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भाजपा के गढ़ में लाज नहीं बचा पाए एबीवीपी के पदाधिकारी
Updated Mon, 10 Sep 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। पीजी ऑटोनोमस कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में जीत के लिए एबीवीपी में अनुशासन का दावा किसी काम नहीं आया। टिकट बंटवारे से उपजी गुटबाजी का असर छात्रसंघ के दो अहम पद अध्यक्ष और सचिव पर साफ दिखा। संगठन को इन दोनों ही पदों पर पराजय का सामना करना पड़ा। एबीपीपी ने शेष चार पदों पर ही जीत हासिल की। भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय कार्यकर्ता और एबीवीपी के पदाधिकारी भी पार्टी की लाज को बचा नहीं पाए।
छात्रसंघ चुनाव की तारीख मुकर्रर होने पर एबीवीपी ने सबसे पहले दावेदारों का पैनल घोषित किया। संगठन के उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी पारसनाथ एकमात्र दावेदार होने के चलते निर्विरोध निर्वाचित हो गए थे। इससे संगठन को जबरदस्त ऊर्जा भी मिली, लेकिन इस जोश के बावजूूद संगठन में गुटबाजी नहीं संभली। जबकि एबीवीपी पदाधिकारी समय समय पर चुनाव में कार्यकर्ताओं को अनुशासन का भी पाठ पढ़ाते रहे। बावजूद इसके उनकी बातें अपने सदस्यों के मन तक नहीं पहुंच सकी।
लिहाजा, चुनाव में गुटबाजी की नैया पर सवार संगठन के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी मोनू कुमार और सचिव पंकज कुमार को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणामों में अध्यक्ष पद पर नजदीकी हार को संगठन स्वीकार नहीं कर सका, जिसके चलते उन्होंने कॉलेज प्रशासन पर रिकाउंटिंग का दबाव बनाया। पुनर्मतदान के बाद भी एबीवीपी को हार का मुंह ही देखना पड़ा।
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छात्रसंघ चुनाव की तारीख मुकर्रर होने पर एबीवीपी ने सबसे पहले दावेदारों का पैनल घोषित किया। संगठन के उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी पारसनाथ एकमात्र दावेदार होने के चलते निर्विरोध निर्वाचित हो गए थे। इससे संगठन को जबरदस्त ऊर्जा भी मिली, लेकिन इस जोश के बावजूूद संगठन में गुटबाजी नहीं संभली। जबकि एबीवीपी पदाधिकारी समय समय पर चुनाव में कार्यकर्ताओं को अनुशासन का भी पाठ पढ़ाते रहे। बावजूद इसके उनकी बातें अपने सदस्यों के मन तक नहीं पहुंच सकी।
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लिहाजा, चुनाव में गुटबाजी की नैया पर सवार संगठन के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी मोनू कुमार और सचिव पंकज कुमार को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणामों में अध्यक्ष पद पर नजदीकी हार को संगठन स्वीकार नहीं कर सका, जिसके चलते उन्होंने कॉलेज प्रशासन पर रिकाउंटिंग का दबाव बनाया। पुनर्मतदान के बाद भी एबीवीपी को हार का मुंह ही देखना पड़ा।
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