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जन्मे राम रघुराई, अवध में बाजे बधाई....
Updated Fri, 12 Oct 2018 10:32 PM IST
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गोपेश्वर/कर्णप्रयाग/पौड़ी। कर्मचारी रामलीला कमेटी गोपेश्वर की ओर से आयोजित रामलीला के दूसरे दिन रामजन्म का मंचन किया गया। मुख्य अतिथि सीडीओ हंसादत्त पांडे ने रामलीला का शुभारंभ किया।
रामलीला मंचन में राजा दशरथ की ओर से यज्ञ करने के बाद उन्हें घर राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघन का जन्म होता है। अवधवासी जन्मे राम रघुराई, अवध में बाजे बधाई... के भजन गाकर मिष्ठान वितरण किया जाता है। राजकुमार बड़े होते हैं और शिक्षा-दीक्षा के लिए गुरु विश्वमित्र के साथ वन में जाते हैं। यहां लक्ष्मण ताड़िका और शुभाऊ राक्षस का वध कर देते हैं। वहीं, जनकपुरी में सूखा पड़ने पर राजा जनक वर्षा के लिए स्वयं हल चलाते हैं। हल चलाते वक्त धरती मां की गोद से सीता प्रकट होती हैं। जनकपुरी में सीता और अयोध्या में राम जन्म पर उत्सव मनाया जाता है।
कर्णप्रयाग में मां चंडिका रामलीला कमेटी सिमली की ओर से आयोजित रामलीला में कलाकारों के अभिनय को देख श्रद्धालु भाव विह्वल हो गए। महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ से असुरों से उनके यज्ञ की रक्षा करने के लिए राम और लक्ष्मण को अपने साथ आश्रम ले जाने के लिए कहते हैं। आश्रम में विश्वामित्र के यज्ञ अनुष्ठान को भंग करने के लिए ताड़िका, मारीच और सुबाहु आते हैं, तो राम उनका वध कर देते हैं। इस मौके पर कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी, क्षेत्र पंचायत सदस्य मनोज पुंडीर, भुवनेश्वरी देवी, मुन्नी कठैत, बीना खंडूड़ी, जयदीप गैरोला और रविंद्र खंडूड़ी आदि मौजूद थे।
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पौड़ी में श्री रामलीला कमेटी पौड़ी की ओर से रामलीला मैदान में आयोजित मंचन में दूसरे दिन सीता का जन्म हुआ। वहीं ताड़का-सुबाहु का वध किया गया। रामलीला में झांकी वंदना, जनक की सभा में प्रजा, राजा जनक की ओर से हल चलाना, सीता जन्म, राक्षसों द्वारा विश्वामित्र का यज्ञ विध्वंस, विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण सहित जनकपुरी के लिए प्रस्थान को दर्शाया गया। इस दौरान रामलीला कमेेटी के अध्यक्ष उमाचरण बड़थ्वाल, सचिव राम सिंह रावत व उपाध्यक्ष मनोज रावत आदि मौजूद रहे।
पीपलकोटी में रामलीला 15 से
पीपलकोटी। ज्योति क्लब पीपलकोटी ने विद्यालयों में अर्द्धवार्षिक परीक्षा को देखते हुए रामलीला का मंचन 15 अक्तूबर से करने का निर्णय लिया है। क्लब के संयोजक दीप शाह ने बताया कि पीपलकोटी में ज्योति क्लब की ओर से प्रतिवर्ष रामलीला का भव्य आयोजन किया जाता है। इस वर्ष अर्द्धवार्षिक परीक्षा के कारण रामलीला का मंचन 15 से 26 अक्तूबर तक किया जाएगा, जबकि पूर्व में 10 अक्तूबर की तिथि निर्धारित की गई थी।
लक्ष्मण और परशुराम संवाद रहा आकर्षण
श्रीनगर। रामलीला मंचन में शिव का धनुष तोड़ने के बाद सीता राम विवाह व लक्ष्मण, परशुराम संवाद आकर्षण का केंद्र रहा। रामलीला के दूसरे दिन का मंचन मां गौरी की आरती के साथ शुरू किया गया। रामलीला में सीता स्वयंवर का मंचन किया किया। सूचना के बाद स्वयंवर में राजकुमार और महाराजा पहुंचते हैं लेकिन कोई भी शिव धनुष नहीं उठा पाता। विश्वामित्र के कहने पर राम धनुष उठाते हैं और तोड़ देते हैं। गुरू का धनुष तोड़ने पर परशुराम क्रोधित होकर जनक के दरबार में पहुंचते हैं और लक्ष्मण-परशुराम की जमकर बहस हुई। अंत में राम लक्ष्मण और परशुराम के बीच की बहस को शांत करवाते हैं।
