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बच्चे की सांस की नली में फंसी पिन निकाली
Updated Mon, 20 Aug 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । एम्स ऋषिकेश के पलमोनरी मेडिसिन विभाग ने चार वर्षीय बच्चे की सांस नली में फंसी तीन सेंटीमीटर लंबी पिन को ब्रोंकोस्कोपी के जरिये बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की है। उक्त जटिल चिकित्सकीय प्रक्रिया को विभाग के प्रोफेसर डॉ. सुबोध कुमार की टीम ने अंजाम दिया। बीते शनिवार की देर रात एक चार वर्षीय बच्चे को लेकर परिजन एम्स पहुंचे। चिकित्सकों के जानकारी लेने पर परिजनों ने बताया कि बच्चे के दांतों में तकलीफ को लेकर वह शहर के किसी दंत चिकित्सा संस्थान में परीक्षण के लिए गए थे, जहां उपचार के दौरान उसके मुंह में तकरीबन तीन सेंटीमीटर की पिन सांस की नली से अंदर चली गई। जिससे बच्चे को परेशानी होने लगी।
संस्थान में चिकित्सकों ने जब बच्चे का एक्स-रे करवाया तो पता चला कि पिन उसके फेफड़े के दाहिने भाग में जाकर अटकी है। एम्स के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुबोध कुमार ने ब्रोंकोस्कोपी के जरिए सांस की नली में अटकी तीन सेंटीमीटर लंबी पिन को बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की । संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल ने बताया कि उक्त प्रक्रिया को डॉ. अजय द्वारा रोगी को पूर्ण बेहोशी की अवस्था में रखकर पूरा किया, जिसमें करीब 20 से 25 मिनट का समय लगा। सांस की नली में अटकी पिन को कुुशलतापूर्वक बाहर निकालने में सफल रहे डॉ. सुबोध कुमार का कहना है कि यदि उक्त पिन समय पर नहीं निकाली जाती तो बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो सकती थी, जो कि उसके जीवन लिए घातक भी हो सकती थी। बच्चे को शनिवार रात को चिकित्सकीय निगरानी में एम्स में ही रखा गया, जिसे रविवार को दोपहर में डिस्चार्ज कर दिया गया है।
एम्स निदेशक प्रोफेसर डॉ. रवि कांत ने समय पर उचित उपचार प्रक्रिया मुहैय्या कराकर बच्चे की जान बचाने वाले संस्थान की चिकित्सकीय टीम की सराहना की। उन्होंने कहा संस्थान में विश्वस्तरीय इमरजेंसी सेवाएं जल्द उपलब्ध कराना एम्स की प्राथमिकता है। बताया कि इस दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है, जिससे लोगों को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।
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संस्थान में चिकित्सकों ने जब बच्चे का एक्स-रे करवाया तो पता चला कि पिन उसके फेफड़े के दाहिने भाग में जाकर अटकी है। एम्स के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुबोध कुमार ने ब्रोंकोस्कोपी के जरिए सांस की नली में अटकी तीन सेंटीमीटर लंबी पिन को बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की । संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल ने बताया कि उक्त प्रक्रिया को डॉ. अजय द्वारा रोगी को पूर्ण बेहोशी की अवस्था में रखकर पूरा किया, जिसमें करीब 20 से 25 मिनट का समय लगा। सांस की नली में अटकी पिन को कुुशलतापूर्वक बाहर निकालने में सफल रहे डॉ. सुबोध कुमार का कहना है कि यदि उक्त पिन समय पर नहीं निकाली जाती तो बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो सकती थी, जो कि उसके जीवन लिए घातक भी हो सकती थी। बच्चे को शनिवार रात को चिकित्सकीय निगरानी में एम्स में ही रखा गया, जिसे रविवार को दोपहर में डिस्चार्ज कर दिया गया है।
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एम्स निदेशक प्रोफेसर डॉ. रवि कांत ने समय पर उचित उपचार प्रक्रिया मुहैय्या कराकर बच्चे की जान बचाने वाले संस्थान की चिकित्सकीय टीम की सराहना की। उन्होंने कहा संस्थान में विश्वस्तरीय इमरजेंसी सेवाएं जल्द उपलब्ध कराना एम्स की प्राथमिकता है। बताया कि इस दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है, जिससे लोगों को सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।
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