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पिंडर को खंसर से जोड़ने वाली सड़क फॉरेस्ट में लटकी
Updated Fri, 22 Jun 2018 10:48 PM IST
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कर्णप्रयाग। पिंडर घाटी के नारायणबगड़ और थराली ब्लाक को खंसर के दिवालीखाल, माइथान आदि स्थानों से जोड़ने वाली लोनिवि की सड़कें लंबे समय से वन अधिनियम के तहत लटकी हुई हैं। यही नहीं गैरसैंण तहसील की प्रस्तावित 10 से अधिक सड़कों को तीन साल में वन विभाग से अनुमति नहीं मिल पाई है। विधानसभा परिसर भराड़ीसैंण को नैनीताल हाईवे से जोड़ने वाले मार्ग के चौड़ीकरण के प्रस्ताव को भी क्लीयरेंस नहीं मिल पाया है। ऐसे में ग्रामीण 3 से 10 किमी पैदल दूरी नाप रहे हैं।
वर्ष 2014 में गैरसैंण में लोक निर्माण विभाग का डिविजन अस्तित्व में आया। तब से विभाग ने 19 सड़कों के प्रस्ताव शासन को भेजे, जिनमें विभाग को महज 9 सड़कों पर अब तक केवल सैद्धांतिक स्वीकृति मिली है। विधिवत स्वीकृति नहीं मिलने से विभाग अभी इन सड़कों पर निर्माण कार्य शुरू नहीं कर पा रहा है। वहीं अन्य दस सड़कों के प्रस्ताव वन विभाग के डीएफओ से लेकर नोडल स्तर तक अटके पड़े हैं। ऐसे में इन सड़कों से जुड़ने वाले रंडोली, नैल, देवपुरी, पत्थरकट्टा, मूसौ, कुलागाड़, मरोड़ा, जिनगोड़ सहित 20 से अधिक गांव 3 से 10 किमी पैदल चलने को मजबूर हैं। लोनिवि के सहायक अभियंता आदित्य ठाकुर का कहना है कि सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी 9 सड़कों का निर्माण कार्य विधिवत स्वीकृति मिलने के बाद शुरू किया जाएगा। अन्य दस सड़कों को अभी तक वन अधिनियम से स्वीकृति नहीं मिल पाई है। स्वीकृति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इंसेट
ये सड़कें हैं अटकी
वन विभाग के आरओ स्तर पर गाजियाबाद-पत्थरकट्टा, दिवालीखाल-भराड़ीसैंण (चौड़ीकरण), दाड़िमडाली-मूसों-कुलागाड़ सड़क अटकी हुई है। वहीं
डीएफओ स्तर पर विनायकधार-कस्बीनगर, सीएफ स्तर पर कालीमाटी-मरोड़ा, नोडल स्तर पर बाटाधार-देवस्थान-रोहिड़ा और अंतिम स्तर पर बूंगीधार-हरगढ़ और खेती-रंडोली सड़क अटकी हुई है।
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वर्ष 2014 में गैरसैंण में लोक निर्माण विभाग का डिविजन अस्तित्व में आया। तब से विभाग ने 19 सड़कों के प्रस्ताव शासन को भेजे, जिनमें विभाग को महज 9 सड़कों पर अब तक केवल सैद्धांतिक स्वीकृति मिली है। विधिवत स्वीकृति नहीं मिलने से विभाग अभी इन सड़कों पर निर्माण कार्य शुरू नहीं कर पा रहा है। वहीं अन्य दस सड़कों के प्रस्ताव वन विभाग के डीएफओ से लेकर नोडल स्तर तक अटके पड़े हैं। ऐसे में इन सड़कों से जुड़ने वाले रंडोली, नैल, देवपुरी, पत्थरकट्टा, मूसौ, कुलागाड़, मरोड़ा, जिनगोड़ सहित 20 से अधिक गांव 3 से 10 किमी पैदल चलने को मजबूर हैं। लोनिवि के सहायक अभियंता आदित्य ठाकुर का कहना है कि सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी 9 सड़कों का निर्माण कार्य विधिवत स्वीकृति मिलने के बाद शुरू किया जाएगा। अन्य दस सड़कों को अभी तक वन अधिनियम से स्वीकृति नहीं मिल पाई है। स्वीकृति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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ये सड़कें हैं अटकी
वन विभाग के आरओ स्तर पर गाजियाबाद-पत्थरकट्टा, दिवालीखाल-भराड़ीसैंण (चौड़ीकरण), दाड़िमडाली-मूसों-कुलागाड़ सड़क अटकी हुई है। वहीं
डीएफओ स्तर पर विनायकधार-कस्बीनगर, सीएफ स्तर पर कालीमाटी-मरोड़ा, नोडल स्तर पर बाटाधार-देवस्थान-रोहिड़ा और अंतिम स्तर पर बूंगीधार-हरगढ़ और खेती-रंडोली सड़क अटकी हुई है।
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