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सरकारी विभागों के पास नीलकंठ में नहीं अपना ठौर
Updated Thu, 12 Jul 2018 01:44 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
कुंभ मेला, श्रावण मास की कांवड़ यात्रा और महाशिवरात्रि पर्व के समय पौराणिक नीलकंठ धाम में मंदिर समिति और अन्य धार्मिक संस्थाओं की करीब आधा दर्जन से अधिक धर्मशालाओं का लाभ यहां दर्शन और जलार्पण के लिए आने वाले लाखों तीर्थ यात्रियों को नहीं मिल पाता है। इसकी वजह यात्राकाल में यहां की धर्मशालाओं में विभिन्न सरकारी महकमों के अधिकारियों का डेरा होना है। ऐसे में यहां जुटने वाले दर्शनार्थियों को सड़कों पर खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ती है।
यह आलम तब है जबकि ग्राम पंचायत तोली नीलकंठ क्षेत्र में महकमों के कार्यालय भवन व विश्रामगृह बनाने के लिए ग्राम समाज की भूमि नि:शुल्क उपलब्ध कराई गई है। इसके बावजूद प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर क्षेत्र मेें राज्य सरकार, धर्मस्व, पर्यटन विभाग, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य, जिला पंचायत, जल संस्थान,ऊर्जा निगम आदि विभागों ने अब तक अपना कोई आश्रय, विश्रामगृह स्थापित नहीं किया है। ऐसे में मेला काल में देश-विदेश से यहां आने वाले श्रद्धालुओं, तीर्थयात्रियों नीलकंठ मेला क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक धर्मशालाओं के बावजूद एक रात का ठौर नहीं मिल पाता है।
स्थानीय लोग की जुबानी
मंदिर समिति के सचिव धन सिंह राणा, पीएस पयाल, सत्यपाल सिंह राणा, अवनीश नौटियाल का कहना है कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन को क्षेत्र में हर साल आयोजित होने वाले कांवड़ मेले व महाशिवरात्रि पर्व पर जुटने वाले सरकारी अमले के लिए निजी तौर पर व्यवस्था जुटानी चाहिए। जिससे यात्रियों की धर्मशाओं में आवासीय व्यवस्था हो सके, लेकिन सरकार यहां व्यवस्थाएं जुटाने को कभी गंभीर नहीं रही।
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बुजुर्गों-बच्चों और महिलाएं होती है परेशानी
यात्राकाल में शिवधाम में दर्शनार्थियों को जलाभिषेक के लिए कई किलोमीटर लंबी कतारों में घंटों अपनी बारी की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इसके बाद थके-हारे यात्रियों को किसी धर्मशाला में कमरा उपलब्ध नहीं हो पाता। लिहाजा मजबूरी में श्रद्धालुओं को खुले आसमान में रात बितानी पड़ती है या फिर रात में ही लौटना पड़ता है।
दस साल बाद भी नहीं किया निशुल्क भूमि का उपयोग
ग्राम सभा तोली, नीलकंठ द्वारा 10 साल पहले विभिन्न महकमों को कार्यालय, गेस्ट हाउस और पार्किंग निर्माण के लिए 48 नाली भूमि निशुल्क उपलब्ध कराई गई थी। इनमें पर्यटन विभाग को 32 नाली, पुलिस को पांच, जिला पंचायत को पांच, स्वास्थ्य विभाग को पांच नाली भूमि और ग्राम पंचायत को एक नाली भूमि का प्रस्ताव पारित कर निर्माण कार्य के लिए दी गई थी। क्षेत्र में जिला प्रशासन के पास राजस्व की काफी भूमि बंजर पड़ी है। बावजूद इसके इनमें से किसी भी महकमे द्वारा क्षेत्र में कोई निजी संसाधन नहीं जुटाए जा सके हैं। पुलिस विभाग ने उक्त भूमि पर चौकी स्थापित की है, लेकिन इसका उपयोग सिर्फ कांवड़ यात्रा के दौरान ही हो पाता है। स्वास्थ्य विभाग को मिली भूमि पर महज मातृ शिशु कल्याण केंद्र स्थापित किया गया है। अन्य महकमों द्वारा भूमि का कोई उपयोग नहीं किया गया है।
