{"_id":"5b75e65442c7924b962e7038","slug":"153445332314-vikas-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अटल को विकासनगर तक खींच लाया था कार्यकर्ताओं का जोश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अटल को विकासनगर तक खींच लाया था कार्यकर्ताओं का जोश
Updated Fri, 17 Aug 2018 02:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मनीष त्रिपाठी/विकासनगर।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का विकासनगर से भी पुराना नाता रहा है। जब जनसंघ अपने शुरुआती दौर से गुजर रहा था तब कार्यकर्ताओं का जोश अटल बिहारी वाजपेयी को विकासनगर तक खींच ले आया था। अटल को अपने बीच पाकर उस समय जनसंघ के कार्यकर्ता गदगद हो गए थे। तब अटल ने न सिर्फ कार्यकर्ताओं के बीच जोश भरने का काम किया था, बल्कि रात्रि को उनके साथ भोजन भी किया। अटल बिहारी वाजपेयी की सादगी देखकर उस समय हर कोई उनका कायल हो गया था।
नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष और 88 वर्षीय चंदन लाल अग्रवाल बताते हैं कि बात अगस्त 1952 की है, तब जनसंघ अपने शुरुआती दौर से गुजर रहा था। रेडियो में अटल बिहारी वाजपेयी के भाषणों को सुन विकासनगर में रहने वाले लोग उनके मुरीद होने लगे थे। इस बीच पार्टी को मजबूती प्रदान करने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी एक बैठक में देहरादून पहुंचे। जहां उन्हें पता चला कि देहरादून से 45 किमी दूर विकासनगर तत्कालीन चौहड़पुर में भी उनके चाहने वालों की कोई कमी नहीं है। वह उनसे मिलना और उनके साथ जनसंघ में शामिल होना चाहते हैं, फिर क्या था दोपहर में ही देहरादून में बैठक के बाद शाम करीब छह बजे तेज बारिश के बीच अटल बिहारी वाजपेयी लोगों से मिलने के लिए विकासनगर आ पहुंचे। जहां रात आठ बजे तक वह कार्यकर्ताओं से घिरे रहे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को पार्टी को मजबूत करने के लिए कई सफलता मंत्र भी दिए।
वाह! लाला जी दाल खाकर मजा आ गया
चंदन लाल अग्रवाल बताते हैं कि वह दिन वह कभी नहीं भूल सकते। अटल जी विकासनगर में आकर उनके घर पर ही रुके थे। उस समय उनके पिता स्व. लाला रोशनलाल अग्रवाल भी जिंदा थे। उनके पिता ने अटल जी से रात्रि भोजन के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि, लाला जी आपको जो अच्छा लगता है वह बनाइए। तब पिता जी ने मां से कहकर उड़द की दाल बनवाई। सिल में पिसी हुई उड़द की दाल और उस पर घी डाला गया। जिसे खाने के बाद अटल ने सीधे पिता से कहा वाह! लाला जी दाल खाकर मजा आ गया। आज तक मैने इतनी स्वादिष्ट दाल नहीं खाई।
विज्ञापन
विज्ञापन
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का विकासनगर से भी पुराना नाता रहा है। जब जनसंघ अपने शुरुआती दौर से गुजर रहा था तब कार्यकर्ताओं का जोश अटल बिहारी वाजपेयी को विकासनगर तक खींच ले आया था। अटल को अपने बीच पाकर उस समय जनसंघ के कार्यकर्ता गदगद हो गए थे। तब अटल ने न सिर्फ कार्यकर्ताओं के बीच जोश भरने का काम किया था, बल्कि रात्रि को उनके साथ भोजन भी किया। अटल बिहारी वाजपेयी की सादगी देखकर उस समय हर कोई उनका कायल हो गया था।
नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष और 88 वर्षीय चंदन लाल अग्रवाल बताते हैं कि बात अगस्त 1952 की है, तब जनसंघ अपने शुरुआती दौर से गुजर रहा था। रेडियो में अटल बिहारी वाजपेयी के भाषणों को सुन विकासनगर में रहने वाले लोग उनके मुरीद होने लगे थे। इस बीच पार्टी को मजबूती प्रदान करने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी एक बैठक में देहरादून पहुंचे। जहां उन्हें पता चला कि देहरादून से 45 किमी दूर विकासनगर तत्कालीन चौहड़पुर में भी उनके चाहने वालों की कोई कमी नहीं है। वह उनसे मिलना और उनके साथ जनसंघ में शामिल होना चाहते हैं, फिर क्या था दोपहर में ही देहरादून में बैठक के बाद शाम करीब छह बजे तेज बारिश के बीच अटल बिहारी वाजपेयी लोगों से मिलने के लिए विकासनगर आ पहुंचे। जहां रात आठ बजे तक वह कार्यकर्ताओं से घिरे रहे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को पार्टी को मजबूत करने के लिए कई सफलता मंत्र भी दिए।
विज्ञापन
वाह! लाला जी दाल खाकर मजा आ गया
चंदन लाल अग्रवाल बताते हैं कि वह दिन वह कभी नहीं भूल सकते। अटल जी विकासनगर में आकर उनके घर पर ही रुके थे। उस समय उनके पिता स्व. लाला रोशनलाल अग्रवाल भी जिंदा थे। उनके पिता ने अटल जी से रात्रि भोजन के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि, लाला जी आपको जो अच्छा लगता है वह बनाइए। तब पिता जी ने मां से कहकर उड़द की दाल बनवाई। सिल में पिसी हुई उड़द की दाल और उस पर घी डाला गया। जिसे खाने के बाद अटल ने सीधे पिता से कहा वाह! लाला जी दाल खाकर मजा आ गया। आज तक मैने इतनी स्वादिष्ट दाल नहीं खाई।
विज्ञापन