड में चापनू, मलेथा, जड़वाला, साहिया छानी, बुहार खेड़ा, तारलीगाड, कोटीगाड प्रथम, कोटीगाड समेत 13 हाईड्रम योजनाएं बीते छह साल से क्षतिग्रस्त पड़ी हुई हैं।

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बंद पड़ीं हाईड्रम योजनाओं को फिर से जीवित करने के लिए प्रस्ताव बना शासन को भेजा गया है। बजट की स्वीकृति मिलते ही योजनाओं की मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा।
- रविंद्र प्रसाद, अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई विभाग
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