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कुंभ मेला, श्रावण मास की कांवड़ यात्रा और महाशिवरात्रि पर्व के समय पौराणिक नीलकंठ धाम में मंदिर समिति और अन्य धार्मिक संस्थाओं की करीब आधा दर्जन से अधिक धर्मशालाओं का लाभ यहां दर्शन और जलार्पण के लिए आने वाले लाखों तीर्थ यात्रियों को नहीं मिल पाता है। इसकी वजह यात्राकाल में यहां की धर्मशालाओं में विभिन्न सरकारी महकमों के अधिकारियों का डेरा होना है। ऐसे में यहां जुटने वाले दर्शनार्थियों को सड़कों पर खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ती है।
यह आलम तब है जबकि ग्राम पंचायत तोली नीलकंठ क्षेत्र में महकमों के कार्यालय भवन व विश्रामगृह बनाने के लिए ग्राम समाज की भूमि नि:शुल्क उपलब्ध कराई गई है। इसके बावजूद प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर क्षेत्र मेें राज्य सरकार, धर्मस्व, पर्यटन विभाग, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य, जिला पंचायत, जल संस्थान,ऊर्जा निगम आदि विभागों ने अब तक अपना कोई आश्रय, विश्रामगृह स्थापित नहीं किया है। ऐसे में मेला काल में देश-विदेश से यहां आने वाले श्रद्धालुओं, तीर्थयात्रियों नीलकंठ मेला क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक धर्मशालाओं के बावजूद एक रात का ठौर नहीं मिल पाता है।
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स्थानीय लोग की जुबानी
मंदिर समिति के सचिव धन सिंह राणा, पीएस पयाल, सत्यपाल सिंह राणा, अवनीश नौटियाल का कहना है कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन को क्षेत्र में हर साल आयोजित होने वाले कांवड़ मेले व महाशिवरात्रि पर्व पर जुटने वाले सरकारी अमले के लिए निजी तौर पर व्यवस्था जुटानी चाहिए। जिससे यात्रियों की धर्मशाओं में आवासीय व्यवस्था हो सके, लेकिन सरकार यहां व्यवस्थाएं जुटाने को कभी गंभीर नहीं रही।
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बुजुर्गों-बच्चों और महिलाएं होती है परेशानी
यात्राकाल में शिवधाम में दर्शनार्थियों को जलाभिषेक के लिए कई किलोमीटर लंबी कतारों में घंटों अपनी बारी की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इसके बाद थके-हारे यात्रियों को किसी धर्मशाला में कमरा उपलब्ध नहीं हो पाता। लिहाजा मजबूरी में श्रद्धालुओं को खुले आसमान में रात बितानी पड़ती है या फिर रात में ही लौटना पड़ता है।
दस साल बाद भी नहीं किया निशुल्क भूमि का उपयोग
ग्राम सभा तोली, नीलकंठ द्वारा 10 साल पहले विभिन्न महकमों को कार्यालय, गेस्ट हाउस और पार्किंग निर्माण के लिए 48 नाली भूमि निशुल्क उपलब्ध कराई गई थी। इनमें पर्यटन विभाग को 32 नाली, पुलिस को पांच, जिला पंचायत को पांच, स्वास्थ्य विभाग को पांच नाली भूमि और ग्राम पंचायत को एक नाली भूमि का प्रस्ताव पारित कर निर्माण कार्य के लिए दी गई थी। क्षेत्र में जिला प्रशासन के पास राजस्व की काफी भूमि बंजर पड़ी है। बावजूद इसके इनमें से किसी भी महकमे द्वारा क्षेत्र में कोई निजी संसाधन नहीं जुटाए जा सके हैं। पुलिस विभाग ने उक्त भूमि पर चौकी स्थापित की है, लेकिन इसका उपयोग सिर्फ कांवड़ यात्रा के दौरान ही हो पाता है। स्वास्थ्य विभाग को मिली भूमि पर महज मातृ शिशु कल्याण केंद्र स्थापित किया गया है। अन्य महकमों द्वारा भूमि का कोई उपयोग नहीं किया गया है।