{"_id":"5b62194d4f1c1bb24b8b6566","slug":"15331556552-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिमाचल की तर्ज पर बढ़ाया जाए किराया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिमाचल की तर्ज पर बढ़ाया जाए किराया
Updated Thu, 02 Aug 2018 02:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
गढ़वाल मंडल कांट्रेक्ट कैरिज एसोसिएशन ने हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर 40 प्रतिशत किराए बढ़ाने की मांग की है। एसोसिएशन का तर्क है कि बीते पांच वर्षों में बीमा, चेसिस, टायर, बॉडी, मोटर पार्ट्स, स्टाफ आदि खर्च में वृद्धि के सापेक्ष महज 15 प्रतिशत किराया बढ़ोत्तरी नाकाफी है।
एसोसिएशन के सचिव सुधीर राय का कहना है कि राज्य सरकार से बीते पांच साल से यात्री किराए में वृद्धि की मांग की जा रही है। एसोसिएशन की ओर से 50 फीसदी किराया बढ़ाने की मांग की थी। जिस पर परिवहन विभाग द्वारा 15 प्रतिशत का मामूली किराया बढ़ाया गया है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में निजी वाहनों के किराए की तुलना में राज्य सरकार द्वारा की गई बढ़ोतरी निहायत कम है। इसके अलावा भौगोलिक समानता होने के चलते उत्तराखंड में निजी परिवहन का किराया हिमाचल प्रदेश के समान होना चाहिए। सुधीर राय का आरोप है कि राज्य सरकार व परिवहन महकमे की लापरवाही के चलते उत्तराखंड में निजी परिवहन उद्योग समाप्ति के कगार पर पहुंच गया है। इसके अलावा पांच वर्ष के बाद किराए में महज 15 फीसदी की मामूली बढ़ोत्तरी परिवहन व्यापार के साथ छलावा है। लिहाजा सरकार के इस निर्णय का विरोध किया जाएगा।
विज्ञापन
गढ़वाल मंडल कांट्रेक्ट कैरिज एसोसिएशन ने हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर 40 प्रतिशत किराए बढ़ाने की मांग की है। एसोसिएशन का तर्क है कि बीते पांच वर्षों में बीमा, चेसिस, टायर, बॉडी, मोटर पार्ट्स, स्टाफ आदि खर्च में वृद्धि के सापेक्ष महज 15 प्रतिशत किराया बढ़ोत्तरी नाकाफी है।
एसोसिएशन के सचिव सुधीर राय का कहना है कि राज्य सरकार से बीते पांच साल से यात्री किराए में वृद्धि की मांग की जा रही है। एसोसिएशन की ओर से 50 फीसदी किराया बढ़ाने की मांग की थी। जिस पर परिवहन विभाग द्वारा 15 प्रतिशत का मामूली किराया बढ़ाया गया है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में निजी वाहनों के किराए की तुलना में राज्य सरकार द्वारा की गई बढ़ोतरी निहायत कम है। इसके अलावा भौगोलिक समानता होने के चलते उत्तराखंड में निजी परिवहन का किराया हिमाचल प्रदेश के समान होना चाहिए। सुधीर राय का आरोप है कि राज्य सरकार व परिवहन महकमे की लापरवाही के चलते उत्तराखंड में निजी परिवहन उद्योग समाप्ति के कगार पर पहुंच गया है। इसके अलावा पांच वर्ष के बाद किराए में महज 15 फीसदी की मामूली बढ़ोत्तरी परिवहन व्यापार के साथ छलावा है। लिहाजा सरकार के इस निर्णय का विरोध किया जाएगा।
विज्ञापन