रामलीला मंचन में राजा दशरथ की ओर से यज्ञ करने के बाद उन्हें घर राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघन का जन्म होता है। अवधवासी जन्मे राम रघुराई, अवध में बाजे बधाई... के भजन गाकर मिष्ठान वितरण किया जाता है। राजकुमार बड़े होते हैं और शिक्षा-दीक्षा के लिए गुरु विश्वमित्र के साथ वन में जाते हैं। यहां लक्ष्मण ताड़िका और शुभाऊ राक्षस का वध कर देते हैं। वहीं, जनकपुरी में सूखा पड़ने पर राजा जनक वर्षा के लिए स्वयं हल चलाते हैं। हल चलाते वक्त धरती मां की गोद से सीता प्रकट होती हैं। जनकपुरी में सीता और अयोध्या में राम जन्म पर उत्सव मनाया जाता है।
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कर्णप्रयाग में मां चंडिका रामलीला कमेटी सिमली की ओर से आयोजित रामलीला में कलाकारों के अभिनय को देख श्रद्धालु भाव विह्वल हो गए। महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ से असुरों से उनके यज्ञ की रक्षा करने के लिए राम और लक्ष्मण को अपने साथ आश्रम ले जाने के लिए कहते हैं। आश्रम में विश्वामित्र के यज्ञ अनुष्ठान को भंग करने के लिए ताड़िका, मारीच और सुबाहु आते हैं, तो राम उनका वध कर देते हैं। इस मौके पर कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी, क्षेत्र पंचायत सदस्य मनोज पुंडीर, भुवनेश्वरी देवी, मुन्नी कठैत, बीना खंडूड़ी, जयदीप गैरोला और रविंद्र खंडूड़ी आदि मौजूद थे।
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पौड़ी में श्री रामलीला कमेटी पौड़ी की ओर से रामलीला मैदान में आयोजित मंचन में दूसरे दिन सीता का जन्म हुआ। वहीं ताड़का-सुबाहु का वध किया गया। रामलीला में झांकी वंदना, जनक की सभा में प्रजा, राजा जनक की ओर से हल चलाना, सीता जन्म, राक्षसों द्वारा विश्वामित्र का यज्ञ विध्वंस, विश्वामित्र का राम-लक्ष्मण सहित जनकपुरी के लिए प्रस्थान को दर्शाया गया। इस दौरान रामलीला कमेेटी के अध्यक्ष उमाचरण बड़थ्वाल, सचिव राम सिंह रावत व उपाध्यक्ष मनोज रावत आदि मौजूद रहे।
पीपलकोटी में रामलीला 15 से
पीपलकोटी। ज्योति क्लब पीपलकोटी ने विद्यालयों में अर्द्धवार्षिक परीक्षा को देखते हुए रामलीला का मंचन 15 अक्तूबर से करने का निर्णय लिया है। क्लब के संयोजक दीप शाह ने बताया कि पीपलकोटी में ज्योति क्लब की ओर से प्रतिवर्ष रामलीला का भव्य आयोजन किया जाता है। इस वर्ष अर्द्धवार्षिक परीक्षा के कारण रामलीला का मंचन 15 से 26 अक्तूबर तक किया जाएगा, जबकि पूर्व में 10 अक्तूबर की तिथि निर्धारित की गई थी।
लक्ष्मण और परशुराम संवाद रहा आकर्षण
श्रीनगर। रामलीला मंचन में शिव का धनुष तोड़ने के बाद सीता राम विवाह व लक्ष्मण, परशुराम संवाद आकर्षण का केंद्र रहा। रामलीला के दूसरे दिन का मंचन मां गौरी की आरती के साथ शुरू किया गया। रामलीला में सीता स्वयंवर का मंचन किया किया। सूचना के बाद स्वयंवर में राजकुमार और महाराजा पहुंचते हैं लेकिन कोई भी शिव धनुष नहीं उठा पाता। विश्वामित्र के कहने पर राम धनुष उठाते हैं और तोड़ देते हैं। गुरू का धनुष तोड़ने पर परशुराम क्रोधित होकर जनक के दरबार में पहुंचते हैं और लक्ष्मण-परशुराम की जमकर बहस हुई। अंत में राम लक्ष्मण और परशुराम के बीच की बहस को शांत करवाते हैं।