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एम्स में सप्ताह व्यापी मेंटल हेल्थ वीक संपन्न
Updated Thu, 11 Oct 2018 01:13 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश में सप्ताह व्यापी मेंटल हेल्थ वीक का बुधवार को समापन हो गया है। इस मौके पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े नुक्कड़ नाटक आदि कार्यक्रम आयोजित किए गए।
समापन अवसर पर एम्स निदेशक प्रोफेसर डॉक्टर रवि कांत ने कहा कि जिस तरह हम सामान्य बीमारियों में चिकित्सक की सलाह लेते हैं। उसी तरह मानसिक रोगों को छिपाने की बजाए विशेषज्ञ से परामर्श लें। बच्चों को अपनी खुशियों के साथ मन की परेशानियों को भी अपने मित्रों, शिक्षकों व अभिभावकों के साथ बांटना चाहिए। यदि बच्चे अपने किसी साथी को तनावग्रस्त पाते हैं तो उन्हें इसकी जानकारी शिक्षकों व अभिभावकों को देनी चाहिए। सुसाइड की बढ़ती घटनाओं को रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि मानसिक बीमारियों की पहचान करना आसान है और उनका उपचार मुमकिन है। अधिकांशत: मानसिक बीमारियां घबराहट, नशा, उदासी आदि किशोरावस्था में ही शुरू हो जाती हैं। पूरे विश्व में 15 से 29 वर्ष की आयु के लोगों में मृत्यु के कारणों में दूसरी सबसे महत्वपूर्ण वजह आत्महत्या है। इस अवसर पर उन्होंने प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। विभाग के प्राध्यापक डॉक्टर हर्षित गर्ग ने बताया कि वीक के पहले दिन मानसिक स्वास्थ्य पर निबंध प्रतियोगिता हुई। दूसरे दिन पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिताएं र्हुईं। तीसरे दिन न्यूरो साइक्याट्रिस्ट विषय पर क्वीज का आयोजन हुआ। चौथे दिन सुसाइड, उदासी डिप्रेशन, ओसीडी आदि दिमागी बीमारियों पर नुक्कड़ नाटक के जरिए युवाओं को जागरूक किया गया। इस अवसर पर डॉ. रवि गुप्ता, डॉ. विशाल धीमन, डॉ. विक्रम सिंह रावत, डॉ. अनिरुद्ध वसु, डॉ. जितेंद्र, डॉ. हर्षित गर्ग, डॉ. हर्षित हेमंत सालियान, डॉ. अनीता शर्मा, डॉ. ख्वाजा खयाम, डॉ. मृणाल झा आदि मौजूद रहे।
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ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश में सप्ताह व्यापी मेंटल हेल्थ वीक का बुधवार को समापन हो गया है। इस मौके पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े नुक्कड़ नाटक आदि कार्यक्रम आयोजित किए गए।
समापन अवसर पर एम्स निदेशक प्रोफेसर डॉक्टर रवि कांत ने कहा कि जिस तरह हम सामान्य बीमारियों में चिकित्सक की सलाह लेते हैं। उसी तरह मानसिक रोगों को छिपाने की बजाए विशेषज्ञ से परामर्श लें। बच्चों को अपनी खुशियों के साथ मन की परेशानियों को भी अपने मित्रों, शिक्षकों व अभिभावकों के साथ बांटना चाहिए। यदि बच्चे अपने किसी साथी को तनावग्रस्त पाते हैं तो उन्हें इसकी जानकारी शिक्षकों व अभिभावकों को देनी चाहिए। सुसाइड की बढ़ती घटनाओं को रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि मानसिक बीमारियों की पहचान करना आसान है और उनका उपचार मुमकिन है। अधिकांशत: मानसिक बीमारियां घबराहट, नशा, उदासी आदि किशोरावस्था में ही शुरू हो जाती हैं। पूरे विश्व में 15 से 29 वर्ष की आयु के लोगों में मृत्यु के कारणों में दूसरी सबसे महत्वपूर्ण वजह आत्महत्या है। इस अवसर पर उन्होंने प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। विभाग के प्राध्यापक डॉक्टर हर्षित गर्ग ने बताया कि वीक के पहले दिन मानसिक स्वास्थ्य पर निबंध प्रतियोगिता हुई। दूसरे दिन पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिताएं र्हुईं। तीसरे दिन न्यूरो साइक्याट्रिस्ट विषय पर क्वीज का आयोजन हुआ। चौथे दिन सुसाइड, उदासी डिप्रेशन, ओसीडी आदि दिमागी बीमारियों पर नुक्कड़ नाटक के जरिए युवाओं को जागरूक किया गया। इस अवसर पर डॉ. रवि गुप्ता, डॉ. विशाल धीमन, डॉ. विक्रम सिंह रावत, डॉ. अनिरुद्ध वसु, डॉ. जितेंद्र, डॉ. हर्षित गर्ग, डॉ. हर्षित हेमंत सालियान, डॉ. अनीता शर्मा, डॉ. ख्वाजा खयाम, डॉ. मृणाल झा आदि मौजूद रहे।
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